फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   civic

ईंट भट्ठा

Tue, 06 Jul 2021 11:13 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 11:13 PM IST
विज्ञापन
civic
नूंह। प्रशासन ने 30 जून से सभी ईंट भट्ठों के संचालन पर पूरी तरह पाबंदी लगाई है। इसके बावजूद जिले के नूंह, नगीना सहित अन्य कई क्षेत्रों में ईंट भट्ठों को धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इस बारे में कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया है। नियमों की अनदेखी कर भट्ठा संचालक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने भट्ठों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

एनसीआर में हर वर्ष प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा हैं इसे ध्यान में रखते हुए ईंट भट्ठों को बंद कराने के निर्देश दिए है। अधिकतर जगहों पर रात के समय में इन्हें चलाया जा रहा है। दूसरी ओर राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए धुआं आदि फैलाने वाले ईंट भट्ठों के लिए जिग-जैग प्रणाली तय की है लेकिन क्षेत्र के अधिकतर भट्ठों में जिग जैग प्रणाली नहीं हैं। जिले में तकरीबन 75 ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जिनमें से कागजों पर खानापूर्ति के लिए ही नियमों का पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन

मनमाने रेट होते है तय
जिले में लगातार ईंट भट्ठों पर नियमों की सख्ती के चलते लोगों को आशियाना बनाना काफी मंहगा पड़ रहा है। हाल में 5500 से लेकर 6000 प्रति हजार की दर से ईंटों को बेचा जा रहा हैं। लोगों के लिए काफी महंगा पड़ रहा हैं। आने वाले समय में ईंटों के रेट में और अधिक वृद्वि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि यहां पर मनमाने तरीके से ईंट के रेट बढ़ाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जलाईजा रही तूड़ी
एनजीटी द्वारा सभी ईंट भट्ठों को गैस, बिजली व कोयला से चलाने का नियम तय किया हुआ है। इसके बावजूद पूरे सीजन अधिकतर ईंट भट्ठों पर तूड़ी से काम चलाया जा रहा है। सीमित ही ईंट भट्ठों के संचालक नियमों का पालन कर रह हैं।
क्या है जिग-जैग प्रणली ऱ्
भट्ठों में आमतौर पर ईंट पकाने के लिए छल्लियों में सीधी हवा दी जाती है। जिग जैग में टेढ़ी-मेढ़ी लाइन बनाकर हवा दी जाती है। इससे ईंधन कम लगता है। एक लाख ईंट पकाने में 26 टन कोयला खर्च होता है, इस तकनीक में 16 टन का ही खर्च है। दूसरी ओर इस प्रणाली से ईंटों की गुणवत्ता अच्छी रहती है। साधारण विधि का इस्तेमाल करने पर भट्ठों में करीब 50 फीसद ईंट अव्वल निकलती हैं। प्रदेश सरकार का दावा है कि इस तकनीक में 90 फीसद अव्वल ईंट होती हैं।
.........
टीम करेगी निरीक्षण
नूंह व पलवल प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने बताया कि ईंट भट्ठों को पूर्ण तरीके से बंद कराने निर्देश दिए गए है। अगर कोई ईंट भट्ठा संचालक इन नियमों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कई जगह इस तरह की शिकायत आई है इसके लिए टीम समय पर निरीक्षण कर रही है।

-----
क्या कहती है डीएफएससी ऱ्
इस बारे में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सीमा शर्मा ने बताया कि इस बारे में जानकारी ली जाएगी। अगर कहीं पर ईंट भट्ठा चलाया जा रहा है तो कड़ी कार्रवाई होगी।
फोटो ऱ् एक जगह पर चलाया जा रहा ईंट भट्टा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed