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चिटहेरा भूमि घोटाला : शासन को भेजी संलिप्त अफसरों की रिपोर्ट, कंपनी ने लौटाया मुआवजा
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ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन ने चिटहेरा भूमि घोटाले में संलिप्त और लापरवाही बरतने वालों अफसरों की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसमें उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में बड़ी संख्या में अफसरों के नाम शामिल हैं। वहीं, यशपाल तोमर के साथ भूमाफिया घोषित की गई कंपनी त्रिदेव रिटेल प्राइवेट लिमिटेड ने पट्टों की जमीन के मुआवजे की धनराशि 3.76 करोड़ रुपये लौटा दी है।
चिटहेरा गांव में वर्ष 1997 में 282 पट्टों का आवंटन हुआ था। जांच में पट्टों का आवंटन गलत मिला है। साथ ही, पट्टा बहाल होने के बाद नियमों के खिलाफ जाकर पट्टों का क्रय-विक्रय किया गया। इसमें भूमाफिया सक्रिय थे। बाद में काफी पट्टों का बैनामा ग्रेनो प्राधिकरण के नाम कर मुआवजा उठाया गया। घोटाले में भूमाफिया के साथ नेता और अफसर भी शामिल रहे हैं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि संलिप्त और लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई होनी है।
जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में वर्ष 1997 से वर्ष 2020 तक की पूरी प्रक्रिया व संलिप्तता का जिक्र किया है। पट्टों के आवंटन, गलत जांच रिपोर्ट तैयार करने, पट्टों को बहाल करने, भूमाफिया के साथ मिलकर रकबा बढ़ाने, पट्टा रजिस्टर गायब करने, संक्रमणीय भूमि दर्ज करने, भूमाफिया का साथ देने, जानकारी होने पर घोटालों को नहीं रोकने में लापरवाही बरतने और संलिप्त होने वाले अधिकारियों की जानकारी दी है। इनमें तहसीलदार से लेकर पीसीएस और आईएएस अधिकारी तक के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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भूमाफिया कंपनी त्रिदेव रिटेल ने लौटाए 3.76 करोड़
जिला प्रशासन ने घोटाले में शामिल भूमाफिया और अन्य से पट्टों की जमीन के मुआवजे की वसूली करने का फैसला लिया था। सख्ती के बाद त्रिदेव रिटेल प्राइवेट लिमिटेड ने 3.76 करोड़ रुपये का मुआवजा जिला प्रशासन को लौटा दिया है। दादरी एसडीएम आलोक गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 में पट्टों को बहाल किया गया था। उसके बाद भूमाफिया ने पट्टेदारों से जबरन बैनामा कराया। फिर वह जमीन प्राधिकरण को बेच दी। त्रिदेव कंपनी भी इसमें शामिल रही है। कंपनी ने प्राधिकरण के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट दिया है। कंपनी ने प्राधिकरण को 24 बैनामा कर यह मुआवजा उठाया था। उन्होंने बताया कि चिटहेरा में अन्य लोगों ने भी अनियमित तरीके से जमीन प्राधिकरण को बेची है। वे लोग भी मुआवजे की धनराशि वापस कर दें। अगर ऐसा नहीं किया तो फिर उनके खिलाफ यूपी राजस्व संहिता-2006 के तहत रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर वसूली की जाएगी। हालांकि, प्रशासन के अफसरों का कहना है कि पैसा वापस करने पर घोटाले में शामिल लोगों को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी।
वर्ष 2018 में भी हुई थी घोटाले की जांच
चिटहेरा भूमि घोटाले की जांच वर्ष 2018 में भी हुई थी, तब मेरठ कमिश्नर के आदेश पर गौतमबुद्ध नगर के तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। चर्चा है कि रिपोर्ट को दबा दिया गया था। अब जांच रिपोर्ट का पता चला है। घोटाले की जांच अधिकारी ने रिपोर्ट तलब की है।
उत्तराखंड के अफसरों के परिजनों का नाम शामिल
घोटाले में दादरी तहसील के राजस्व निरीक्षक की तरफ से नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इसमें भूमाफिया यशपाल तोमर, उसके नौकर और चालक भी शामिल हैं। वहीं चर्चा है कि तीन आरोपी उत्तराखंड के तीन अफसरों के रिश्तेदार हैं। आईपीएस और आईएएस अफसरों के ससुर, मां और पिता बताया गया है। हालांकि, जिला प्रशासन के अफसरों ने इस संबंध में चुप्पी साध रखी है। अफसरों ने इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि जांच में दोषियों के नाम शामिल किए गए हैं। वे किसके रिश्तेदार है, इसकी जानकारी नहीं है।
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चिटहेरा गांव में वर्ष 1997 में 282 पट्टों का आवंटन हुआ था। जांच में पट्टों का आवंटन गलत मिला है। साथ ही, पट्टा बहाल होने के बाद नियमों के खिलाफ जाकर पट्टों का क्रय-विक्रय किया गया। इसमें भूमाफिया सक्रिय थे। बाद में काफी पट्टों का बैनामा ग्रेनो प्राधिकरण के नाम कर मुआवजा उठाया गया। घोटाले में भूमाफिया के साथ नेता और अफसर भी शामिल रहे हैं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि संलिप्त और लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई होनी है।
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जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में वर्ष 1997 से वर्ष 2020 तक की पूरी प्रक्रिया व संलिप्तता का जिक्र किया है। पट्टों के आवंटन, गलत जांच रिपोर्ट तैयार करने, पट्टों को बहाल करने, भूमाफिया के साथ मिलकर रकबा बढ़ाने, पट्टा रजिस्टर गायब करने, संक्रमणीय भूमि दर्ज करने, भूमाफिया का साथ देने, जानकारी होने पर घोटालों को नहीं रोकने में लापरवाही बरतने और संलिप्त होने वाले अधिकारियों की जानकारी दी है। इनमें तहसीलदार से लेकर पीसीएस और आईएएस अधिकारी तक के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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भूमाफिया कंपनी त्रिदेव रिटेल ने लौटाए 3.76 करोड़
जिला प्रशासन ने घोटाले में शामिल भूमाफिया और अन्य से पट्टों की जमीन के मुआवजे की वसूली करने का फैसला लिया था। सख्ती के बाद त्रिदेव रिटेल प्राइवेट लिमिटेड ने 3.76 करोड़ रुपये का मुआवजा जिला प्रशासन को लौटा दिया है। दादरी एसडीएम आलोक गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 में पट्टों को बहाल किया गया था। उसके बाद भूमाफिया ने पट्टेदारों से जबरन बैनामा कराया। फिर वह जमीन प्राधिकरण को बेच दी। त्रिदेव कंपनी भी इसमें शामिल रही है। कंपनी ने प्राधिकरण के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट दिया है। कंपनी ने प्राधिकरण को 24 बैनामा कर यह मुआवजा उठाया था। उन्होंने बताया कि चिटहेरा में अन्य लोगों ने भी अनियमित तरीके से जमीन प्राधिकरण को बेची है। वे लोग भी मुआवजे की धनराशि वापस कर दें। अगर ऐसा नहीं किया तो फिर उनके खिलाफ यूपी राजस्व संहिता-2006 के तहत रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर वसूली की जाएगी। हालांकि, प्रशासन के अफसरों का कहना है कि पैसा वापस करने पर घोटाले में शामिल लोगों को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी।
वर्ष 2018 में भी हुई थी घोटाले की जांच
चिटहेरा भूमि घोटाले की जांच वर्ष 2018 में भी हुई थी, तब मेरठ कमिश्नर के आदेश पर गौतमबुद्ध नगर के तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। चर्चा है कि रिपोर्ट को दबा दिया गया था। अब जांच रिपोर्ट का पता चला है। घोटाले की जांच अधिकारी ने रिपोर्ट तलब की है।
उत्तराखंड के अफसरों के परिजनों का नाम शामिल
घोटाले में दादरी तहसील के राजस्व निरीक्षक की तरफ से नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इसमें भूमाफिया यशपाल तोमर, उसके नौकर और चालक भी शामिल हैं। वहीं चर्चा है कि तीन आरोपी उत्तराखंड के तीन अफसरों के रिश्तेदार हैं। आईपीएस और आईएएस अफसरों के ससुर, मां और पिता बताया गया है। हालांकि, जिला प्रशासन के अफसरों ने इस संबंध में चुप्पी साध रखी है। अफसरों ने इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि जांच में दोषियों के नाम शामिल किए गए हैं। वे किसके रिश्तेदार है, इसकी जानकारी नहीं है।