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चिटहेरा भूमि घोटाला : दादरी-हापुड़ के अफसरों की करतूत का खुला चिट्ठा, एक और केस

Mon, 23 May 2022 12:30 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 12:30 AM IST
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Chithera land scam: Open letter of handiwork of Dadri-Hapur officers, another case
ग्रेटर नोएडा/दादरी। चिटहेरा भूमि घोटाले में रविवार को दादरी कोतवाली में यशपाल तोमर समेत नौ आरोपियों के खिलाफ एक और केस दर्ज किया गया है। इसमें पहली बार तत्कालीन दादरी एसडीएम व एडीएम के कार्यकाल के दौरान की करतूत का चिट्ठा खुल गया है। एफआईआर में लिखा गया है कि अफसरों से मिलकर फर्जीवाड़े का अंजाम दिया गया। अनुबंध होते ही हापुड़ एडीएम के यहां फाइल स्थानांतरित कराकर पहले पट्टे बहाल करा लिए गए। इसके बाद तत्कालीन दादरी एसडीएम ने 110 पट्टे एक साथ संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर दिए। एफआईआर में एक बार फिर यशपाल तोमर व उसके नौकर, चालक, दोस्त व रिश्तेदार को नामजद किया गया है, जबकि दोनों अफसरों के पदों का एफआईआर में जिक्र किया गया है। ऐसे में लोग व पीड़ित सोशल मीडिया पर अफसरों और स्थानीय आरोपियों के नाम भी उजागर करने की मांग कर रहे हैं।
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राजस्व निरीक्षक पंकज निरवाल की ओर से कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि गांव चिटहेरा में भूमाफिया यशपाल तोमर ने 282 लोगों को जमीन आवंटन का प्रस्ताव 3 जुलाई 1997 को दिया था। इसे तत्कालीन उप जिलाधिकारी दादरी की ओर से 20 अगस्त वर्ष 1997 को स्वीकृति प्रदान की गई थी। पट्टे की जमीन की शिकायत भी की गई थी और कमियां भी पाई गईं थीं। इसमें यशपाल तोमर ने तीन नौकरों कर्मवीर, बेलू, कृष्णपाल को गांव चिटहेरा का निवासी बनाकर उनके नाम सैकड़ों बीघे जमीन करा दी थी, जबकि यह लोग बेहद गरीब हैं और पढ़ना-लिखना भी नहीं जानते। इनके नाम से जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी परिचित नौकर मालू के नाम करा दी थी। वर्ष 1997 में पट्टे जब तक यशपाल तोमर के लोगों के नाम बहाल नहीं हुए थे। अनुबंध होते ही फाइल एडीएम हापुड़ के यहां ट्रांसफर करा ली गई। तत्कालीन एडीएम हापुड़ के यहां से पट्टे बहाल कराने के बाद तत्कालीन एसडीएम दादरी ने 110 पट्टे संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर दिए।
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दादरी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि भूमि घोटाले में दूसरी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। शनिवार को पहली एफआईआर में नामजद यशपाल तोमर, नरेंद्र कुमार, कर्मवीर, बैलू, कृष्णपाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचेरमल, गिरीश वर्मा, सरस्वती देवी को ही दूसरी में नामजद किया गया है।
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स्थगनादेश आदेश के बावजूद उठाया मुआवजा, बढ़ाया रकबा
यशपाल ने सरकारी दस्तावेज व पत्रावलियों में रकबा बढ़ा दिया और बैनामा अपने लोगों के नाम करा लिया। कुछ जमीन का मुआवजा भी उठा लिया। वर्ष 2017 में अपर आयुक्त मेरठ राधेश्याम मिश्रा की अदालत में स्थगन आदेश होने के बावजूद पट्टे की जमीन का मुआवजा उठा लिया गया। तत्कालीन एसडीएम दादरी की ओर से स्थगन आदेश को पत्रावली पर दर्ज नहीं किया गया, जो बाद में जमीन खरीद-फरोख्त के बाद दर्ज किया गया। ऐसे में व्यापक पैमाने पर धांधली की गई। इसके बाद वर्ष 2012 में चिटहेरा गांव की पट्टे की जमीन का अनुबंध परिचितों के नाम किया था।
111 आवंटियों में से 68 अनुसूचित जाति के
वर्ष 2016 में जब यशपाल इन पट्टों की जमीन के बैनामे कराने की तैयारी करने लगा तो भूमि अनुसूचित जाति के नाम नहीं होने पर अपने नाम नहीं करा सकता था। ऐसे में उसने नौकरों कर्मवीर, कृष्णपाल व बेलू के गांव चिटहेरा में फर्जी तरीके से पहचान पत्र बनाकर तीनों के नाम जमीन खरीदी थी । 111 आवंटियों में से 68 व्यक्ति अनुसूचित जाति से हैं जिनमें से छह व्यक्ति ने भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बेची। 19 लोगों ने अभी तक जमीन नहीं बेची है। 43 व्यक्तियों ने भूमि अन्य को वितरित कर दी।

नौकरों के नाम खुलवाया था बैंक खाता
यशपाल ने कर्मवीर, बैलू, कृष्ण पाल के खाते भी दादरी बैंक में खुलवाए। तीनों के बैंक खाते में ज्ञानचंद को संयुक्त खातेदार भी बनाया गया था, ताकि जमीन का पैसा आने पर ज्ञानचंद निकाल सके। तोमर तत्कालीन अपर आयुक्त के बाबुओं से यह कहकर पत्रावली लेता था कि भूमि का मिलान कराना है और उसमें रकबा बढ़ा देता था। 15 से 20 लोगों के नाम का रकबा बढ़ाया गया था।
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