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चिटहेरा भूमि प्रकरण : एडीएम की जांच रिपोर्ट में खुलासा, पुलिस की मिलीभगत से हुआ घोटाला

Sun, 15 May 2022 01:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 01:42 AM IST
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Chithera land case: ADM's investigation report revealed, scam happened in collusion with police
ग्रेटर नोएडा। चिटहेरा भूमि घोटाले में पुलिस ने भी भूमाफिया का साथ दिया था। अगर कोई पट्टों की जमीन को बेचने का विरोध या शिकायत करता था तो फर्जी मुकदमों में जेल भेज दिया जाता था। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ये रिपोर्ट एडीएम ने जिलाधिकारी को सौंपकर सिफारिश की है कि अफसर विभागीय जांच कर आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करें।
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चिटहेरा गांव में पट्टों की जमीन का नियमों के खिलाफ जाकर क्रय-विक्रय किया गया था। भूमाफिया ने जबरन पट्टा धारकों से जमीन खरीदी थी। इसके बाद सरकारी दस्तावेज में जमीन कर रकबा बढ़ाकर मुआवजा उठा लिया गया। घोटाला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने एडीएम को इसकी जांच सौंपी थी। शुक्रवार की देर शाम अपर जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि अगर पट्टा धारक जमीन की रजिस्ट्री नहीं करता था या भूमाफिया का विरोध करता था तो उस पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाता था। कई पट्टा धारकों को अलग-अलग जिलों व राज्य से जेल भेजा गया है। इस संबंध में पुलिस विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। विभागीय जांच के बाद घोटाले में शामिल पुलिस अफसरों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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उच्च अधिकारियों पर भी हो कार्रवाई
घोटाले में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल से अन्य उच्च अधिकारियों की भी मिलीभगत रही है। जिस समय घोटाला हुआ था, जांच रिपोर्ट में उन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की गई है। साथ ही, उन उच्च अधिकारियों को भी दोषी माना है, जिन्होंने शिकायत मिलने के बाद भी उस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं की। इसमें तत्कालीन एसडीएम से लेकर अन्य उच्च अधिकारी भी शामिल हैं। इन पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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पट्टों को किया गया गलत बहाल
चिटहेरा गांव में इन पट्टों का आवंटन वर्ष 1997 में किया गया था। इसके बाद से ही पट्टों के आवंटन पर सवाल खड़े हो गए थे। अपर जिलाधिकारी (भूअधिपत्य) ने जांच के बाद सभी पट्टों का आवंटन निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ अपर आयुक्त मेरठ के पास मुकदमा चला। वहां से जांच डीएम हापुड़ को भेज दी गई। वहां से जांच एडीएम हापुड़ के पास पहुंच गई। एडीएम हापुड़ ने पट्टों को बहाल कर दिया। गौतमबुद्ध नगर एडीएम ने जांच रिपोर्ट में पट्टों की बहाली को गलत माना है।

फंसा देख प्रशासन के मुखबिर बने चालक व नौकर
चिटहेरा भूमि घोटाले के मुख्य आरोपी यशपाल तोमर ने नौकर व चालक के नाम करोड़ों रुपये संपत्ति कर रखी थी। अब जब घोटाला सामने आया है तो नौकर और चालक प्रशासन के मुखबिर बन गए हैं, ताकि उन्हें राहत मिल सके। एडीएम की जांच में भी नौकर और चालक ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इससे केस और मजबूत होगा।
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