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चिल्ला एलिवेटेड रोड : तीन माह में शुरू होगा काम, तैयार होने में लगेंगे 3.5 साल
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एजेंसी चयन का काम पूरा, एमजी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को मिला काम
अब आगे की प्रक्रिया में लगेंगे करीब तीन माह, छह लेन का होगा 5.96 किमी एलिवेटेड रोड
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मयूर फ्लाईओवर के करीब चिल्ला रेगुलेटर से महामाया फ्लाईओवर तक 5.96 किमी लंबे चिल्ला एलिवेटेड रोड का काम अगले तीन माह में शुरू होगा। वहीं, इसके निर्माण में करीब 3.5 साल लगेंगे। यूपी स्टेट ब्रिज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इसका टेंडर निकाला था। इसे बनाने वाली एजेंसी का चयन सोमवार को हो गया है।
छह लेन के प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण और पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी की होगी। इसकी निर्माण लागत करीब 787 करोड़ होगी। इसमें 74 करोड़ रुपये पहले ही खर्च हो चुके है। ऐसे में 680 करोड़ का टेंडर निकाला गया था। चयनित एजेंसी ने 624 करोड़ की बिड डाली थी। इसमें अन्य मदों को जोड़ते हुए रकम 650 करोड़ तक जाएगी। परियोजना में यूपी शासन और नोएडा प्राधिकरण को 50-50 प्रतिशत धनराशि वहन करनी होगी।
परियोजना के लिए पांच एजेंसियों ने टेंडर डाला था। फाइनेंशियल बिड खुलने पर सबसे कम बिड एमजी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने डाली। लिहाजा इसका चयन निर्माण एजेंसी के तौर पर कर लिया गया। अब आगे की प्रक्रिया के तहत उक्त एजेंसी ड्राइंग तैयार करेगी और इसे आईआईटी को भेजेगी। आईआईटी की संस्तुति के बाद इसे सेतु निगम को भेजी जाएगी। इसके बाद सेतु निगम की हरी झंडी के बाद काम शुरू हो पाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तीन से चार माह तक भी लग सकते है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इसका काम सितंबर-अक्तूबर तक शुरू हो पाएगा। हालांकि, एजेंसी चयन की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई।
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एक कैरेज दूसरे से होगा कुछ बड़ा
इस परियोजना में मुख्य एलिवेटेड रोड के दो कैरेज होंगे। एक कैरेज 5198 मीटर तो दूसरा 4273 मीटर लंबा होगा। यह दिल्ली में चिल्ला रेगुलेटर से शुरू करते हुए शाहदरा ड्रेन के ऊपर बनेगी। करीब छह किमी लंबी सड़क का दूसरा हिस्सा महामाया फ्लाईओवर से थोड़ा पहले खत्म हो जाएगा। इसके तैयार होने पर नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क पर भी ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। बगैर जाम में फंसे लोग चिल्ला रेगुलेटर से सीधे महामाया फ्लाईओवर व एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे। इसका सीधा फायदा पूर्वी दिल्ली के साथ गाजियाबाद से नोएडा-ग्रेनो के बीच सफर करने वाले लोगों को मिलेगा। इससे नोएडा लिंक रोड और डीएनडी फ्लाईओवर पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
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सेक्टर-15, 16 और 18 में बनेंगे पांच रैंप
एलिवेटेड रोड से चढ़ने और उतरने के लिए पांच रैंप बनेंगे। यह रैंप सेक्टर-15, 16 और 18 को जोड़ेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-15 से चढ़ने के लिए एक रैंप एलिवेटेड रोड पर बनाया जाएगा। सेक्टर-16 में दोनों ओर उतरने के लिए एक-एक रैंप बनेगा। वहीं, सेक्टर-16 में चढ़ने के लिए एक रैंप बनेगा। इसके अलावा सेक्टर-18 में उतरने के लिए एक रैंप बनेगा। चढ़ने और उतरने वाले रैंप तीन लेन के होंगे। वहीं इंटरमीडिएट रैंप दो लेन का होगा।
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दस लाख लोगों को मिलेगा लाभ
इसके निर्माण से अक्षरधाम, मयूर विहार से नोएडा, परी चौक, कालिंदी कुंज, सरिता विहार तक जाम की समस्या से लोगों को मुक्ति मिलेगी। साथ ही शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बहाली में भी मदद मिलेगी। इसके बनने से देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना जाने वाले करीब दस लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं, यहां से रोजाना नोएडा-दिल्ली का सफर करने वाले दो लाख लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी।
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अनुमानित लागत को लेकर खूब हुआ विवाद
इस एलिवेटेड रोड के काम को शुरू कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। एक बार काम शुरू भी हो चुका था, लेकिन शासन की ओर से फंड नहीं देने की वजह से काम रुक गया। अब बताया जा रहा है कि शासन के पास पीएम गतिशक्ति का 100 करोड़ रुपए आया है। इस पैसे को उक्त एलिवेटेड रोड के काम के लिए दिया जाएगा। वहीं, कुछ माह पहले भी इसका टेंडर निकाला गया था। लेकिन एजेंसियों ने टेंडर वैल्यू से अधिक राशि की बिड डाली। लिहाजा टेंडर निरस्त करना पड़ा। इसकी अनुमानित लागत भी काफी विवादों में रही। पहले 650 फिर 605, 801, 1000 करोड़ से अधिक अनुमानित लागत आंकी गई। आईआईटी की भी संस्तुति कराई गई। इसके बाद शासन ने इसकी अनुमानित लागत करीब 787 करोड़ आंकी। इसके बाद शासनादेश जारी किया गया। ऐसे में कई माह तक काम बंद रहा।
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फैक्ट फाइल : चिल्ला एलिवेटेड रोड
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- 787 करोड़ रुपये निर्माण का खर्च
- 74 करोड़ रुपए पूर्व में खर्च
- 13 फीसदी काम अब तक हुआ
- 87 फीसदी अधूरा काम
-3.5 साल में काम पूरा किया जाना प्रस्तावित
- 6 लेन का एलिवेटेड रोड
-5.96 किमी लंबा
- 10 लाख लोगों को होगा फायदा
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चिल्ला एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए एजेंसी का चयन हो गया है। एजेंसी चयन के बाद कुछ प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। करीब तीन से चार माह में काम शुरू हो जाएगा। इस काम 3.5 वर्ष में पूरा हो जाएगा। -विजय रावल, डीजीएम, नोएडा प्राधिकरण
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अब आगे की प्रक्रिया में लगेंगे करीब तीन माह, छह लेन का होगा 5.96 किमी एलिवेटेड रोड
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मयूर फ्लाईओवर के करीब चिल्ला रेगुलेटर से महामाया फ्लाईओवर तक 5.96 किमी लंबे चिल्ला एलिवेटेड रोड का काम अगले तीन माह में शुरू होगा। वहीं, इसके निर्माण में करीब 3.5 साल लगेंगे। यूपी स्टेट ब्रिज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इसका टेंडर निकाला था। इसे बनाने वाली एजेंसी का चयन सोमवार को हो गया है।
छह लेन के प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण और पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी की होगी। इसकी निर्माण लागत करीब 787 करोड़ होगी। इसमें 74 करोड़ रुपये पहले ही खर्च हो चुके है। ऐसे में 680 करोड़ का टेंडर निकाला गया था। चयनित एजेंसी ने 624 करोड़ की बिड डाली थी। इसमें अन्य मदों को जोड़ते हुए रकम 650 करोड़ तक जाएगी। परियोजना में यूपी शासन और नोएडा प्राधिकरण को 50-50 प्रतिशत धनराशि वहन करनी होगी।
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परियोजना के लिए पांच एजेंसियों ने टेंडर डाला था। फाइनेंशियल बिड खुलने पर सबसे कम बिड एमजी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने डाली। लिहाजा इसका चयन निर्माण एजेंसी के तौर पर कर लिया गया। अब आगे की प्रक्रिया के तहत उक्त एजेंसी ड्राइंग तैयार करेगी और इसे आईआईटी को भेजेगी। आईआईटी की संस्तुति के बाद इसे सेतु निगम को भेजी जाएगी। इसके बाद सेतु निगम की हरी झंडी के बाद काम शुरू हो पाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तीन से चार माह तक भी लग सकते है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इसका काम सितंबर-अक्तूबर तक शुरू हो पाएगा। हालांकि, एजेंसी चयन की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई।
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एक कैरेज दूसरे से होगा कुछ बड़ा
इस परियोजना में मुख्य एलिवेटेड रोड के दो कैरेज होंगे। एक कैरेज 5198 मीटर तो दूसरा 4273 मीटर लंबा होगा। यह दिल्ली में चिल्ला रेगुलेटर से शुरू करते हुए शाहदरा ड्रेन के ऊपर बनेगी। करीब छह किमी लंबी सड़क का दूसरा हिस्सा महामाया फ्लाईओवर से थोड़ा पहले खत्म हो जाएगा। इसके तैयार होने पर नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क पर भी ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। बगैर जाम में फंसे लोग चिल्ला रेगुलेटर से सीधे महामाया फ्लाईओवर व एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे। इसका सीधा फायदा पूर्वी दिल्ली के साथ गाजियाबाद से नोएडा-ग्रेनो के बीच सफर करने वाले लोगों को मिलेगा। इससे नोएडा लिंक रोड और डीएनडी फ्लाईओवर पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
सेक्टर-15, 16 और 18 में बनेंगे पांच रैंप
एलिवेटेड रोड से चढ़ने और उतरने के लिए पांच रैंप बनेंगे। यह रैंप सेक्टर-15, 16 और 18 को जोड़ेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-15 से चढ़ने के लिए एक रैंप एलिवेटेड रोड पर बनाया जाएगा। सेक्टर-16 में दोनों ओर उतरने के लिए एक-एक रैंप बनेगा। वहीं, सेक्टर-16 में चढ़ने के लिए एक रैंप बनेगा। इसके अलावा सेक्टर-18 में उतरने के लिए एक रैंप बनेगा। चढ़ने और उतरने वाले रैंप तीन लेन के होंगे। वहीं इंटरमीडिएट रैंप दो लेन का होगा।
दस लाख लोगों को मिलेगा लाभ
इसके निर्माण से अक्षरधाम, मयूर विहार से नोएडा, परी चौक, कालिंदी कुंज, सरिता विहार तक जाम की समस्या से लोगों को मुक्ति मिलेगी। साथ ही शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बहाली में भी मदद मिलेगी। इसके बनने से देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना जाने वाले करीब दस लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं, यहां से रोजाना नोएडा-दिल्ली का सफर करने वाले दो लाख लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी।
अनुमानित लागत को लेकर खूब हुआ विवाद
इस एलिवेटेड रोड के काम को शुरू कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। एक बार काम शुरू भी हो चुका था, लेकिन शासन की ओर से फंड नहीं देने की वजह से काम रुक गया। अब बताया जा रहा है कि शासन के पास पीएम गतिशक्ति का 100 करोड़ रुपए आया है। इस पैसे को उक्त एलिवेटेड रोड के काम के लिए दिया जाएगा। वहीं, कुछ माह पहले भी इसका टेंडर निकाला गया था। लेकिन एजेंसियों ने टेंडर वैल्यू से अधिक राशि की बिड डाली। लिहाजा टेंडर निरस्त करना पड़ा। इसकी अनुमानित लागत भी काफी विवादों में रही। पहले 650 फिर 605, 801, 1000 करोड़ से अधिक अनुमानित लागत आंकी गई। आईआईटी की भी संस्तुति कराई गई। इसके बाद शासन ने इसकी अनुमानित लागत करीब 787 करोड़ आंकी। इसके बाद शासनादेश जारी किया गया। ऐसे में कई माह तक काम बंद रहा।
फैक्ट फाइल : चिल्ला एलिवेटेड रोड
- 787 करोड़ रुपये निर्माण का खर्च
- 74 करोड़ रुपए पूर्व में खर्च
- 13 फीसदी काम अब तक हुआ
- 87 फीसदी अधूरा काम
-3.5 साल में काम पूरा किया जाना प्रस्तावित
- 6 लेन का एलिवेटेड रोड
-5.96 किमी लंबा
- 10 लाख लोगों को होगा फायदा
चिल्ला एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए एजेंसी का चयन हो गया है। एजेंसी चयन के बाद कुछ प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। करीब तीन से चार माह में काम शुरू हो जाएगा। इस काम 3.5 वर्ष में पूरा हो जाएगा। -विजय रावल, डीजीएम, नोएडा प्राधिकरण