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Noida News: पीएसी की सुनवाई के बाद तय होगा तत्कालीन अधिकारियों पर आरोप
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-कैग की रिपोर्ट के बाद अब अधिकारियों पर गाज गिराने की तैयारी
-कैग की रिपोर्ट के बाद पीएसी में सुनवाई शुरू
-सुनवाई खत्म होने के बाद आरोपियों पर अंतिम तौर पर कार्रवाई के होंगे आदेश
-शासन के आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी कर रहे सहयोग
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के कामकाज पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 2021 की रिपोर्ट के आधार पर गाज गिराने की तैयारी शुरू हो गई है। कैग की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए नोएडा प्राधिकरण से अपने विचार प्रस्तुत करने को कहा है। प्राधिकरण की ओर से रिपोर्ट देने के बाद अब शासन स्तर पर पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) इस मामले में सुनवाई कर रही है। पीएसी की बैठक के बाद अंतिम तौर पर यह तय होगा कि कैग की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के आधार पर किसके नाम पर आरोप तय करने हैं और कौन इससे बचकर बाहर निकल जाएगा। पीएसी की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों को भी मौजूद रहने को कहा गया है।
आगामी सात जून को लखनऊ में पीएसी की दूसरी बैठक है। इसमें स्पोर्ट्स सिटी का पूरा ब्यौरा देने को कहा गया है। नोएडा प्राधिकरण का वाणिज्यिक विभाग, वित्त विभाग, ग्रुप हाउसिंग विभाग, नियोजन विभाग समेत कई अन्य विभाग इसकी तैयारी में दिनरात लगे हुए हैं। इसमें सीईओ समेत सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इससे पहले की सुनवाई में केवल हल्की फुल्की जानकारी दी गई। लेकिन दूसरी बार की सुनवाई में पूरा ब्यौरा लेकर अधिकारी उपस्थित रहेंगे। संभव है कि इस दिन स्पोर्ट्स सिटी के कई सवालों के जवाब अधिकारियों को देने पड़ें।
इन बिंदुओं पर हो रही सुनवाई, दोषियों को किया जाएगा चिह्नित
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ग्रुप हाउसिंग के लिए आवंटित भूखंड की नीति पर सवाल
कैग ने ग्रुप हाउसिंग के किए गए भूखंड आवंटन की नीतियों पर सवाल उठाए गए थे। कैग का कहना है कि ऐसे प्लॉट केवल 10 प्रतिशत राशि लेकर आवंटित कर दिए गए। इनमें से अधिकांश भूखंडों पर निर्माण कार्य पूरे नहीं किए गए। यही नहीं प्राधिकरण की मूलधन की राशि तक वापस नहीं आ पाई। ब्याज के हजारों करोड़ रुपये अब तक बिल्डरों के पास हैं। इस पर प्राधिकरण ने लापरवाही बरती।
प्लॉट लेने में अनियमितता का आरोप
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट आवंटन के 12 मामलों में प्राधिकरण के रेट से केवल दो प्रतिशत तक रेट ऊपर रखा गया। इसके अलावा 42 मामलों में केवल दो पार्टियां सामने आईं। यहां यह भी सामने आया कि इनमें से अधिकांश एक ही समूह के हैं। यानी कहीं न कहीं इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत रही होगी।
तकनीकी पात्रता के मापदंड पर खरे नहीं उतरना
कुछ मामलों में तकनीकी पात्रता के मापदंड पर ध्यान नहीं दिया गया, जबकि ऐसे मामलों में आवंटन के लिए किए गए आवेदन को सिरे से खारिज कर देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और प्राधिकरण के स्तर पर लापरवाही की गई। अब यह लापरवाही जानबूझकर की गई या फिर अनजाने में हुई इसकी जांच के बाद आरोप तय होगा।
केवल जमीन देकर कर ली गई छुट्टी
प्राधिकरण की ओर से आवंटी को केवल जमीन देकर छुट्टी कर ली गई। उनकी ओर से इस मामले में पैसे की वापसी के लिए किसी तरह की योजना पर कोई काम नहीं किया गया। इसमें ऐसी योजना बनानी चाहिए थी कि जमीन के किस्त के साथ बिल्डर की परियोजना के काम को पूरा करने की अवधि पहले से तय होती। तब लोगों का भला होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
स्पोर्ट्स सिटी के मामले में खेल सुविधाएं विकसित नहीं करना
कैग ने अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण के अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि प्राधिकरण की नाक के नीचे जमीन को टुकड़ों में बांटकर बेच दिया गया। यही नहीं वहां बिल्डरों ने घर बना दिया। लेकिन खेल सुविधाएं विकसित नहीं की, जबकि सबसे पहले खेल सुविधाएं विकसित करनी थी।
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-कैग की रिपोर्ट के बाद पीएसी में सुनवाई शुरू
-सुनवाई खत्म होने के बाद आरोपियों पर अंतिम तौर पर कार्रवाई के होंगे आदेश
-शासन के आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी कर रहे सहयोग
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के कामकाज पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 2021 की रिपोर्ट के आधार पर गाज गिराने की तैयारी शुरू हो गई है। कैग की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए नोएडा प्राधिकरण से अपने विचार प्रस्तुत करने को कहा है। प्राधिकरण की ओर से रिपोर्ट देने के बाद अब शासन स्तर पर पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) इस मामले में सुनवाई कर रही है। पीएसी की बैठक के बाद अंतिम तौर पर यह तय होगा कि कैग की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के आधार पर किसके नाम पर आरोप तय करने हैं और कौन इससे बचकर बाहर निकल जाएगा। पीएसी की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों को भी मौजूद रहने को कहा गया है।
आगामी सात जून को लखनऊ में पीएसी की दूसरी बैठक है। इसमें स्पोर्ट्स सिटी का पूरा ब्यौरा देने को कहा गया है। नोएडा प्राधिकरण का वाणिज्यिक विभाग, वित्त विभाग, ग्रुप हाउसिंग विभाग, नियोजन विभाग समेत कई अन्य विभाग इसकी तैयारी में दिनरात लगे हुए हैं। इसमें सीईओ समेत सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इससे पहले की सुनवाई में केवल हल्की फुल्की जानकारी दी गई। लेकिन दूसरी बार की सुनवाई में पूरा ब्यौरा लेकर अधिकारी उपस्थित रहेंगे। संभव है कि इस दिन स्पोर्ट्स सिटी के कई सवालों के जवाब अधिकारियों को देने पड़ें।
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ग्रुप हाउसिंग के लिए आवंटित भूखंड की नीति पर सवाल
कैग ने ग्रुप हाउसिंग के किए गए भूखंड आवंटन की नीतियों पर सवाल उठाए गए थे। कैग का कहना है कि ऐसे प्लॉट केवल 10 प्रतिशत राशि लेकर आवंटित कर दिए गए। इनमें से अधिकांश भूखंडों पर निर्माण कार्य पूरे नहीं किए गए। यही नहीं प्राधिकरण की मूलधन की राशि तक वापस नहीं आ पाई। ब्याज के हजारों करोड़ रुपये अब तक बिल्डरों के पास हैं। इस पर प्राधिकरण ने लापरवाही बरती।
प्लॉट लेने में अनियमितता का आरोप
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट आवंटन के 12 मामलों में प्राधिकरण के रेट से केवल दो प्रतिशत तक रेट ऊपर रखा गया। इसके अलावा 42 मामलों में केवल दो पार्टियां सामने आईं। यहां यह भी सामने आया कि इनमें से अधिकांश एक ही समूह के हैं। यानी कहीं न कहीं इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत रही होगी।
तकनीकी पात्रता के मापदंड पर खरे नहीं उतरना
कुछ मामलों में तकनीकी पात्रता के मापदंड पर ध्यान नहीं दिया गया, जबकि ऐसे मामलों में आवंटन के लिए किए गए आवेदन को सिरे से खारिज कर देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और प्राधिकरण के स्तर पर लापरवाही की गई। अब यह लापरवाही जानबूझकर की गई या फिर अनजाने में हुई इसकी जांच के बाद आरोप तय होगा।
केवल जमीन देकर कर ली गई छुट्टी
प्राधिकरण की ओर से आवंटी को केवल जमीन देकर छुट्टी कर ली गई। उनकी ओर से इस मामले में पैसे की वापसी के लिए किसी तरह की योजना पर कोई काम नहीं किया गया। इसमें ऐसी योजना बनानी चाहिए थी कि जमीन के किस्त के साथ बिल्डर की परियोजना के काम को पूरा करने की अवधि पहले से तय होती। तब लोगों का भला होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
स्पोर्ट्स सिटी के मामले में खेल सुविधाएं विकसित नहीं करना
कैग ने अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण के अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि प्राधिकरण की नाक के नीचे जमीन को टुकड़ों में बांटकर बेच दिया गया। यही नहीं वहां बिल्डरों ने घर बना दिया। लेकिन खेल सुविधाएं विकसित नहीं की, जबकि सबसे पहले खेल सुविधाएं विकसित करनी थी।