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निठारी कांड: कोर्ट ने 14वें मामले में सुरेंद्र कोली को किया बरी, 12 मामलों में मिल चुकी है सजा-ए-मौत
Fri, 07 Jan 2022 06:12 PM IST
सुशील कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद
Published by: सुशील कुमार
Updated Fri, 07 Jan 2022 06:12 PM IST
सार
पुलिस ने मोनिंदर सिंह और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। छह वर्षीय बच्चे के अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में सीबीआई ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था।
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अदालत से बाहर आते हुए सुरेंद्र कोली
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नोएडा के निठारी कांड में बच्चे के अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के 14वें मामले में सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को साक्ष्यों के अभाव में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राकेश त्रिपाठी की अदालत ने बरी करने के आदेश दिए हैं।
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सीबीआई के लोक अभियोजक ने बताया कि 27 अप्रैल 2006 को छह वर्षीय एक बच्चा गायब हो गया था। मामले में उसके पिता ने नोएडा के थाना सेक्टर-20 में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दिसंबर 2006 में निठारी के मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। पुलिस ने मोनिंदर सिंह और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। छह वर्षीय बच्चे के अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में सीबीआई ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। सुनवाई के दौरान सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्य अपर्याप्त पाए गए। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सुरेंद्र कोली को बरी करने के आदेश दे दिए।
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दो मामलों में सुरेंद्र कोली हो चुका है बरी
निठारी कांड में सीबीआई ने 17 मामले दर्ज किए थे। इसमें से 12 मामलों में सुरेंद्र को फांसी की सजा हो चुकी है। 13वें और अब 14वें मामले में सुरेंद्र कोली बरी हो चुका है।
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यह था निठारी कांड
निठारी गांव निवासी कई लोगों के बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। गायब होने वालों में अधिकतर लड़कियां थीं। एक युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई थी। 2006 में सेक्टर-19 निवासी युवती के पिता ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर पर बेटी के अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने वादी को ही बेटी से देह व्यापार कराने का आरोप लगाते हुए भगा दिया था। इसके बाद पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद उसी साल 15 दिसंबर को अधिकारियों ने मोनिंदर व नौकर सुरेंद्र कोली से पूछताछ की, लेकिन रात में ही दबाव के कारण छोड़ दिया।
हाईकोर्ट में पुलिस द्वारा बनाई गई रिपोर्ट को पेश किया गया। इसमें मोनिंदर व सुरेंद्र को क्लीन चिट देने का प्रयास करते हुए वादी को ही आरोपी बनाने का प्रयास हुआ। हाईकोर्ट ने एक बार फिर पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की और पुलिस को प्रगति आख्या देने के लिए कहा। इसी बीच लापता हुई युवती का मोबाइल चालू हो गया। 29 दिसंबर को पुलिस मोबाइल व सुरेद्र कोली तक पहुंच गई।