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फर्जीवाड़े में ग्रेनो प्राधिकरण के पूर्व जीएम समेत 5 पर केस
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ग्रेटर नोएडा। इकोटेक-3 कोतवाली क्षेत्र के तुस्याना गांव में ग्राम समाज की जमीन के माध्यम से फर्जीवाड़ा कर करोड़ों का मुआवजा और प्लॉट लेने के मामले में पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें ग्रेनो प्राधिकरण के पूर्व जीएम रविंद्र तोगड़, मकौड़ा गांव के राजेंद्र सिंह, उनकी पुत्रवधू श्वेता सिंह, मधु सिंह और झंडेवालान नई दिल्ली की गीता सिंह का नाम है। पूर्व में प्राधिकरण के अधिकारियों से मामले की शिकायत की गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में याचिका दी गई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
सच सेवा समिति के अध्यक्ष यतेंद्र भाटी की शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, तुस्याना गांव में 170 बीघा जमीन पूर्व में चकबंदी के दौरान ग्राम समाज के रूप दर्ज की गई थी। वर्ष 1989 में सरकार ने टीपीए कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाने के लिए जमीन खरीदने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्तें पूरी नहीं करने पर साल 2006 में अनुमति को निरस्त कर दिया गया था। आरोपियों ने सांठगांठ कर उक्त जमीन को अपने और परिवार की 3 महिलाओं के नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद सरकारी अधिग्रहण में करोड़ों का मुआवजा, व्यावसायिक प्लॉट व अन्य लाभ प्राप्त कर लिए। आरोप है कि राजेेंद्र सिंह ने खुद को मुख्तियार बताकर पुत्रवधू श्वेता सिंह और मधु सिंह व दिल्ली की गीता सिंह को जमीन का बैनामा कर दिया। जबकि, जिस मधु सिंह के नाम बैनामा कराया गया, वह दूसरी महिला है।
आरटीआई के जवाब के बाद हुआ खुलासा
यतेंद्र भाटी ने बताया कि तुस्याना गांव में ग्राम समाज की करीब 200 बीघा जमीन और बैनामे के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए आरटीआई डाली गई तो पता चला कि जिस मुख्तियारनामे का जिक्र बैनामे में किया गया है, उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। आरोप यह भी है कि मामले से संबंधित कुछ फाइलें भी गायब कर दी गईं। पुलिस का कहना है कि केेस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
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सच सेवा समिति के अध्यक्ष यतेंद्र भाटी की शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, तुस्याना गांव में 170 बीघा जमीन पूर्व में चकबंदी के दौरान ग्राम समाज के रूप दर्ज की गई थी। वर्ष 1989 में सरकार ने टीपीए कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाने के लिए जमीन खरीदने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्तें पूरी नहीं करने पर साल 2006 में अनुमति को निरस्त कर दिया गया था। आरोपियों ने सांठगांठ कर उक्त जमीन को अपने और परिवार की 3 महिलाओं के नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद सरकारी अधिग्रहण में करोड़ों का मुआवजा, व्यावसायिक प्लॉट व अन्य लाभ प्राप्त कर लिए। आरोप है कि राजेेंद्र सिंह ने खुद को मुख्तियार बताकर पुत्रवधू श्वेता सिंह और मधु सिंह व दिल्ली की गीता सिंह को जमीन का बैनामा कर दिया। जबकि, जिस मधु सिंह के नाम बैनामा कराया गया, वह दूसरी महिला है।
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आरटीआई के जवाब के बाद हुआ खुलासा
यतेंद्र भाटी ने बताया कि तुस्याना गांव में ग्राम समाज की करीब 200 बीघा जमीन और बैनामे के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए आरटीआई डाली गई तो पता चला कि जिस मुख्तियारनामे का जिक्र बैनामे में किया गया है, उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। आरोप यह भी है कि मामले से संबंधित कुछ फाइलें भी गायब कर दी गईं। पुलिस का कहना है कि केेस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
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