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गोशाला में गोवंश मरने पर चार अफसर और कर्मचारियों पर केस दर्ज

Sun, 28 Mar 2021 12:31 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 12:31 AM IST
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case file against officer and employees in  case of cow dying
ग्रेटर नोएडा। जलपुरा स्थित ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की गोशाला में गोवंश मरने के मामले में शनिवार को सीईओ नरेंद्र भूषण सहित अन्य अधिकारियों ने गोशाला का निरीक्षण किया। खामियां मिलने पर गोशाला पर्यवेक्षण अधिकारी वरिष्ठ प्रबंधक स्वास्थ्य रमेश चंद, गोशाला में तैनात तकनीकी प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेमचंद, कंपाउंडर सतेंद्र कुमार और सुपरवाइजर शीतल प्रकाश के खिलाफ ईकोटेक-3 थाने में केस दर्ज कराया। वरिष्ठ प्रबंधक रमेश चंद का डिमोशन करते हुए प्रबंधक बनाकर उनके स्थान सलिल यादव की तैनाती की गई है। वहीं, डॉ. प्रेमचंद पर विभागीय कार्रवाई के लिए उनके मूल विभाग को आदेशित किया गया है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारी व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर गोशाला में गोवंश मरने का वीडियो वायरल हुआ था। इस घटना पर लोगों में रोष जताया था। कई संगठनों ने निंदा की थी। वहीं, घटना को लेकर प्रियंका गांधी के ट्वीट और कांग्रेसियों के प्रदर्शन के बाद राजनीतिक पारा भी चढ़ने लगा था। शासन व आलाधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए। इस पर शनिवार को प्राधिकरण के अधिकारियों ने गोशाला का निरीक्षण किया। प्राधिकरण के विशेष कार्य अधिकारी एसपी शुक्ला की शिकायत पर चारों अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अध्यादेश 2020 के अंतर्गत केस दर्ज कराया गया। वहीं, सीईओ ने लापरवाही मिलने पर प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक (स्वास्थ्य) रमेश चंद को गोशाला प्रभारी के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया।
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वहीं प्राधिकरण के अधिकारियों ने गोशाला के लिए वेटनरी चिकित्सक एवं तकनीकी स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग जिला प्रशासन से की है। बताया गया है कि यहां तीन स्थायी चिकित्सक एवं स्टॉफ की जरूरत है। जिससे कि बीमार गोवंशों का इलाज हो सके। सीईओ ने बताया कि प्राधिकरण, शासन व पशुपालन विभाग से समन्वय स्थापित कर एक वेटनरी अस्पताल की व्यवस्था कराई जाएगी। परियोजना विभाग को आदेशित किया गया है कि वेटनरी इलेक्ट्रिक क्रिमेशन ग्राउंड हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। दावा किया गया कि गोशाला में पर्याप्त मात्रा में चारा, भूसा, चोकर आदि उपलब्ध हैं। निरीक्षण के दौरान एसीईओ अमनदीप डुली, ओएसडी सचिन कुमार, एसपी शुक्ला आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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जिम्मेदार संविदा कर्मियों को हटाने के आदेश
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि गोशाला में लाए जाने वाले निराश्रित एवं बीमार गोवंश की देखभाल कर उपचार आदि की मुख्य जिम्मेदारी कर्मचारियों एवं सुपरवाइजर की होती है। गोवंश मरने की जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया। इस पर प्राधिकरण सीईओ ने जिम्मेदार संविदा कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा निवासियों से अपील की है कि चोटिल व बीमार गोवंश को सड़कों पर न छोड़कर प्राधिकरण से समन्वय स्थापित कर जलपुरा गोशाला पहुंचाने का कष्ट करें।
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