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Noida News: डीटीसी से जुड़ी कैग रिपोर्ट लोक लेखा समिति को भेजी
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विधानसभा मेें मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने तत्कालीन आप सरकार पर साधा निशाना
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60741 करोड़ रुपये का कर्ज डीटीसी पर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को विधानसभा में चर्चा के बाद लोक लेखा समिति को भेज दिया गया है। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, परिवहन मंत्री पंकज सिंह, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और भाजपा विधायकों ने डीटीसी की दुर्दशा के लिए पूर्व आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, आप विधायकों ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। प्रश्नकाल के दौरान हंगामा करने के कारण अध्यक्ष ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया था।
विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैग रिपोर्ट के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि डीटीसी पर 60741 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। वर्ष 2015 में डीटीसी के पास 4344 बसें थीं, जो 2023 तक घटकर 3937 रह गईं, जबकि दिल्ली को कम से कम 11000 बसों की जरूरत थी। पूर्व आप सरकार ने डीटीसी को घाटे में पहुंचाने के अलावा कोई ठोस प्रयास नहीं किया। अनुदान राशि देकर इसे निर्भर बना दिया, लेकिन कोई व्यावसायिक योजना नहीं बनाई। सीएम ने डीटीसी और डिम्ट्स के साझे प्रोजेक्ट में घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आईडीएफसी ने अपने 50 प्रतिशत शेयर दिल्ली सरकार को बेचने की पेशकश की थी, लेकिन दो साल तक निर्णय नहीं लिया गया और आखिरकार 95 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर मात्र 10 करोड़ रुपये में एक निजी कंपनी बीटीपीएल को बेच दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास 10 करोड़ रुपये भी नहीं थे, जो इतनी बड़ी संपत्ति बचा सके, आखिर यह सौदा क्यों किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बसों पर विज्ञापन लगाकर डिपो और आईएसबीटी का व्यावसायिक उपयोग कर डीटीसी को फायदे में लाया जा सकता था, लेकिन पिछली सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने घोषणा की कि अब महिला यात्रियों को कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे पता चलेगा कि कितनी महिलाएं मुफ्त यात्रा कर रही हैं।
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2015 से 2022 तक 14198 करोड़ का घाटा : पंकज सिंह
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि 2015 से 2022 के बीच डीटीसी को 14198 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पिछली सरकार के दौरान डीटीसी ने 3697 बसों में सीसीटीवी लगाने के लिए 52 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन यह सिस्टम कभी शुरू ही नहीं हुआ। परिवहन विभाग ई-बसों की सप्लाई में देरी के लिए 29.86 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने में नाकाम रहा। डीटीसी को फिर से मजबूत करने और भ्रष्टाचार की जांच के लिए कैग रिपोर्ट को लोक लेखा समिति को भेजा गया है।
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60741 करोड़ रुपये का कर्ज डीटीसी पर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को विधानसभा में चर्चा के बाद लोक लेखा समिति को भेज दिया गया है। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, परिवहन मंत्री पंकज सिंह, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और भाजपा विधायकों ने डीटीसी की दुर्दशा के लिए पूर्व आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, आप विधायकों ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। प्रश्नकाल के दौरान हंगामा करने के कारण अध्यक्ष ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया था।
विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैग रिपोर्ट के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि डीटीसी पर 60741 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। वर्ष 2015 में डीटीसी के पास 4344 बसें थीं, जो 2023 तक घटकर 3937 रह गईं, जबकि दिल्ली को कम से कम 11000 बसों की जरूरत थी। पूर्व आप सरकार ने डीटीसी को घाटे में पहुंचाने के अलावा कोई ठोस प्रयास नहीं किया। अनुदान राशि देकर इसे निर्भर बना दिया, लेकिन कोई व्यावसायिक योजना नहीं बनाई। सीएम ने डीटीसी और डिम्ट्स के साझे प्रोजेक्ट में घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आईडीएफसी ने अपने 50 प्रतिशत शेयर दिल्ली सरकार को बेचने की पेशकश की थी, लेकिन दो साल तक निर्णय नहीं लिया गया और आखिरकार 95 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर मात्र 10 करोड़ रुपये में एक निजी कंपनी बीटीपीएल को बेच दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास 10 करोड़ रुपये भी नहीं थे, जो इतनी बड़ी संपत्ति बचा सके, आखिर यह सौदा क्यों किया गया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि बसों पर विज्ञापन लगाकर डिपो और आईएसबीटी का व्यावसायिक उपयोग कर डीटीसी को फायदे में लाया जा सकता था, लेकिन पिछली सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने घोषणा की कि अब महिला यात्रियों को कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे पता चलेगा कि कितनी महिलाएं मुफ्त यात्रा कर रही हैं।
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2015 से 2022 तक 14198 करोड़ का घाटा : पंकज सिंह
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि 2015 से 2022 के बीच डीटीसी को 14198 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पिछली सरकार के दौरान डीटीसी ने 3697 बसों में सीसीटीवी लगाने के लिए 52 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन यह सिस्टम कभी शुरू ही नहीं हुआ। परिवहन विभाग ई-बसों की सप्लाई में देरी के लिए 29.86 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने में नाकाम रहा। डीटीसी को फिर से मजबूत करने और भ्रष्टाचार की जांच के लिए कैग रिपोर्ट को लोक लेखा समिति को भेजा गया है।