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765 केवी बिजलीघर की जमीन खरीद में गड़बड़ी का मामला
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78 करोड़ की गड़बड़ी, सीएजी ने उठाए सवाल
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र स्थित जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन के लिए जमीन की खरीद में हुई गड़बड़ी में नया मोड़ आ गया है। महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने जमीन खरीदने में 78 करोड़ रुपये की गड़बड़ी होने की बात कही है। बताया गया कि सरकारी संस्था के नाम पर रेट में छूट लेकर जमीन निजी संस्था को दे दी गई। इस पर सीएजी ने यीडा से जवाब मांगा है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) ने 2008 में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 765 केवी बिजलीघर बनाने का प्रस्ताव दिया। 3000 मेगावाट क्षमता के इस बिजलीघर के लिए करीब 100 एकड़ जमीन की दरकार थी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई जगह जमीन देखी गई, लेकिन किसी के पल्ले नहीं पड़ी। इसके बाद यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में सबस्टेशन बनाने का निर्णय हुआ। यूपीपीटीसीएल ने करीब 100 एकड़ जमीन मांगी। यमुना प्राधिकरण ने 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से करीब 156 करोड़ रुपये जमा कराने का पत्र ऊर्जा सचिव को भेज दिया। उधर से पत्र आया कि यूपीपीटीसीएल सरकारी संस्था है इसलिए रियायती दर (2050 रुपये प्रति वर्ग मीटर) पर जमीन उपलब्ध कराई जाए। इस पर प्राधिकरण ने एसीईओ की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी और कमेटी ने जमीन का रेट और वन टाइम लीज रेंट को जोड़कर 2560 रुपये प्रति वर्ग मीटर का रेट तय कर दिया। इस पर यमुना प्राधिकरण की बोर्ड ने भी मुहर लगा दी और 11 जनवरी 2013 को निजी कंपनी को करीब तीन लाख वर्ग मीटर जमीन आवंटित कर दी गई। इसके कुछ समय बाद रेट रिवाइज किया गया और 2870 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 19172 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई। गड़बड़ी यह हो गई कि यह बिजलीघर पीपीपी मॉडल पर बनाया जाना था, इस तथ्य को छिपाया गया और सरकारी संस्था के नाम पर छूट लेकर निजी संस्था को जमीन दे दी गई। 4000 रुपये से कम करके 2560 रुपये पर जमीन आवंटित कर दी गई। इससे प्राधिकरण को करीब 78 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें 64 करोड़ रुपये की जमीन और 14 करोड़ रुपये लीज रेंट शामिल है। सीएजी ने यमुना प्राधिकरण की बोर्ड को भी अंधेरे में रखे जाने की बात कही है। इस बिजलीघर को निजी संस्था ने ही बनाया है।
यीडा की जांच में सामने आई थी गड़बड़ी
2017 में मथुरा में जमीन घोटाले के खुलासे के दौरान ही जहांगीरपुर में जमीन खरीद में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। तत्कालीन यीडा चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने प्राधिकरण टीम से ही इसकी जांच कराई थी, जिसमें मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदे जाने और जरूरत से अधिक जमीन लिए जाने की बात सामने आई थी। उसी समय आरोप लगे थे कि कुछ अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से जहांगीरपुर में सस्ती दर पर किसानों से जमीन ली गई, उसके बाद प्राधिकरण ने उसे अधिगृहीत कर मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजा दिया, जिससे इन लोगों को मोटा मुनाफा मिला। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब यह जमीन सहमति से बैनामे के आधार पर खरीदी गई तो फिर तत्काल अतिरिक्त मुआवजा क्यों दिया गया।
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र स्थित जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन के लिए जमीन की खरीद में हुई गड़बड़ी में नया मोड़ आ गया है। महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने जमीन खरीदने में 78 करोड़ रुपये की गड़बड़ी होने की बात कही है। बताया गया कि सरकारी संस्था के नाम पर रेट में छूट लेकर जमीन निजी संस्था को दे दी गई। इस पर सीएजी ने यीडा से जवाब मांगा है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) ने 2008 में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 765 केवी बिजलीघर बनाने का प्रस्ताव दिया। 3000 मेगावाट क्षमता के इस बिजलीघर के लिए करीब 100 एकड़ जमीन की दरकार थी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई जगह जमीन देखी गई, लेकिन किसी के पल्ले नहीं पड़ी। इसके बाद यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में सबस्टेशन बनाने का निर्णय हुआ। यूपीपीटीसीएल ने करीब 100 एकड़ जमीन मांगी। यमुना प्राधिकरण ने 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से करीब 156 करोड़ रुपये जमा कराने का पत्र ऊर्जा सचिव को भेज दिया। उधर से पत्र आया कि यूपीपीटीसीएल सरकारी संस्था है इसलिए रियायती दर (2050 रुपये प्रति वर्ग मीटर) पर जमीन उपलब्ध कराई जाए। इस पर प्राधिकरण ने एसीईओ की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी और कमेटी ने जमीन का रेट और वन टाइम लीज रेंट को जोड़कर 2560 रुपये प्रति वर्ग मीटर का रेट तय कर दिया। इस पर यमुना प्राधिकरण की बोर्ड ने भी मुहर लगा दी और 11 जनवरी 2013 को निजी कंपनी को करीब तीन लाख वर्ग मीटर जमीन आवंटित कर दी गई। इसके कुछ समय बाद रेट रिवाइज किया गया और 2870 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 19172 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई। गड़बड़ी यह हो गई कि यह बिजलीघर पीपीपी मॉडल पर बनाया जाना था, इस तथ्य को छिपाया गया और सरकारी संस्था के नाम पर छूट लेकर निजी संस्था को जमीन दे दी गई। 4000 रुपये से कम करके 2560 रुपये पर जमीन आवंटित कर दी गई। इससे प्राधिकरण को करीब 78 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें 64 करोड़ रुपये की जमीन और 14 करोड़ रुपये लीज रेंट शामिल है। सीएजी ने यमुना प्राधिकरण की बोर्ड को भी अंधेरे में रखे जाने की बात कही है। इस बिजलीघर को निजी संस्था ने ही बनाया है।
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यीडा की जांच में सामने आई थी गड़बड़ी
2017 में मथुरा में जमीन घोटाले के खुलासे के दौरान ही जहांगीरपुर में जमीन खरीद में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। तत्कालीन यीडा चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने प्राधिकरण टीम से ही इसकी जांच कराई थी, जिसमें मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदे जाने और जरूरत से अधिक जमीन लिए जाने की बात सामने आई थी। उसी समय आरोप लगे थे कि कुछ अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से जहांगीरपुर में सस्ती दर पर किसानों से जमीन ली गई, उसके बाद प्राधिकरण ने उसे अधिगृहीत कर मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजा दिया, जिससे इन लोगों को मोटा मुनाफा मिला। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब यह जमीन सहमति से बैनामे के आधार पर खरीदी गई तो फिर तत्काल अतिरिक्त मुआवजा क्यों दिया गया।
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