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ढाई साल से रजिस्ट्री के इंतजार में फ्लैट खरीदार

Wed, 13 Apr 2016 04:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 13 Apr 2016 04:52 AM IST
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 buyers Waiting from two and a half years to registry of apartment
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा

सेक्टर-45 आम्रपाली सफायर बिल्डर ने ढाई साल पहले कब्जा दे दिया। खरीदार रहने भी लगे हैं, लेकिन रजिस्ट्री का अब तक अता-पता नहीं है। फ्लैट खरीदारों ने मंगलवार को प्राधिकरण के एसीईओ पीके अग्रवाल से मिलकर शिकायत की। प्राधिकरण से मिलने पहुंचे खरीदारों का नेतृत्व कर रहे आरके श्रीवास्तव ने बताया कि बिल्डर ने 2009 में 1035 फ्लैट का प्रोजेक्ट लांच किया था। दिसंबर 2011 में कब्जा देने का लक्ष्य था, लेकिन मार्च 2013 में बिना कंपलीशन और रजिस्ट्री के कब्जा देना शुरू किया। बैंक की किस्त दे रहे खरीदार भी फ्लैट में शिफ्ट हो गए।

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बिल्डर अब तक 800 खरीदारों को कब्जा दे चुका है। रजिस्ट्री किसी की भी नहीं हुई है। बिल्डर ने अब तक प्राधिकरण से कंपलीशन सर्टिफिकेट भी नहीं लिया है जबकि सितंबर में आवेदन कर दिया था। प्राधिकरण की बकाया रकम जमा न होने के कारण कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो रहा। दूसरी तरफ, प्रदेश सरकार दो फीसदी स्टांप ड्यूटी बढ़ाने जा रही है, जिसका बोझ फ्लैट खरीदारों पर आएगा। बिल्डर ने वादे के मुताबिक सुविधाएं भी नहीं दी हैं। सोसायटी में तीन लिफ्ट का वादा किया था, लेकिन दो ही लगी।
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धोनी को घेर रहे खरीदार
क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी आम्रपाली बिल्डर के ब्रांड एंबेसडर हैं। फ्लैट खरीदार उन्हें फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया के जरिये निशाना बना रहे हैं। आरके श्रीवास्तव का कहना है धोनी की इमेज से प्रभावित होकर बहुत से लोगों ने आम्रपाली में फ्लैट खरीदा है। धोनी को किसी कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनने से पहले उसकी गुणवत्ता को परख लेनी चाहिए थी। सोशल मीडिया पर धोनी के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता।
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प्राधिकरण जारी करेगा गाइडलाइन
प्राधिकरण के एसीईओ पीके अग्रवाल का कहना है कि कंपलीशन के लिए आवेदन करने वाले बिल्डरों से जुड़ी गाइडलाइन शीघ्र जारी होगी। बिल्डरों से यूपी अपार्टमेंट एक्ट के नियमों का पालन करने को कहा जाएगा। यह भी कहा जाएगा कि प्राधिकरण से जो भी प्लान स्वीकृत किया गया है उसके अनुरूप सुविधाओं को पूरा करने के बाद ही कंपलीशन के लिए आवेदन करें, ताकि सर्टिफिकेट देने में ज्यादा वक्त न लगे। जब तक बिल्डर का बकाया जमा नहीं होगा, कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा।

‘एलआईसी की तरह और भी हैं’
प्राधिकरण से मोर्टगेज की अनुमति के बिना ही एलआईसी की तरफ से यूनिटेक को 175 करोड़ रुपये देने जैसे कई और प्रकरण हो सकते हैं। प्राधिकरण की तरफ से ऐसी आशंका जाहिर की गई है। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि अगर किसी संस्था या बैंक ने प्राधिकरण से मोर्टगेज की अनुमति के बिना किसी बिल्डर को जमीन के एवज में कर्ज दिया है तो इसका जिम्मेदार वह खुद है। प्राधिकरण की अनुमति के बिना आवंटित जमीन नीलाम नहीं की सकती। प्राधिकरण ने यूनिटेक प्रकरण में सार्वजनिक सूचना भी प्रकाशित कर दी है। बिल्डर पर प्राधिकरण का करीब 2500 करोड़ रुपये बकाया है।


रजिस्ट्री कराने को बढ़ी भीड़
दो फीसदी स्टांप ड्यूटी बढ़ने की आशंका में संपत्ति दर्ज कराने वालों की भीड़ रजिस्ट्री विभाग में फिर दिखने लगी है। खरीदार दफ्तर के अंदर और गलियारे में बारी का इंतजार करते दिखे। हालांकि, इसे नवरात्रि का असर भी माना जा रहा है। वहीं, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी प्रमुख सचिव की तरफ से अतिरिक्त स्टांप की अधिसूचना किसी भी समय जारी हो जाने की संभावना जता रहे हैं। मालूम हो कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में सात फीसदी स्टांप ड्यूटी लिए जाने का गजट पहले ही प्रकाशित हो चुका है।

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