फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Buyers said, now the government should not negotiate

खरीदार बोले, अब वार्ता नहीं नतीजा निकाले सरकार

Sun, 07 Mar 2021 11:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 11:35 PM IST
विज्ञापन
Buyers said, now the government should not negotiate
नोएडा। हजारों फ्लैटों में बिना रजिस्ट्री खरीदारों को कब्जा दे दिया गया। हजारों खरीदार आज भी आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने बिल्डर-बायर विवाद के निपटारे के लिए 4 साल में छह बार उच्च स्तरीय बैठकें की, लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। शनिवार को एक बार फिर शासन ने प्रशासन, प्राधिकरण, बिल्डर और खरीदारों को एक मंच पर बुलाया। जहां बिल्डरों पर करोड़ों रुपये फंसाए बैठे प्राधिकरणों ने तल्ख तेवर दिखाए तो बिल्डरों ने एक बार फिर राहत की दरकार लगाई।
विज्ञापन

वहीं, फ्लैट खरीदारों ने आवाज उठाई कि अब वार्ता से काम नहीं चलेगा, सरकार को ठोस नतीजा निकालना होगा। बैठक में सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्य सचिव आरके तिवारी ने खरीदारों की समस्या के समाधान के लिए फोरम गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही, बिल्डर-खरीदारों और प्राधिकरण व प्रशासन से जुड़ीं समस्याओं को अलग से चिह्नित कर कार्रवाई करने को कहा है। नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि तीन बार मुख्यमंत्री, दो बार मंत्रियों के समूह और एक बार शहरी विकास मंत्रालय के सचिव के साथ बैठक हो चुकी है। हर बार उम्मीद नजर आती है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
विज्ञापन

खरीदारों से पूरी वसूली, सरकार से मांगी रियायत
बिल्डरों ने मांग उठाई है कि बैंकों की अधिकतम ब्याज दरों की तर्ज पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड लैंडिंग रेट (एमसीएलआर) की दरों के अनुसार देयताओं की फ्लैटवार गणना की जाए। खरीदारों का कहना है कि बिल्डरों ने उनसे 24 प्रतिशत तक ब्याज के साथ पूरी रकम वसूली, लेकिन प्राधिकरण की देनदारियों को नहीं निपटाया। इसका खामियाजा अब रजिस्ट्री रुकने पर खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बिल्डरों की मांग
- जमीन के क्षेत्रफल के बदले केवल उतनी जगह का शुल्क वसूला जाए, जितनी जगह पर अधिभोग प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं।
- प्राधिकरण ने एनजीटी के पारित आदेशों के आधार पर 77 दिन के जीरो पीरियड का लाभ दिया है। इसे बढ़ाकर 28 अक्तूबर 2013 से 19 अगस्त 2015 किया जाए।
- नारेडको की ओर से अपील की गई है कि ओसी के चरण में बकाया नहीं मांगा जाए। रजिस्ट्री के वक्त मांगा जाए।
- कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनमें सीसी दी जा चुकी है, लेकिन बकाया जमा नहीं किया गया है। इन्हें शासनादेश में शामिल करने को कहा गया है, ताकि रजिस्ट्री की जा सके।

- बिल्डरों की मांग है कि कोर्ट की ओर से पहले किए गए निर्णय, जिसमें सामान्य ब्याज पर बकाया लेना है, उसी के तहत रजिस्ट्री कराई जाए। अगर कोर्ट का निर्णय इसके खिलाफ आता है तो वह बकाया जमा करेंगे। इसकी अंडरटेकिंग भी देंगे।
खरीदारों की मांग
- बिल्डर परियोजनाओं का नक्शा स्वीकृत कराने के बाद उसमें कोई बदलाव न कर सके, इसका ठोस प्रावधान होना चाहिए।
- खरीदारों ने बकाया या जो भी लाभ बिल्डर को दिया है, वह खरीदारों को भी मिले, क्योंकि उन्होंने नियमों के तहत ही पैसा दिया है।
- बिल्डर ने परियोजनाओं को रहने लायक बनाया है या नहीं, क्लब हाउस, ग्रीन एरिया, बिजली, लिफ्ट जैसी सुविधाओं की जांच ओसी के समय की जाए।
- 2016 से पहले के ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के आवंटी भी रेरा के अधिकार क्षेत्र में सम्मिलित किए जाएं।
- ग्रुप हाउसिंग में एक ही मीटर से घर की बिजली और मेंटेनेंस देखी जाती है। जबकि अलग-अलग मीटर होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed