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बिल्डरों ने भी गिरवी रखा है आपका फ्लैट, खरीदारों के हाथ से कभी भी जा सकता है घर

Tue, 26 Apr 2016 12:55 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 26 Apr 2016 12:55 PM IST
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builder leized houses in noida for making payments to banks
- फोटो : अमर उजाला

अगर आपने किसी बिल्डर से फ्लैट खरीदा है, तो यह खबर आपको चौंका सकती है। आपके फ्लैट पर भी बिल्डर ने भी बैंकों से मोटा कर्ज ले रखा है। दुआ कीजिए कि बिल्डर इस कर्ज को चुका दें। अन्यथा कर्ज देने वाले बैंक भी आपके फ्लैट पर ही दावा ठोक सकते हैं।

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हाल ही में सेक्टर-96, 97 व 98 में यूनिटेक को आवंटित जमीन की नीलामी की घटना याद होगी। कंपनी ने 14.04 लाख वर्ग मीटर जमीन पर एलआईसी से 184 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है।
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इसकी रिकवरी के लिए एलआईसी ने नीलामी की सूचना तक प्रकाशित कर दी। इस बीच प्राधिकरण को पता चल गया और प्राधिकरण ने नीलामी पर रोक लगा दी। यूनिटेक की तरह ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा और क्रॉसिंग रिपब्लिक के कई नामी बिल्डरों ने प्रोजेक्ट निर्माण के लिए बैंकों से अरबों रुपये का कर्ज ले रखा है।
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दरअसल, बिल्डर किसी बैंक से कर्ज लेने से पहले मोर्टगेज दस्तावेज तैयार कर उसे रजिस्ट्री विभाग में पंजीकृत कराते हैं। उस पर ठीकठाक स्टांप शुल्क भी देते हैं। सेक्टर-16बी के प्लॉट पर 375 करोड़ के कर्ज के दस्तावेज पर करीब 1.87 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क दिए हैं।

सेक्टर-79 के एक प्रोजेक्ट पर 225 करोड़ रुपये के कर्ज वाले दस्तावेज पर बिल्डर ने 1.25 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क दिया है। क्रॉसिंग रिपब्लिक के एक बिल्डर ने मोर्टगेट दस्तावेज की रजिस्ट्री नोएडा में कराई है। इसने भी करोड़ों रुपये का कर्ज ले रखा है। ऐसे बिल्डरों की और भी है।

रजिस्ट्री विभाग के एक अधिकारी कहते हैं कि प्रोजेक्ट निर्माण के लिए कर्ज लेना गलत नहीं है, लेकिन दिक्कत उस समय होगी, जब किसी कारण से बिल्डर कर्ज नहीं चुका पाएगा। कर्ज देने वाली संस्था उस संपत्ति को ही कब्जे में लेगी, जिस पर कर्ज लिया गया है। उसे नीलाम कर कर्ज वसूलेगी।

फ्लैट एक, कर्ज तीन

builder leized houses in noida for making payments to banks

सेक्टर====रकम (करोड़ में)=====बैंक
93ए====630==============इंडिया बुल्स
16बी====375=============आईडीबीआई
16 बी===175==============एक्सिस बैंक
79=====225==============आईडीबीआई

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अधिकतर संपत्तियों पर तीन कर्ज का बोझ है। पहला कर्ज प्राधिकरण का है। प्राधिकरण ने बिल्डर को सिर्फ 10 फीसदी भुगतान पर जमीन आवंटित किया है। बाकी कर्ज है, जिसे बिल्डर किस्तों में चुकाते हैं। दूसरा कर्ज बिल्डरों ने प्रोजेक्ट बनाने के लिए उसी संपत्ति पर बैंकों से ले रखा है। तीसरा, उन फ्लैट खरीदारों पर कर्ज है, जिन्होंने बैंकों से लोन लेकर फ्लैट खरीदा है। उसकी ईएमआई भर रहे हैं। ज्यादातर खरीदार इसी श्रेणी के हैं।

खरीदार के पक्ष में फ्लैट की सब लीज से पहले हर तरह की देयता खत्म होनी चाहिए। बिल्डर ने प्राधिकरण से जो कर्ज ले रखा है उसका भी भुगतान कर दे और बिल्डर ने बैंकों से लिए गए कर्ज का भी पूरा भुगतान कर दे, जिससे कि भविष्य में फ्लैट खरीदार को किसी तरह की परेशानी न हो। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दोनों प्राधिकरणों की है। खासकर मंदी के दौर में इस पर गौर करने की जरूरत है। खरीदार ने खुद ही फ्लैट पर बैंकों से कर्ज ले रखा होता है। उस पर किसी और तरह का बोझ नहीं डाला जा सकता। - वीडी शर्मा, डीआईजी स्टांप (सेवानिवृत्त)।

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