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Noida News: खंडहर हो रही पार्किंग में बनाएं डिस्प्ले सेंटर
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खंडहर हो रही पार्किंग में बनाएं डिस्प्ले सेंटर
- एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने औद्योगिक विकास मंत्री को पत्र लिखकर दिया सुझाव
1074 करोड़ से बनीं पार्किंग का नहीं हो रहा इस्तेमाल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में विकास परियोजनाओं के नाम पर धन की बर्बादी का मामला उद्यमी संगठन भी उठा रहे हैं। अलग-अगल सेक्टरों में करीब 1074 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गईं मल्टीलेवल और भूमिगत पार्किंग का इस्तेमाल नहीं होने की शिकायत औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी तक पहुंच गई है। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से मंत्री को भेजे गए पत्र में पार्किंग के हिस्से में औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए डिस्प्ले सेंटर बनाने का सुझाव दिया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने बताया कि एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत रेडिमेड गारमेंट और मैन्युफैक्चरिंग का हब होने के बावजूद नोएडा के हजारों उद्योगों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए डिस्प्ले सेंटर आज तक नहीं बनाया जा सका है। टेस्टिंग लैब नहीं होने के कारण नोएडा के उद्यमियों को अपने उत्पादों की जांच के लिए बेंगलुरु या भोपाल जाना पड़ता है। मशीनरी बाजार नहीं होने के कारण छोटे-छोटे टूल्स, मशीनरी यहां तक की एक पेंच खरीदने के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में 550 करोड़ रुपये से बनी बॉटेनिकल गार्डन मल्टीलेवल पार्किंग और 243 करोड़ से बनी सेक्टर-18 मल्टीलेवल पार्किंग के एक हिस्से में औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए डिस्प्ले सेंटर बनया जा सकता है। इससे औद्योगिक नगरी को नई पहचान मिलेगी। यह पार्किंग इतनी बड़ी है कि यहां टेस्टिंग लैब और मशीनरी बाजार भी बनाया जा सकता है। अहम है कि दोनों पार्किंग रखरखाव नहीं होने के कारण खंडहर में तब्दील हो रही हैं।
वहीं औद्योगिक सेक्टर-1, 3 व 5 की भूमिगत पार्किंग के निर्माण के बाद भी लोग सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करते हैं। लगभग 115 करोड़ रुपया खर्च कर इनका निर्माण किया गया है। औद्योगिक सेक्टरों की सड़कें अब भी जाम से बेहाल हैं। संस्था का सुझाव है कि इन पार्किंगों का प्रयोग श्रमिकों के हित में किया जाए। पार्किंग के ऊपर श्रमिकों के लिए सस्ते खाने की कैंटीन आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
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- एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने औद्योगिक विकास मंत्री को पत्र लिखकर दिया सुझाव
1074 करोड़ से बनीं पार्किंग का नहीं हो रहा इस्तेमाल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में विकास परियोजनाओं के नाम पर धन की बर्बादी का मामला उद्यमी संगठन भी उठा रहे हैं। अलग-अगल सेक्टरों में करीब 1074 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गईं मल्टीलेवल और भूमिगत पार्किंग का इस्तेमाल नहीं होने की शिकायत औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी तक पहुंच गई है। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से मंत्री को भेजे गए पत्र में पार्किंग के हिस्से में औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए डिस्प्ले सेंटर बनाने का सुझाव दिया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने बताया कि एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत रेडिमेड गारमेंट और मैन्युफैक्चरिंग का हब होने के बावजूद नोएडा के हजारों उद्योगों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए डिस्प्ले सेंटर आज तक नहीं बनाया जा सका है। टेस्टिंग लैब नहीं होने के कारण नोएडा के उद्यमियों को अपने उत्पादों की जांच के लिए बेंगलुरु या भोपाल जाना पड़ता है। मशीनरी बाजार नहीं होने के कारण छोटे-छोटे टूल्स, मशीनरी यहां तक की एक पेंच खरीदने के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में 550 करोड़ रुपये से बनी बॉटेनिकल गार्डन मल्टीलेवल पार्किंग और 243 करोड़ से बनी सेक्टर-18 मल्टीलेवल पार्किंग के एक हिस्से में औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए डिस्प्ले सेंटर बनया जा सकता है। इससे औद्योगिक नगरी को नई पहचान मिलेगी। यह पार्किंग इतनी बड़ी है कि यहां टेस्टिंग लैब और मशीनरी बाजार भी बनाया जा सकता है। अहम है कि दोनों पार्किंग रखरखाव नहीं होने के कारण खंडहर में तब्दील हो रही हैं।
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वहीं औद्योगिक सेक्टर-1, 3 व 5 की भूमिगत पार्किंग के निर्माण के बाद भी लोग सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करते हैं। लगभग 115 करोड़ रुपया खर्च कर इनका निर्माण किया गया है। औद्योगिक सेक्टरों की सड़कें अब भी जाम से बेहाल हैं। संस्था का सुझाव है कि इन पार्किंगों का प्रयोग श्रमिकों के हित में किया जाए। पार्किंग के ऊपर श्रमिकों के लिए सस्ते खाने की कैंटीन आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
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