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बजट 2019 सुस्त उद्योगों को राहत की दरकार
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बजट 2019 : सुस्त उद्योगों को राहत की दरकार
नोएडा। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पांच जुलाई को पेश होने जा रहा है। हालांकि, इस साल फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में उद्योग जगत के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई थी, लेकिन विदेशों से आने वाली मशीनरी और टूल पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) हटाकर मैन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी गई थी। क्या ये राहत इस बार भी बरकरार रहेगी और क्या कॉरपोरेट टैक्स का बोझ कम होगा, इसे लेकर ऊहापोह की स्थिति है। ऐसे में इस बार बजट से उद्योगों को क्या उम्मीदें हैं, यह जानने की कोशिश की गई। पेश है रिपोर्ट:-
चाइना ने भारत के छोटे उद्योगों को खासा प्रभावित किया है। दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के नाम पर महज असेंबलिंग यूनिट ही रह गईं हैं। चाइना से आयातित सामान पर मेड इन इंडिया का स्टीकर लगाकर उपभोक्ताओं की आंख में धूल झोंकी जा रही है। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए, ताकि राजस्व और रोजगार बढ़े।
- विपिन मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन
बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब देश की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी हुई है। मैन्यूफेक्चरिंग उद्योग की रफ्तार भी मंद है, इससे बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ी है। ऐसे में नए वित्त मंत्री के सामने इस बार ये दो बड़ी चुनौतियां होंगी। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इस बजट में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कारगर उपाय किए जाएंगे।
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- दलजीत सिंह, अध्यक्ष्र, नोएडा इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
देश में कॉरपोरेट टैक्स की दर अधिक है। इसे जल्द से जल्द तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है। उद्योगों के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स का बोझ कम किए जाने की बड़ी जरूरत है, ताकि कंपनियों का मुनाफा बढ़ सके। ऑटो मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सेक्टर पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- लव मल्होत्रा, अमर उजाला एमएसएमई अवार्ड विजेता
अंतरिम बजट में निचले तबके, छोटे व्यापारियों और किसानों को खुश किया गया था, लेकिन उद्योग जगत को कोई खास राहत नहीं मिली थी। सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत देने की जरूरत है।
- कुलदीप गोयल, चेयरमैन, आईआईए नोएडा चैप्टर
कंज्यूमर डिमांड कम होने से मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ प्रभावित हुई है। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। इस बार बजट में उद्योग और किसानों पर सरकार का फोकस हो सकता है। कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। कर के बोझ से भी राहत की उम्मीद है।
- आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष, ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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नोएडा। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पांच जुलाई को पेश होने जा रहा है। हालांकि, इस साल फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में उद्योग जगत के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई थी, लेकिन विदेशों से आने वाली मशीनरी और टूल पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) हटाकर मैन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी गई थी। क्या ये राहत इस बार भी बरकरार रहेगी और क्या कॉरपोरेट टैक्स का बोझ कम होगा, इसे लेकर ऊहापोह की स्थिति है। ऐसे में इस बार बजट से उद्योगों को क्या उम्मीदें हैं, यह जानने की कोशिश की गई। पेश है रिपोर्ट:-
चाइना ने भारत के छोटे उद्योगों को खासा प्रभावित किया है। दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के नाम पर महज असेंबलिंग यूनिट ही रह गईं हैं। चाइना से आयातित सामान पर मेड इन इंडिया का स्टीकर लगाकर उपभोक्ताओं की आंख में धूल झोंकी जा रही है। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए, ताकि राजस्व और रोजगार बढ़े।
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- विपिन मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन
बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब देश की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी हुई है। मैन्यूफेक्चरिंग उद्योग की रफ्तार भी मंद है, इससे बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ी है। ऐसे में नए वित्त मंत्री के सामने इस बार ये दो बड़ी चुनौतियां होंगी। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इस बजट में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कारगर उपाय किए जाएंगे।
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- दलजीत सिंह, अध्यक्ष्र, नोएडा इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
देश में कॉरपोरेट टैक्स की दर अधिक है। इसे जल्द से जल्द तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है। उद्योगों के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स का बोझ कम किए जाने की बड़ी जरूरत है, ताकि कंपनियों का मुनाफा बढ़ सके। ऑटो मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सेक्टर पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- लव मल्होत्रा, अमर उजाला एमएसएमई अवार्ड विजेता
अंतरिम बजट में निचले तबके, छोटे व्यापारियों और किसानों को खुश किया गया था, लेकिन उद्योग जगत को कोई खास राहत नहीं मिली थी। सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत देने की जरूरत है।
- कुलदीप गोयल, चेयरमैन, आईआईए नोएडा चैप्टर
कंज्यूमर डिमांड कम होने से मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ प्रभावित हुई है। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। इस बार बजट में उद्योग और किसानों पर सरकार का फोकस हो सकता है। कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। कर के बोझ से भी राहत की उम्मीद है।
- आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष, ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन