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Noida News: करेले की मिठास, काला पत्थर की दिल्ली दीवानी
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- जनकपुरी दिल्ली हाट में चल रहे मैंगो फेस्टिवल में आए अतरंगी नामों के आम
- 500 किस्म के आम को देख चकित हो रहे दिल्ली वाले
राकेश शर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली वाले इन दिनों करेले की मिठास, काला पत्थर के स्वाद, इलाइची की रंगत, हाथी धूल की खुशबू के दीवाने हैं। यहीं नहीं चमचम, पान, भेल, पत्थर, रसगुल्ला, अंगूरदाना, गुलाब जामुन, फर्जी, नकली, पान पत्ता, जलेबी, चोकलेट, कलुआ केला, सहित अन्य की भी बड़ी पूछ है।
इन नामों पर आप हैरान न हों। यह सब आम की अलग-अलग प्रजातियां हैं, जिनसे जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट सजा हुआ है। यहां आम की करीब 500 प्रजातियां मौजूद हैं और दिल्ली के लोग इनका लुत्फ उठा रहे हैं। दरअसल करेला आम हाइब्रिड प्रजाति है, जिसे पंतनगर यूनिवर्सिटी उत्तराखंड क्षेत्र में विकसित किया गया है। यह एक मीठा आम है जिसका फल जून के मध्य तक पक कर तैयार हो जाता है। यह साइज में बढ़ा होता है और इसका छिलका भी हरा होता है। वहीं आम की काला पत्थर प्रजाति उत्तर प्रदेश लखनऊ के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। जबकि हाथी धूल आम सीतापुर, मलिहाबाद क्षेत्र में पाया जाता है। यह आम आचार के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। यह आकार में बड़ा होता है और स्वाद में कुछ खट्टा होता है।
वहीं जलेबी, गुलाब जामुन, कुमकुम आम भी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पाया जाता है। जबकि अंगूरदाना हाइब्रिड प्रजाति है। यह खाने में मीठा और आकार अंगूर के बराबर होता है। इसे उगाने वाले किसान बताते हैं कि इस आम की खपत विदेशों में काफी ज्यादा है। पकने के बाद इसका स्वाद चीनी की तरह लगता है। वहीं नकली आम की भी अपनी कहानी है। इसका स्वाद खाने में कभी मीठा लगता है तो कभी खट्टा। यह सहारनपुर के आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है।
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नाम और रंग पर ना जाना
मैंगो फेस्टिवल में प्रस्तुत किए गए आम के रंग और नाम पर न जाना। यहां सहारनपुर से लाई गई आम की एक ऐसी प्रजाति रखी गई है जिसका नाम कीवी है। यह देखने में भी कीवी की तरह ही लगता है, इसका स्वाद काफी मीठा होता है। वहीं एक आम ऐसा है जिसे खा कर रूठी हुई पत्नी भी मान जाती है। इसका नाम ही बेगम पसंद है। यह प्रजाति उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पाई जाती है। इस आम को प्रस्तुत करने वाले बताते हैं कि इसका स्वाद काफी मीठा है। इसकी मदद से कई तरह की खाने की वस्तु बनाई जा सकती हैं।
बॉक्स
राजा बना दशहरी आम
मैंगो फेस्टिवल में रखे गए 500 तरह के आम में दशहरी ही राजा बना। दिल्ली ट्रांसपोर्ट एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रबंधक सुनीता कौशिक ने बताया कि पहले दिन सभी आम को प्रस्तुत करने वालों के बीच प्रतियोगिता आयोजित हुई। वहीं उप प्रबंधक अनुदीप ने बताया कि जारी हुए परिणाम में दशहरी पहले स्थान पर रहा। जबकि लंगड़ा दूसरे पर, चौसा तीसरे पर रहा। इसके अलावा आम्रपाली, मल्लिका, रतुल, केसर, फर्जी सहित अन्य भी प्रतियोगिता की रेस में रहे।
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- 500 किस्म के आम को देख चकित हो रहे दिल्ली वाले
राकेश शर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली वाले इन दिनों करेले की मिठास, काला पत्थर के स्वाद, इलाइची की रंगत, हाथी धूल की खुशबू के दीवाने हैं। यहीं नहीं चमचम, पान, भेल, पत्थर, रसगुल्ला, अंगूरदाना, गुलाब जामुन, फर्जी, नकली, पान पत्ता, जलेबी, चोकलेट, कलुआ केला, सहित अन्य की भी बड़ी पूछ है।
इन नामों पर आप हैरान न हों। यह सब आम की अलग-अलग प्रजातियां हैं, जिनसे जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट सजा हुआ है। यहां आम की करीब 500 प्रजातियां मौजूद हैं और दिल्ली के लोग इनका लुत्फ उठा रहे हैं। दरअसल करेला आम हाइब्रिड प्रजाति है, जिसे पंतनगर यूनिवर्सिटी उत्तराखंड क्षेत्र में विकसित किया गया है। यह एक मीठा आम है जिसका फल जून के मध्य तक पक कर तैयार हो जाता है। यह साइज में बढ़ा होता है और इसका छिलका भी हरा होता है। वहीं आम की काला पत्थर प्रजाति उत्तर प्रदेश लखनऊ के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। जबकि हाथी धूल आम सीतापुर, मलिहाबाद क्षेत्र में पाया जाता है। यह आम आचार के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। यह आकार में बड़ा होता है और स्वाद में कुछ खट्टा होता है।
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वहीं जलेबी, गुलाब जामुन, कुमकुम आम भी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पाया जाता है। जबकि अंगूरदाना हाइब्रिड प्रजाति है। यह खाने में मीठा और आकार अंगूर के बराबर होता है। इसे उगाने वाले किसान बताते हैं कि इस आम की खपत विदेशों में काफी ज्यादा है। पकने के बाद इसका स्वाद चीनी की तरह लगता है। वहीं नकली आम की भी अपनी कहानी है। इसका स्वाद खाने में कभी मीठा लगता है तो कभी खट्टा। यह सहारनपुर के आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है।
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नाम और रंग पर ना जाना
मैंगो फेस्टिवल में प्रस्तुत किए गए आम के रंग और नाम पर न जाना। यहां सहारनपुर से लाई गई आम की एक ऐसी प्रजाति रखी गई है जिसका नाम कीवी है। यह देखने में भी कीवी की तरह ही लगता है, इसका स्वाद काफी मीठा होता है। वहीं एक आम ऐसा है जिसे खा कर रूठी हुई पत्नी भी मान जाती है। इसका नाम ही बेगम पसंद है। यह प्रजाति उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पाई जाती है। इस आम को प्रस्तुत करने वाले बताते हैं कि इसका स्वाद काफी मीठा है। इसकी मदद से कई तरह की खाने की वस्तु बनाई जा सकती हैं।
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राजा बना दशहरी आम
मैंगो फेस्टिवल में रखे गए 500 तरह के आम में दशहरी ही राजा बना। दिल्ली ट्रांसपोर्ट एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रबंधक सुनीता कौशिक ने बताया कि पहले दिन सभी आम को प्रस्तुत करने वालों के बीच प्रतियोगिता आयोजित हुई। वहीं उप प्रबंधक अनुदीप ने बताया कि जारी हुए परिणाम में दशहरी पहले स्थान पर रहा। जबकि लंगड़ा दूसरे पर, चौसा तीसरे पर रहा। इसके अलावा आम्रपाली, मल्लिका, रतुल, केसर, फर्जी सहित अन्य भी प्रतियोगिता की रेस में रहे।