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अतिरिक्त निदेशक व सहायक मैनेजर की जमानत याचिका खारिज
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अतिरिक्त निदेशक व सहायक मैनेजर की जमानत याचिका खारिज
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े के दो आरोपी मेरठ निवासी सहायक प्रबंधक विनोद और अतिरिक्त निदेशक संजय गोयल की जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी है। दोनों मुख्य आरोपी संजय भाटी व अन्य के साथ जिला कारागार में बंद हैं। विनोद की जमानत याचिका जयपुर निवासी सुनील मीणा द्वारा दर्ज कराए गए फर्जीवाड़े के सबसे पहले केस में खारिज हुई है। उसने चार अन्य केस में भी जमानत याचिका कोर्ट में दी हुईं हैं। सुनील मीणा और लाल बाबू चौधरी के केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि मामले में
31 अन्य पीड़ित वादी भी हैं। सुनील मीणा ने कंपनी के पदाधिकारियों के खिलाफ सबसे पहले एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके केस में आरोपी मेरठ निवासी विनोद का नाम है। विनोद की ओर से जमानत याचिका दायर करने के बाद उसके अधिवक्ता ने कहा कि वह विनोद केस में नामजद नहीं था। वह कंपनी में सहायक प्रबंधक था। उसके खाते में कोई रुपया नहीं आया। उसने किसी ग्राहक से कोई वादा नहीं किया और ना ही कोई लाभ प्राप्त किया। संजय गोयल के अधिवक्ता ने कहा कि उसकी अनुमति के बिना उसे 22 दिसंबर 2018 को कंपनी में अतिरिक्त निदेशक बनाया गया। जब उसे पता चला तो उसने 10 जनवरी 2019 को त्यागपत्र भेज दिया। वहीं, वादी पक्ष से अधिवक्ताओं ने दलील दी गई कि बड़ी संख्या में निवेशकों से किस्तों मेें धन दोगुना कर लौटाने का झांसा देकर धोखाधड़ी की गई है। अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े के दो आरोपी मेरठ निवासी सहायक प्रबंधक विनोद और अतिरिक्त निदेशक संजय गोयल की जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी है। दोनों मुख्य आरोपी संजय भाटी व अन्य के साथ जिला कारागार में बंद हैं। विनोद की जमानत याचिका जयपुर निवासी सुनील मीणा द्वारा दर्ज कराए गए फर्जीवाड़े के सबसे पहले केस में खारिज हुई है। उसने चार अन्य केस में भी जमानत याचिका कोर्ट में दी हुईं हैं। सुनील मीणा और लाल बाबू चौधरी के केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि मामले में
31 अन्य पीड़ित वादी भी हैं। सुनील मीणा ने कंपनी के पदाधिकारियों के खिलाफ सबसे पहले एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके केस में आरोपी मेरठ निवासी विनोद का नाम है। विनोद की ओर से जमानत याचिका दायर करने के बाद उसके अधिवक्ता ने कहा कि वह विनोद केस में नामजद नहीं था। वह कंपनी में सहायक प्रबंधक था। उसके खाते में कोई रुपया नहीं आया। उसने किसी ग्राहक से कोई वादा नहीं किया और ना ही कोई लाभ प्राप्त किया। संजय गोयल के अधिवक्ता ने कहा कि उसकी अनुमति के बिना उसे 22 दिसंबर 2018 को कंपनी में अतिरिक्त निदेशक बनाया गया। जब उसे पता चला तो उसने 10 जनवरी 2019 को त्यागपत्र भेज दिया। वहीं, वादी पक्ष से अधिवक्ताओं ने दलील दी गई कि बड़ी संख्या में निवेशकों से किस्तों मेें धन दोगुना कर लौटाने का झांसा देकर धोखाधड़ी की गई है। अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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