Noida: रियल एस्टेट सेक्टर का बुरा दौर खत्म, लोगों में फिर बढ़ी घर की चाहत; बिक्री में 50% का उछाल
सरकार के मेगा प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ट्रांसपोर्ट हब, डाटा सेंटर व लॉजिस्टिक पार्क आदि इसकी बड़ी वजह हैं। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को खरीदने के लिए लोगों की ओर से पूछताछ जारी है। रेडी टू मूव की मांग सबसे अधिक है।
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रियल एस्टेट सेक्टर का बुरा दौर अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। बाजार में मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर अब उबरने की हालत में है। खरीदार निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं। इससे डेवलपर्स भी खासे उत्साहित हैं। रियल एस्टेट मार्केट में पिछले साल की तुलना में बिक्री में करीब 50 प्रतिशत का उछाल आया है।
सरकार के मेगा प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ट्रांसपोर्ट हब, डाटा सेंटर व लॉजिस्टिक पार्क आदि इसकी बड़ी वजह हैं। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को खरीदने के लिए लोगों की ओर से पूछताछ जारी है। रेडी टू मूव की मांग सबसे अधिक है। बड़े साइज के घरों की भी मांग ज्यादा है। रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों के मुताबिक यह मांग आने वाली तिमाही में भी जारी रह सकती है। अगर पुराने फ्लैटों को छोड़ दें तो कई प्रोजेक्टों में बिना बिके हुए करीब 5000 फ्लैट अब भी बचे हैं, जिनका काम पूरा हो गया है। इसके अलावा कई बिल्डरों ने अलग-अलग फेज में निर्माण किया। अब उनके पास कुछ जमीनें बची हुई हैं, जिन पर वह करीब 20 हजार फ्लैटों का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे फ्लैट बनने के बाद बेचे जा सकते हैं। ग्रेटर नोएडा पर अब नजर है।
फ्लैट की कीमतों में भी हुआ खासा इजाफा
नोएडा-ग्रेनो में फ्लैट की कीमतों में भी खासा इजाफा हुआ है। डेवलपर्स के मुताबिक, वर्तमान में नोएडा में 6000 से 8000 रुपये प्रति वर्गफीट की कीमत पर फ्लैट मिल रहे हैं जो कुछ वर्ष पहले तक 4000 से 5000 रुपये प्रति वर्गफीट की कीमत पर उपलब्ध थे। इसी तरह से ग्रेनो वेस्ट या एक्सटेंशन में 1800 से 3000 रुपये प्रति वर्गफीट के फ्लैट अब 4000 से 6000 रुपये प्रति वर्गफीट पर उपलब्ध हैं। जाहिर है कि इनकी कीमतों में इजाफा हो गया है।
रेरा की निगरानी का भी असर
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की निगरानी का असर भी रियल एस्टेट पर पड़ा है। जब रेरा का अस्तित्व नहीं था तो बिल्डर मनमानी करते थे, लेकिन जब से रेरा का गठन हुआ है तब से प्रोजेक्ट का अपडेट देना होता है। बिल्डर गलत जानकारी नहीं दे सकते। रेरा की ओर से परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी कदम उठाए गए, जो रियल एस्टेट के अलावा खरीदारों के लिए बेहतर साबित हुआ।
पहले तेजी से उठे, फिर गिरे अब उठने की तैयारी
नोएडा-ग्रेनो में रियल एस्टेट ने पहले फेज में 1998 से 2005 के बीच जबरदस्त उड़ान भरी, जो भी काम लिया उसे पूरा किया। सभी को घर दिया। सभी फ्लैट खरीदार बेहद खुश थे, लेकिन दूसरे फेज 2005 से लेकर 2015 और 2020 में रियल एस्टेट ने खरीदारों को झटका दिया। अब 2021-22 से तीसरा फेज शुरू हुआ है। यहां कुछ नए खिलाड़ी शामिल हुए हैं।
कहना बिल्डरों का
- एनसीआर में पिछले वर्ष के मुकाबले रियल एस्टेट मार्केट में 50% का उछाल आया है। सरकार के कई प्रोजेक्ट भी इसकी बड़ी वजह हैं। - यश मिगलानी, एमडी, मिगसन ग्रुप आवासीय और वाणिज्यिक
- संपत्तियों में निवेश के लिए निवेशक काफी पूछताछ कर रहे हैं। रेडी टू मूव और बड़े घर की मांग ज्यादा है। - अमित जैन, निदेशक, महागुन
- पुराने करीब 5000 फ्लैट बचे हुए हैं। बचे हुए प्लॉट पर करीब 20 हजार फ्लैटों का निर्माण डेवलपर्स करेंगे। इसकी बिक्री होगी। - सुरेश गर्ग, क्रेडाई पश्चिमी यूपी के वाइस प्रेसिडेंट
- रेरा की वजह से अब कोई भी डेवलपर्स गलत जानकारी बाजार में नहीं दे सकता है। रेरा प्रोजेक्टों की निगरानी भी कर रहा है। इससे खरीदारों को फायदा होगा। - अमित मोदी, निदेशक, एबीए कॉर्प
- अब बिना परखे कोई भी खरीदार फ्लैट नहीं खरीदता। खरीदार प्रोजेक्ट साइट पर जाकर जांच करता है। इसके बाद नए फ्लैट खरीदने का फैसला करता है। - अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा
- अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कम फ्लैट बचे हैं। लिहाजा मांग के अपेक्षा में सप्लाई कम है। इस वजह से यूनिटों की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। - मनोज गौड़, क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष और गौड़ ग्रुप के सीएमडी