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सभी बहुमंजिला इमारतों की मजबूती परखेगा प्राधिकरण
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ग्रेटर नोएडा। अब प्राधिकरण शहर की सभी बहुमंजिला इमारतों में स्ट्रक्चरल (संरचनात्मक) सेफ्टी को परखेगा। गुरुग्राम में चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में हुए हादसे से सबक लेते हुए प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने यह निर्णय लिया है। इसका मकसद निवासियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाना है। प्राधिकरण विस्तृत अध्ययन कराएगा। सीईओ ने इसके लिए समिति का गठन भी किया है। समिति आईआईटी के विशेषज्ञों की मदद से देखेगी कि इमारतों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है, ताकि इमारतों की मजबूती में कोई कसर न रहे।
शनिवार को सीईओ ने अधीनस्थों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्राधिकरण में तय उन मानकों का रिव्यू किया, जिनके पूरा होने पर ही बहुमंजिला इमारतों के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या कंपलीशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। सीईओ ने स्ट्रक्चरल सेफ्टी का विस्तृत अध्ययन कराने के लिए अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमनदीप डुली की अध्यक्षता में समिति बना दी है। इसमें महाप्रबंधक प्रोजेक्ट, महाप्रबंधक नियोजन, ओएसडी बिल्डर, महाप्रबंधक वित्त व महाप्रबंधक विधि को सदस्य बनाया है। यह समिति आईआईटी दिल्ली या फिर किसी अन्य संस्था के विशेषज्ञों की मदद से स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट के मौजूदा प्रावधानों का अध्ययन करेगी। बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए समिति अगले 15 दिन में एक स्टैंडर्ड प्रारूप भी तैयार करेगी।
बोर्ड बैठक में रखा जाएगा प्रारूप
प्रारूप को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूरी मिलने पर उसे लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद बिल्डरों को इमारतों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी का पूरा ब्योरा उसी प्रारूप में देना होगा, तभी उसे कंपलीशन या फिर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। सीईओ ने कहा कि यह कदम बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए उठाया गया है। बैठक में एसीईओ अमनदीप डुली, जीएम प्लानिंग मीना भार्गव, ओएसडी बिल्डर संतोष कुमार, जीएम आरके देव, डीजीएम केआर वर्मा आदि अधिकारीगण मौजूद रहे।
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वेबसाइट पर अपलोड होगा सर्टिफिकेट
सीईओ का कहना है कि स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट को प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाए, ताकि निवेशक जब चाहें ब्योरा देख सकें। उन्होंने बिल्डर व नियोजन विभाग में इसकी प्रतिलिपि रखने के निर्देश दिए। अगर फ्लैट खरीदार चाहें तो वहां जाकर संबंधित बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट आसानी से प्राप्त कर सकें।
नोएडा में भी स्ट्रक्चरल ऑडिट की तैयारी, प्राधिकरण तैयार कर रहा ड्राफ्ट
गुरुग्राम में हादसे के बाद बहुमंजिला इमारतों के लिए सभी विभाग सतर्क हो गए हैं। नोएडा प्राधिकरण ने भी अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी बहुमंजिला आवासीय इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। फिलहाल, नियम और शर्तों पर मंथन चल रहा है।
गुरुग्राम में हादसा होने के बाद विभिन्न आरडब्ल्यूए और अन्य संस्थाओं ने प्राधिकरण के अधिकारियों को ज्ञापन देकर गुहार लगाई थी कि सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराएं। अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में तीन सोसाइटी के लिए प्राधिकरण की ओर से सिफारिशी पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अभी यह तय नहीं था कि ऑडिट होने पर खर्च कौन देगा। बिल्डर अब तक इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं होने की बात कहकर पीछे हटते रहे हैं। दरअसल, निजी एजेंसी या सरकारी एजेंसी दोनों का खर्च लाखों में आता है। अब नोएडा प्राधिकरण ने इन सभी बिंदुओं पर विचार करके ड्रॉफ्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। इसमें यह भी तय किया जाएगा कि आखिर समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट में आने वाले खर्च का वहन कौन करेगा। इसमें बिल्डर, आरडब्ल्यूए, एओए आदि की जिम्मेदारी देखी जा रही है। ड्रॉफ्ट फाइनल होने पर इसे लागू कर दिया जाएगा
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शनिवार को सीईओ ने अधीनस्थों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्राधिकरण में तय उन मानकों का रिव्यू किया, जिनके पूरा होने पर ही बहुमंजिला इमारतों के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या कंपलीशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। सीईओ ने स्ट्रक्चरल सेफ्टी का विस्तृत अध्ययन कराने के लिए अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमनदीप डुली की अध्यक्षता में समिति बना दी है। इसमें महाप्रबंधक प्रोजेक्ट, महाप्रबंधक नियोजन, ओएसडी बिल्डर, महाप्रबंधक वित्त व महाप्रबंधक विधि को सदस्य बनाया है। यह समिति आईआईटी दिल्ली या फिर किसी अन्य संस्था के विशेषज्ञों की मदद से स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट के मौजूदा प्रावधानों का अध्ययन करेगी। बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए समिति अगले 15 दिन में एक स्टैंडर्ड प्रारूप भी तैयार करेगी।
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बोर्ड बैठक में रखा जाएगा प्रारूप
प्रारूप को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूरी मिलने पर उसे लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद बिल्डरों को इमारतों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी का पूरा ब्योरा उसी प्रारूप में देना होगा, तभी उसे कंपलीशन या फिर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। सीईओ ने कहा कि यह कदम बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए उठाया गया है। बैठक में एसीईओ अमनदीप डुली, जीएम प्लानिंग मीना भार्गव, ओएसडी बिल्डर संतोष कुमार, जीएम आरके देव, डीजीएम केआर वर्मा आदि अधिकारीगण मौजूद रहे।
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वेबसाइट पर अपलोड होगा सर्टिफिकेट
सीईओ का कहना है कि स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट को प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाए, ताकि निवेशक जब चाहें ब्योरा देख सकें। उन्होंने बिल्डर व नियोजन विभाग में इसकी प्रतिलिपि रखने के निर्देश दिए। अगर फ्लैट खरीदार चाहें तो वहां जाकर संबंधित बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट आसानी से प्राप्त कर सकें।
नोएडा में भी स्ट्रक्चरल ऑडिट की तैयारी, प्राधिकरण तैयार कर रहा ड्राफ्ट
गुरुग्राम में हादसे के बाद बहुमंजिला इमारतों के लिए सभी विभाग सतर्क हो गए हैं। नोएडा प्राधिकरण ने भी अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी बहुमंजिला आवासीय इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। फिलहाल, नियम और शर्तों पर मंथन चल रहा है।
गुरुग्राम में हादसा होने के बाद विभिन्न आरडब्ल्यूए और अन्य संस्थाओं ने प्राधिकरण के अधिकारियों को ज्ञापन देकर गुहार लगाई थी कि सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराएं। अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में तीन सोसाइटी के लिए प्राधिकरण की ओर से सिफारिशी पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अभी यह तय नहीं था कि ऑडिट होने पर खर्च कौन देगा। बिल्डर अब तक इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं होने की बात कहकर पीछे हटते रहे हैं। दरअसल, निजी एजेंसी या सरकारी एजेंसी दोनों का खर्च लाखों में आता है। अब नोएडा प्राधिकरण ने इन सभी बिंदुओं पर विचार करके ड्रॉफ्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। इसमें यह भी तय किया जाएगा कि आखिर समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट में आने वाले खर्च का वहन कौन करेगा। इसमें बिल्डर, आरडब्ल्यूए, एओए आदि की जिम्मेदारी देखी जा रही है। ड्रॉफ्ट फाइनल होने पर इसे लागू कर दिया जाएगा