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चौकी की बैरक में लुंगी से फंदा लगाकर एएसआई ने की आत्महत्या
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सुरेश कुमार ( फाइल फोटो)
- फोटो : Palwal
हथीन। हथीन सिटी पुलिस चौकी में तैनात एएसआई सुरेश कुमार ने चौकी की बैरक के कमरे में लुंगी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सुरेश कुमार के भाई वेदपाल ने तीन लोगों के खिलाफ शिकायत देकर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
बुधवार सुबह हथीन सिटी पुलिस चौकी में एएसआई सुरेश कुमार की लाश बैरक के कमरे में लटकी हुई मिली। पुलिसकर्मी का शव मिलने की खबर मिलते ही वहां अफरातफरी मच गई। पुलिसकर्मियों के मुताबिक सुरेश कुमार रात्रि गश्त से तड़के 4 बजे लौटा था। लौटने के बाद बैरक में आराम कर रहा था। सुबह 9 बजे उसने पानी भी पिया। उसके बाद उसने बैरक का कमरा बंद कर अंदर कुंडी लगा ली। सुबह 10:30 बजे तक वह कमरे से बाहर नही आया तो अन्य पुलिसकर्मियों ने दरवाजा खटखटाया। धक्का मारकर दरवाजा खोला गया तो अंदर उसकी लाश लटकी थी। मौके पर थाना प्रभारी जसवीर यादव, चौकी इंचार्ज ,डीएसपी रतनदीप बाली, एफएसएल की टीम भी पहुंची। घटनास्थल की जांच के बाद सुरेश कुमार के परिवारजनों को सूचित किया गया। मौके पर पहुंचे परिजनों और पुलिसकर्मियों के बीच कई घंटे तक बहस हुई।
इसके बाद सुरेश के भाई वेदपाल ने मामले की शिकायत की। दर्ज शिकायत में कहा गया है कि सुरेश ने वेदपाल को परेशानी बताई बताई थी। वर्ष 2019 में वह बस अड्डा चौकी पलवल पर तैनात था। उन दिनों मनजीत निवासी औरंगाबाद के जमीन विवाद की तफ्तीश की थी। इस मामले में मनजीत को गिरफ्तार किया। इस तफ्तीश पर दबाव भी बनाया गया। इसके बाद मनजीत ने वकील संसार के माध्यम से एक अदालती इस्तगासा पलवल की अदालत में डाल दिया। जिसकी सुनवाई अदालत में हो रही है। यह पीड़ा सुरेश कुमार ने वेदपाल को पहले भी बताई और कहा कि 9 मई को इसकी सुनवाई है। सुरेश कुमार ने भाई से 9 मई को आने के लिए कहा था। वेदपाल 9 मई को सुरेश कुमार के पास अदालत में आया। अदालत की सुनवाई के बाद जैसे अदालत से बाहर आया तो आरोप है कि मनजीत, संसार और दीपक चौहान ने उसको गालियां दीं। जातिसूचक बातें कहीं और धमकियां दीं। वेदप्रकाश का आरोप है कि इन्ही तीनों के उत्पीड़न से परेशान सुरेश कुमार ने आत्महत्या की है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। डीएसपी रतनदीप बाली ने बताया कि इस मामले में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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पुलिसकर्मियों की मनोस्थिति जानने के लिए काउंसलिंग कराएगा विभाग
पलवल। पुलिसकर्मियों के बढ़ते आत्महत्या के मामलों को देखते हुए विभाग सतर्क हो गया है। पांच माह में 5 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद विभाग ने नियमित अंतराल पर काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया है। शिविर का आयोजन कर पुलिसकर्मियों की मनोस्थिति पता लगाने की कोशिश की जाएगी। मनोचिकित्सक नियमित तौर से पुलिसकर्मियों की जांच कर रिपोर्ट देंगे। काम बोझ के कारण मानसिक तनाव से पीड़ित पुलिस कर्मियों का इलाज कराया जाएगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर जाएगा।
बुधवार को हथीन में शहरी पुलिस चौकी में एएसआई सुरेश कुमार ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली। रेवाड़ी जिले के रहने वाले सुरेश कुमार कुछ समय से मानसिक तौर से परेशान चल रहे थे। बुधवार तड़केे 4 बजे गश्त से लौटने के बाद खिड़की से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले 26 फरवरी को हथीन गेट चौकी में तैनात हवलदार रंजीत का शव फंदे पर लटका मिला था। नया गांव फजलपुर निवासी हवलदार रंजीत सिंह के परिजनों का कहना था कि रंजीत पर काम को बोझ था, जिसके कारण वह मानसिक तनाव में रहता था। मानसिक तनाव के कारण ही उसने चौकी के अंदर फंदे से लटक कर अपनी जान दे दी थी।
बीते वर्ष 13 दिसंबर को बहीन थाना में तैनात एएसआई इकबाल ने सुसाइड किया था। जिला नूहं के रीगड़ गांव निवासी इकबाल ने थाना बहीन के पास बने एक जर्जर कमरे में बिजली के तार से फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। इकबाल की मौत का कारण काम के बोझ से मानसिक तनाव बताया गया था।
वहीं 28 फरवरी को होडल अदालत में नायब कोर्ट के पद पर तैनात देवेंद्र (36) की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। बताया गया है कि मानसिक तनाव के चलते देवेंद्र शराब पीता था। नशे की हालत वह पुलिस लाइन के मेस में गिरने से मर गया। वहीं बीते 26 अप्रैल को पुलिस लाइन में कार्यरत सब इंस्पेक्टर पवन कुमार की मौत भी संदिग्ध हालत में हुई थी। पवन कुमार बीमार था और इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस कर्मियों द्वारा आत्महत्या करने का मुख्य कारण मानसिक तनाव हैं। तनाव के कारणों की जांच व उपचार के लिए मनोचिकित्सकों की मदद ली जाएगी। जिले में जांच के लिए शिविर लगवाए जाएंगे और सभी पुलिसकर्मियों की काउंसलिंग भी कराई जाएगी। - अनिल कुमार, डीएसपी, मुख्यालय।
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बुधवार सुबह हथीन सिटी पुलिस चौकी में एएसआई सुरेश कुमार की लाश बैरक के कमरे में लटकी हुई मिली। पुलिसकर्मी का शव मिलने की खबर मिलते ही वहां अफरातफरी मच गई। पुलिसकर्मियों के मुताबिक सुरेश कुमार रात्रि गश्त से तड़के 4 बजे लौटा था। लौटने के बाद बैरक में आराम कर रहा था। सुबह 9 बजे उसने पानी भी पिया। उसके बाद उसने बैरक का कमरा बंद कर अंदर कुंडी लगा ली। सुबह 10:30 बजे तक वह कमरे से बाहर नही आया तो अन्य पुलिसकर्मियों ने दरवाजा खटखटाया। धक्का मारकर दरवाजा खोला गया तो अंदर उसकी लाश लटकी थी। मौके पर थाना प्रभारी जसवीर यादव, चौकी इंचार्ज ,डीएसपी रतनदीप बाली, एफएसएल की टीम भी पहुंची। घटनास्थल की जांच के बाद सुरेश कुमार के परिवारजनों को सूचित किया गया। मौके पर पहुंचे परिजनों और पुलिसकर्मियों के बीच कई घंटे तक बहस हुई।
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इसके बाद सुरेश के भाई वेदपाल ने मामले की शिकायत की। दर्ज शिकायत में कहा गया है कि सुरेश ने वेदपाल को परेशानी बताई बताई थी। वर्ष 2019 में वह बस अड्डा चौकी पलवल पर तैनात था। उन दिनों मनजीत निवासी औरंगाबाद के जमीन विवाद की तफ्तीश की थी। इस मामले में मनजीत को गिरफ्तार किया। इस तफ्तीश पर दबाव भी बनाया गया। इसके बाद मनजीत ने वकील संसार के माध्यम से एक अदालती इस्तगासा पलवल की अदालत में डाल दिया। जिसकी सुनवाई अदालत में हो रही है। यह पीड़ा सुरेश कुमार ने वेदपाल को पहले भी बताई और कहा कि 9 मई को इसकी सुनवाई है। सुरेश कुमार ने भाई से 9 मई को आने के लिए कहा था। वेदपाल 9 मई को सुरेश कुमार के पास अदालत में आया। अदालत की सुनवाई के बाद जैसे अदालत से बाहर आया तो आरोप है कि मनजीत, संसार और दीपक चौहान ने उसको गालियां दीं। जातिसूचक बातें कहीं और धमकियां दीं। वेदप्रकाश का आरोप है कि इन्ही तीनों के उत्पीड़न से परेशान सुरेश कुमार ने आत्महत्या की है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। डीएसपी रतनदीप बाली ने बताया कि इस मामले में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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पुलिसकर्मियों की मनोस्थिति जानने के लिए काउंसलिंग कराएगा विभाग
पलवल। पुलिसकर्मियों के बढ़ते आत्महत्या के मामलों को देखते हुए विभाग सतर्क हो गया है। पांच माह में 5 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद विभाग ने नियमित अंतराल पर काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया है। शिविर का आयोजन कर पुलिसकर्मियों की मनोस्थिति पता लगाने की कोशिश की जाएगी। मनोचिकित्सक नियमित तौर से पुलिसकर्मियों की जांच कर रिपोर्ट देंगे। काम बोझ के कारण मानसिक तनाव से पीड़ित पुलिस कर्मियों का इलाज कराया जाएगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर जाएगा।
बुधवार को हथीन में शहरी पुलिस चौकी में एएसआई सुरेश कुमार ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली। रेवाड़ी जिले के रहने वाले सुरेश कुमार कुछ समय से मानसिक तौर से परेशान चल रहे थे। बुधवार तड़केे 4 बजे गश्त से लौटने के बाद खिड़की से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले 26 फरवरी को हथीन गेट चौकी में तैनात हवलदार रंजीत का शव फंदे पर लटका मिला था। नया गांव फजलपुर निवासी हवलदार रंजीत सिंह के परिजनों का कहना था कि रंजीत पर काम को बोझ था, जिसके कारण वह मानसिक तनाव में रहता था। मानसिक तनाव के कारण ही उसने चौकी के अंदर फंदे से लटक कर अपनी जान दे दी थी।
बीते वर्ष 13 दिसंबर को बहीन थाना में तैनात एएसआई इकबाल ने सुसाइड किया था। जिला नूहं के रीगड़ गांव निवासी इकबाल ने थाना बहीन के पास बने एक जर्जर कमरे में बिजली के तार से फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। इकबाल की मौत का कारण काम के बोझ से मानसिक तनाव बताया गया था।
वहीं 28 फरवरी को होडल अदालत में नायब कोर्ट के पद पर तैनात देवेंद्र (36) की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। बताया गया है कि मानसिक तनाव के चलते देवेंद्र शराब पीता था। नशे की हालत वह पुलिस लाइन के मेस में गिरने से मर गया। वहीं बीते 26 अप्रैल को पुलिस लाइन में कार्यरत सब इंस्पेक्टर पवन कुमार की मौत भी संदिग्ध हालत में हुई थी। पवन कुमार बीमार था और इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस कर्मियों द्वारा आत्महत्या करने का मुख्य कारण मानसिक तनाव हैं। तनाव के कारणों की जांच व उपचार के लिए मनोचिकित्सकों की मदद ली जाएगी। जिले में जांच के लिए शिविर लगवाए जाएंगे और सभी पुलिसकर्मियों की काउंसलिंग भी कराई जाएगी। - अनिल कुमार, डीएसपी, मुख्यालय।