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आशा वर्करों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
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नगीना। वेतन विसंगतियों सहित कई मांगों को लेकर चल रहे आशा वर्करों की हड़ताल से सोमवार को स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित रहीं। इस दौरान जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में पूरे दिन विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। आशा वर्करों ने चेतावनी दी कि यदि 20 अगस्त तक मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
जिले में 1000 से अधिक आशा वर्कर कार्यरत है। जो वेतन विसंगति सहित कई मांगों को लेकर शुक्रवार से हड़ताल कर धरने पर बैठे हुए हैं। सोमवार को विभिन्न कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आशा वर्करों का समर्थन किया।
सीटू के जिला प्रधान अनिल कुमार ने कहा कि लंबे वक्त से आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की तरह कार्य कर रहे हैं। इसके बाद भी प्रदेश सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। इससे पता चलता है कि सरकार कर्मचारी विरोधी है। जिला प्रधान फजरी ने बताया कि गांव में केवल आशा वर्कर ही स्वास्थ्य संबंधी सभी कार्य करती आ रही हैं, इसके बाद भी उन्हें केवल 4000 रुपये महीने दिए जाते हैं। ऐसे में बमुश्किल महीने का राशन जुट पाता है जबकि परिवार पालना आज की महंगाई के समय में काफी मुश्किल है। इसलिए आशा वर्करों को कम से कम डीसी रेट मुहैया कराया जाए, ताकि वे भी समाज में बेहतर जीवन व्यतीत कर सकें।
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जिले में 1000 से अधिक आशा वर्कर कार्यरत है। जो वेतन विसंगति सहित कई मांगों को लेकर शुक्रवार से हड़ताल कर धरने पर बैठे हुए हैं। सोमवार को विभिन्न कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आशा वर्करों का समर्थन किया।
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सीटू के जिला प्रधान अनिल कुमार ने कहा कि लंबे वक्त से आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की तरह कार्य कर रहे हैं। इसके बाद भी प्रदेश सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। इससे पता चलता है कि सरकार कर्मचारी विरोधी है। जिला प्रधान फजरी ने बताया कि गांव में केवल आशा वर्कर ही स्वास्थ्य संबंधी सभी कार्य करती आ रही हैं, इसके बाद भी उन्हें केवल 4000 रुपये महीने दिए जाते हैं। ऐसे में बमुश्किल महीने का राशन जुट पाता है जबकि परिवार पालना आज की महंगाई के समय में काफी मुश्किल है। इसलिए आशा वर्करों को कम से कम डीसी रेट मुहैया कराया जाए, ताकि वे भी समाज में बेहतर जीवन व्यतीत कर सकें।
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