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Noida News: सरकारी से निजी अस्पताल में गर्भवती को भर्ती करा रही आशा, हंगामा

Sun, 26 Oct 2025 01:03 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 01:03 AM IST
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Asha trying to get pregnant woman admitted from government to private hospital, uproar
गाजियाबाद। जिला महिला अस्पताल से एक गर्भवती महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। शनिवार को प्रसव के लिए आई एक गर्भवती को आशा कार्यकर्ता ने बिना चिकित्सकीय सलाह के निजी अस्पताल में ले जाने की कोशिश की। उसके बाद अस्पताल में हंगामा मच गया। इस दौरान सुरक्षा गार्ड और आशा कार्यकर्ता के बीच नोकझोंक और कहासुनी हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के सीएमएस ने पुलिस को बुलाने का आदेश दिया लेकिन आशा कार्यकर्ता मौके से फरार हो गई। बाद में महिला को दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया।
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पटेल नगर द्वितीय निवासी सचिन अपनी पत्नी रजनी को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लाए थे। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि रजनी का तीसरा प्रसव सामान्य नहीं हो सकेगा और सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ेगा। चिकित्सकों ने रजनी के दो पहले बच्चों की सामान्य प्रसव के बाद मौत होने की जानकारी भी दी। रजनी की मधुमेह की स्थिति भी सामान्य से अधिक बढ़ी हुई थी। इससे प्रसव के दौरान जटिलताएं हो सकती थीं। इस वजह से डॉक्टरों ने सचिन को सलाह दी कि वह अपनी पत्नी का प्रसव दिल्ली के किसी बड़े अस्पताल में कराए।
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इस पर सचिन ने अपनी पत्नी का सामान्य प्रसव कराने की जिद पकड़ ली। उसी दौरान विजयनगर क्षेत्र की एक आशा कार्यकर्ता ने बताया कि वह महिला को पुराना बस अड्डा स्थित निजी अस्पताल में ले जाकर प्रसव करवा सकती है। जब अस्पताल के सुरक्षा गार्ड अमित चौधरी ने इस पर आपत्ति जताई और सीएमएस को मामले की सूचना दी। इसके बाद सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने पुलिस को बुलाने का आदेश दिया।
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सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि रजनी की हालत गंभीर थी और उनके मधुमेह को नियंत्रित करने की आवश्यकता थी। प्रसव के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किए जाने की जरूरत थी। अस्पताल में आईसीयू की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस कारण ही रजनी को दिल्ली रेफर किया गया था। सीएमएस ने यह भी बताया कि कई आशा कार्यकर्ता ऐसी हैं, जो गर्भवती की निगरानी उनके घर पर नहीं करती हैं लेकिन महिला के अस्पताल पहुंचने पर अपना मरीज बता आपस में झगड़ा करने लगती हैं। कई बार सुरक्षा गार्ड उन्हें समझाकर शांत कराते हैं। इस बारे में सीएमओ को भी पत्र लिखा गया है।
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