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फर्जी मुहर बनवाकर फसल बीमा योजना के लिए किए आवेदन
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तावडू। शहर के तहसील परिसर में बैठने वाले अधिवक्ता और नोटरी शब्बीर की फर्जी मुहर बनवाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करने का मामला सामने आया है। जब बीमा कंपनी के अधिकारी आवेदन किए गए किसानों के कागजात की जांच करने पहुंचे तो उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला। पीड़ित नोटरी ने मामले में सीएम विंडो सहित विभिन्न विभागों में शिकायत देकर संबंधित जालसाजों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
तावडू निवासी अधिवक्ता और नोटरी शब्बीर ने बताया कि उपमंडल के विभिन्न गांवों के बहुत से व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अनुदान धनराशि प्राप्त करने के लिए हलफनामे/ बटाई घोषणा पत्र दिए हैं। जिन पर उनके नाम की फर्जी नोटरी और मुहर लगाकर अटेस्ट किया गया है। नोटरी का दावा है कि उन्होंने कभी भी इस प्रकार के शपथ पत्र व कागजात पर अपनी ओर से हस्ताक्षर और मुहर नहीं लगाई है। आरोप है कि उपमंडल में संचालित विभिन्न सीएससी सेंटरों से फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करते समय इन्हें अपलोड किया गया है। जालसाजों के माध्यम से फर्जी किसान बनकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। शब्बीर ने बताया कि 21 जनवरी को कृषि विभाग नूंह और बीमा कंपनी से जुड़े अधिकारी उनके पास जांच करने के लिए पहुंचे तो उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला। लगभग 41 किसानों के कागजात और शपथ पत्र उनके सामने प्रस्तुत किए। जिन पर उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई थी। संबंधित जांच अधिकारियों को उन्होंने बताया कि उनके नाम पर किसी ने फर्जी मुहर और हस्ताक्षर कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। अधिवक्ता ने सीएम विंडों के माध्यम से मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
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तावडू निवासी अधिवक्ता और नोटरी शब्बीर ने बताया कि उपमंडल के विभिन्न गांवों के बहुत से व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अनुदान धनराशि प्राप्त करने के लिए हलफनामे/ बटाई घोषणा पत्र दिए हैं। जिन पर उनके नाम की फर्जी नोटरी और मुहर लगाकर अटेस्ट किया गया है। नोटरी का दावा है कि उन्होंने कभी भी इस प्रकार के शपथ पत्र व कागजात पर अपनी ओर से हस्ताक्षर और मुहर नहीं लगाई है। आरोप है कि उपमंडल में संचालित विभिन्न सीएससी सेंटरों से फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करते समय इन्हें अपलोड किया गया है। जालसाजों के माध्यम से फर्जी किसान बनकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। शब्बीर ने बताया कि 21 जनवरी को कृषि विभाग नूंह और बीमा कंपनी से जुड़े अधिकारी उनके पास जांच करने के लिए पहुंचे तो उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला। लगभग 41 किसानों के कागजात और शपथ पत्र उनके सामने प्रस्तुत किए। जिन पर उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई थी। संबंधित जांच अधिकारियों को उन्होंने बताया कि उनके नाम पर किसी ने फर्जी मुहर और हस्ताक्षर कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। अधिवक्ता ने सीएम विंडों के माध्यम से मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
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