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Noida News: फर्जी जीएसटी फर्मों से करोड़ों के फर्जीवाड़े में अग्रिम जमानत खारिज

Sat, 13 Dec 2025 09:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Dec 2025 09:46 PM IST
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Anticipatory bail rejected in case of fraud worth crores by fake GST firms
आरोपी पर पैन-आधार के दुरुपयोग से 2600 फर्जी फर्म बनाने का है आरोप
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थाना सेक्टर-20 नोएडा में दर्ज अपराध से जुड़ा है मामला

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फर्जी जीएसटी फर्मों के जरिये बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दुरुपयोग से 10 हजार करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के आरोपी मयूर नागपाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला थाना सेक्टर-20 नोएडा में दर्ज अपराध से जुड़ा है।
अभियोजन के अनुसार, वादी सौरभ द्विवेदी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर अज्ञात व्यक्तियों ने पंजाब और महाराष्ट्र में दो जीएसटी फर्में पंजीकृत करा लीं जिनसे उसका कोई संबंध नहीं है। विवेचना के दौरान यह सामने आया कि पैन, आधार और मोबाइल नंबरों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से जीएसटी फर्में बनाईं गईं जिनका उद्देश्य अवैध रूप से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करना था। जांच में एक संगठित गिरोह की भूमिका सामने आई जिसमें मयूर नागपाल सहित कई अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे।
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अभियोजन का आरोप है कि इस गिरोह ने करीब 2600 फर्जी फर्में बनाईं और डीजीजीआई (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस) की रिपोर्ट के अनुसार इन फर्मों के जरिये लगभग 26.45 करोड़ रुपये से अधिक का आईटीसी क्लेम किया गया जिससे सरकारी राजस्व को अरबों रुपये का नुकसान हुआ। छापेमारी के दौरान सह आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल, सिम कार्ड, फर्जी इनवॉइस और 12 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी आरोप है।
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अग्रिम जमानत याचिका में मयूर नागपाल की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है। कोई बरामदगी नहीं हुई है और उनका नाम सह आरोपियों के बयानों के आधार पर सामने आया है। आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और कई सह आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उन्हें भी राहत दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष ने ‘बच्ची देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ के निर्णय का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की।

वहीं अभियोजन पक्ष ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा है। लगातार फरार रहा है और उसके खिलाफ एनबीडब्ल्यू और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत कार्रवाई के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया है। मयूर नागपाल फर्जी फर्मों के निर्माण और संचालन में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेज का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह मामला न केवल आर्थिक अपराध से जुड़ा है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को व्यापक नुकसान पहुंचाने से संबंधित है। आरोपी द्वारा विवेचना में सहयोग न करना और फरार रहना भी उसके खिलाफ जाता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया और आरोपी की याचिका खारिज कर दी।
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