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सिख विरोधी दंगा : दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे केंद्र सरकार
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कांग्रेस नेता कमलनाथ की भूमिका का पता लगाने व कार्रवाई करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मनजिंदर सिंह सिरसा की याचिका पर दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। सिरसा ने 2022 में एक याचिका दायर कर 1984 के सिख विरोधी दंगों के संबंध में कांग्रेस नेता कमलनाथ की भूमिका का पता लगाने व उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अतिरिक्त स्थायी वकील नादिता राव की दलीलें सुनीं। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांग रहे हैं। मामले को आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता सिरसा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार ने ढाई साल में स्थिति रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में अदालत दंगा पीड़ितों के लिए न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती है। न्यायमूर्ति ओहरी ने दलीलें सुनने के बाद दो सप्ताह का समय दिया। एसआईटी के जांच अधिकारी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी। पेश मामले के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में 1984 में एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गुरबख्श सिंह ने पैरवी की। उन्होंने बताया कि याचिका 2022 में दायर की गई थी। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, तब से सरकार बार-बार समय मांग रही है। यह मामला गुरुद्वारा रकाबगंज परिसर के पास दो सिखों की हत्या से जुड़ा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मनजिंदर सिंह सिरसा की याचिका पर दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। सिरसा ने 2022 में एक याचिका दायर कर 1984 के सिख विरोधी दंगों के संबंध में कांग्रेस नेता कमलनाथ की भूमिका का पता लगाने व उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अतिरिक्त स्थायी वकील नादिता राव की दलीलें सुनीं। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांग रहे हैं। मामले को आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता सिरसा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार ने ढाई साल में स्थिति रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में अदालत दंगा पीड़ितों के लिए न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती है। न्यायमूर्ति ओहरी ने दलीलें सुनने के बाद दो सप्ताह का समय दिया। एसआईटी के जांच अधिकारी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी। पेश मामले के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में 1984 में एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गुरबख्श सिंह ने पैरवी की। उन्होंने बताया कि याचिका 2022 में दायर की गई थी। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, तब से सरकार बार-बार समय मांग रही है। यह मामला गुरुद्वारा रकाबगंज परिसर के पास दो सिखों की हत्या से जुड़ा है।
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