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अंकित गुर्जर हत्या मामला: हाईकोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा पर जेल प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

Mon, 13 Sep 2021 10:08 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 10:08 PM IST
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Ankit Gurjar murder case: High Court seeks report from jail administration on security of witnesses
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अंकित गुर्जर हत्या मामले में गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर तिहाड़ जेल प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अदालत ने इन गवाहों को ऐसे सेल में रखने के लिए कहा है जहां पर सीसीटीवी की निगरानी हो। गैंगस्टर अंकित गुर्जर चार अगस्त को जेल नंबर तीन के अपने सेल में मृत पाया गया था। हाईकोर्ट ने आठ सितंबर को इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी थी।
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न्यायमूर्ति मुक्त गुप्ता ने अपने आदेश में कहा था कि अंकित गुर्जर की मौत हिरासत में हिंसा के कारण हुई है। उन्होंने उन दो गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया जो मारपीट की उस घटना में गंभीर रूप से चोटिल हुए थे लेकिन इसके बाद भी उनका उचित उपचार नहीं करवाया जा रहा है।
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सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। हाईकोर्ट में अब मामले की सुनवाई 27 सितंबर को होगी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जेल महानिदेशक जेल में मौजूद तीन गवाहों की सुरक्षा के लिए उठाए कदमों और 24 सितंबर को सरेंडर करने वाले दो गवाहों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करेंगे। वे ये भी सुनिश्चित करेंगे कि इन कैदी गवाहों को ऐसे सेल में रखा जाएं जहां सीसीटीवी की निगरानी हो जिससे वहां आने-जाने वालों पर पूरी नजर रहे।
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हाईकोर्ट ने ये निर्देश पांचों गवाहों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। इन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ भविष्य में अधिकारियों को उन्हें धमकी देने, दबाव बनाने या चोट पहुंचाने से रोकने का भी अनुरोध किया है। ताकि उन्हें गवाही देने से न रोका जा सके। याचिका में कहा गया है कि ये सभी जेल में हुई अंकित की हत्या के चश्मदीद हैं।
याचिका में कहा गया है इनमें से दो कैदी अंकित के साथ उसी सेल में बंद थे जिसमें उससे मारपीट की गई। मारपीट में इन्हें भी चोटें लगी हैं। इसके अलावा तीन अन्य कैदियों ने अंकित की सरेआम पिटाई होते हुए देखी थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मेहमूद प्राचा ने कहा उन्हें आशंका है कि इन कैदियों को अपना पक्ष बदलने के लिए अधिकारियों द्वारा इन्हें धमकी, दबाव या चोट पहुंचाई जा सकती है। इनमें से दो कैदियों को घटना वाले दिन ही अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इन्होंने अंकित के परिजनों को पूरा वाकिया बताया था।
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