{"_id":"6096e7bb8ebc3ee9243ed405","slug":"an-epidemic-reached-the-village-when-will-the-responsibility-of-the-health-centers-be-decided-grnoida-news-noi580935697","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव में पहुंची महामारी, स्वास्थ्य केंद्रों की कब तय होगी जिम्मेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव में पहुंची महामारी, स्वास्थ्य केंद्रों की कब तय होगी जिम्मेदारी
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। पंचायत चुनाव के बाद कोरोना संक्रमण ने गांवों में भी पैर पसार लिए हैं। आए दिन ग्रामीणों के उपचार के अभाव व देरी से दम तोड़ने के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए हैं। शहरी क्षेत्र में प्राथमिक उपचार के लिए लोग सोसाइटी व बरात घर में भी प्राथमिक उपचार का बंदोबस्त करने में लगे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हैं तो कुछ वैक्सीनेशन और जांच तक सीमित हो गए हैं। विषम परिस्थितियों से निपटने और स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए इनकी कोई जिम्मेदारी नहीं तय की गई है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र के पीड़ित झोलाछाप से उपचार कराने को विवश हैं। हालत बिगड़ने पर वह शहरी अस्पतालों का रुख करते हैं और कई अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। पेश है रिपोर्ट...
स्वास्थ्य केेंद्र पर लटके ताले, ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां
क्ष्ोत्र मे दस दिन में सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन न मिलने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। खटाना में 11, दादूपुर में पांच, चौना में दो, बिसाहड़ा में तीन, खंगोडा मे एक,ज ारचा में दो, छौलस में एक,र सूलपुर मे एक,प् यावली में दो लोगों की मौत हुई है। जारचा, खंडहैरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बिसाहडा, नरोली, चौना, खंगौडा, छौलस,कलौंदा के उपकेंद्र बंद पड़े हैं। केवल प्यावली स्वास्थ्य केन्द्र पर डाक्टर राकेश कुमार की तैनाती है और वह मरीजों को देख रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उप केन्द्रों पर ताले लटके हैं। यहां स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा तो ऐसे में ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां। वह मजबूरी में झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है। अधिकांश गांवों में सेनिटाजेशन तक नहीं कराया गया है।
ऑक्सीजन और बुखार चेक करने का भी बंदोबस्त नहीं
क्षेत्र के रोही, बंकापुर, थोरा, चौरोली, दयानतपुर, कानीगढ़ी गांव के उप स्वास्थ्य केंद्रों का हाल बेहाल है। गांव के लोगों को एक-दो दिन के लिए टीकाकरण को छोड़ दें तो इन केंद्रों पर ऑक्सीजन और बुखार नापने तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पूर्व ग्राम प्रधान रोही भगवान सिंह ने बताया कि पहले हफ्ते में 2 दिन नर्स बैठी थी। अब उसका भी आना बंद है। दयानतपुर निवासी मंजीत सिंह ने बताया स्वास्थ्य केंद्र पर एक-दो दिन टीकाकरण हुआ, लेकिन अब यहां उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
बीमारों ने अस्पताल आना छोड़ दिया
प्राथमिक स्वास्थ्य पर आम दिनों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती। कोरोना के दौर में भी यहां कोई चिकित्सक नहीं है। इससे कस्बे व क्षेत्र के ग्रामीणों ने यहां उपचार कराने आना ही छोड़ दिया है। हालांकि, यहां वैक्सीनेशन चल रहा है, लेकिन उपचार के लिए लोग झोलाछाप पर हैं। जबकि यहां 15 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। इनमें से अधिकांश ने कोरोना की जांच भी नहीं कराई थी। किसान संगठन यहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
रिपोर्ट आने में लगता है एक सप्ताह
कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोरोना वैक्सीनेशन व टेस्टिंग की जा रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में कई बार एक सप्ताह का समय लगता है। इससे तब तक मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य केंद्र में उपचार की व्यवस्था न होने से लोग झोलाछापों से उपचार कराने को विवश हैं। व्यापारी संदीप जैन का कहना है कि जिला प्रशासन ने सभी कस्बों में ऑक्सीजन व बेड की उचित व्यवस्था की है, लेकिन दनकौर और बिलासपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इससे गांवों में लगातार लोग जान गंवा रहे हैं।
कोरोना के कारण ओपीडी बंद होने से सभी स्वास्थ्य केंद्र बंद हैं। कोविड टेस्ट में जो ग्रामीण पॉजिटिव आते हैं। उनके घरों पर दवाओं का वितरण किया जा रहा है। अभी गांवों में घर-घर जाकर कोविड टेस्ट शुरू नहीं किए गए हैं।
- संजीव सारस्वत, दादरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी
विज्ञापन
स्वास्थ्य केेंद्र पर लटके ताले, ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां
क्ष्ोत्र मे दस दिन में सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन न मिलने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। खटाना में 11, दादूपुर में पांच, चौना में दो, बिसाहड़ा में तीन, खंगोडा मे एक,ज ारचा में दो, छौलस में एक,र सूलपुर मे एक,प् यावली में दो लोगों की मौत हुई है। जारचा, खंडहैरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बिसाहडा, नरोली, चौना, खंगौडा, छौलस,कलौंदा के उपकेंद्र बंद पड़े हैं। केवल प्यावली स्वास्थ्य केन्द्र पर डाक्टर राकेश कुमार की तैनाती है और वह मरीजों को देख रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उप केन्द्रों पर ताले लटके हैं। यहां स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा तो ऐसे में ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां। वह मजबूरी में झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है। अधिकांश गांवों में सेनिटाजेशन तक नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
ऑक्सीजन और बुखार चेक करने का भी बंदोबस्त नहीं
क्षेत्र के रोही, बंकापुर, थोरा, चौरोली, दयानतपुर, कानीगढ़ी गांव के उप स्वास्थ्य केंद्रों का हाल बेहाल है। गांव के लोगों को एक-दो दिन के लिए टीकाकरण को छोड़ दें तो इन केंद्रों पर ऑक्सीजन और बुखार नापने तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पूर्व ग्राम प्रधान रोही भगवान सिंह ने बताया कि पहले हफ्ते में 2 दिन नर्स बैठी थी। अब उसका भी आना बंद है। दयानतपुर निवासी मंजीत सिंह ने बताया स्वास्थ्य केंद्र पर एक-दो दिन टीकाकरण हुआ, लेकिन अब यहां उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
बीमारों ने अस्पताल आना छोड़ दिया
प्राथमिक स्वास्थ्य पर आम दिनों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती। कोरोना के दौर में भी यहां कोई चिकित्सक नहीं है। इससे कस्बे व क्षेत्र के ग्रामीणों ने यहां उपचार कराने आना ही छोड़ दिया है। हालांकि, यहां वैक्सीनेशन चल रहा है, लेकिन उपचार के लिए लोग झोलाछाप पर हैं। जबकि यहां 15 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। इनमें से अधिकांश ने कोरोना की जांच भी नहीं कराई थी। किसान संगठन यहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
रिपोर्ट आने में लगता है एक सप्ताह
कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोरोना वैक्सीनेशन व टेस्टिंग की जा रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में कई बार एक सप्ताह का समय लगता है। इससे तब तक मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य केंद्र में उपचार की व्यवस्था न होने से लोग झोलाछापों से उपचार कराने को विवश हैं। व्यापारी संदीप जैन का कहना है कि जिला प्रशासन ने सभी कस्बों में ऑक्सीजन व बेड की उचित व्यवस्था की है, लेकिन दनकौर और बिलासपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इससे गांवों में लगातार लोग जान गंवा रहे हैं।
कोरोना के कारण ओपीडी बंद होने से सभी स्वास्थ्य केंद्र बंद हैं। कोविड टेस्ट में जो ग्रामीण पॉजिटिव आते हैं। उनके घरों पर दवाओं का वितरण किया जा रहा है। अभी गांवों में घर-घर जाकर कोविड टेस्ट शुरू नहीं किए गए हैं।
- संजीव सारस्वत, दादरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी