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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का आरोप, जांच की मांग
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ग्रेटर नोएडा। नेफोमा ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि औषधि विभाग सभी अस्पतालों के फार्मा पर इंजेक्शन उपलब्ध होने का दावा कर रहा है, जबकि वहां पर इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। अस्पताल से तीमारदारों को बाहर से इंजेक्शन की व्यवस्था करने को बोला जा रहा है। नेफोमा के अध्यक्ष अन्नू खान ने बताया कि ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टर ईकोटेक तीन स्थित एक कंपनी में रेमडेसिविर इंजेक्शन मिल रहा था, लेकिन अब वहां भी मिलना बंद हो गया है। डॉक्टर की पर्ची पर भी इंजेक्शन नहीं दे रहे हैं।
उनका कहना है कि औषधि निरीक्षक की अनुमति के बाद ही इंजेक्शन दिया जाएगा। जब इस संबंध में औषधि निरीक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों के फार्मा पर इंजेक्शन उपलब्ध है। लोग वहां से इंजेक्शन ले सकते हैं। जबकि, अस्पताल तीमारदारों को इधर-उधर भगा रहे हैं। नेफोमा के उपाध्यक्ष महावीर ठुस्सु का कहना है कि कंपनी इंजेक्शन देने को तैयार है, लेकिन औषधि विभाग की अनुमति मांग रही है। आरोप है कि जब अस्पताल में इंजेक्शन मिल रहा है तो भी लोगों को परेशान क्यों कर रहे हैं। महासचिव रश्मि पांडेय ने बताया कि उनके एक परिचित ने गुरुग्राम से इंजेक्शन मंगवाया था। सरकार को कालाबाजारी की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
ऑक्सीमीटर की भी हो रही कालाबाजारी
महामारी के बीच बेड और ऑक्सीजन के बाद अब ऑक्सीमीटर की भी कमी दिखने लगी है। शहर के नामी अस्पतालों के आसपास दवा की दुकानों पर ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है। मेडिकल स्टोर संचालक ऑनलाइन ऑक्सीमीटर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि दो-तीन बाद 10 ऑक्सीमीटर ही आते हैं और वह 5-6 घंटे में ही बिक जाते हैं। सेक्टर-62 स्थित एक नामी निजी अस्पताल के पास दवा की दुकान चलाने वाले मनीष ने बताया कि पहले 1300-1400 रुपये में अच्छी किस्म के ऑक्सीमीटर बेचते थे, जबकि अब प्रिंट रेट के अनुसार 2,500 रुपये में ऑक्सीमीटर बेच रहे हैं।
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एक अन्य मेडिकल स्टोर पर कार्यरत सुभाष ने बताया कि ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं होने पर वे लोगों को ऑनलाइन खरीदने की राय देते है, क्योंकि उनके पास ऑक्सीमीटर आने के बारे में कोई समय और दिन निश्चित नहीं होता है, जबकि ऑनलाइन दूसरे दिन आ जाता है। इसके अलावा रुपये भी अधिक नहीं देने पड़ते है। ऑनलाइन भी 2,400 से 2,500 रुपये में ऑक्सीमीटर मिल रहा है। मेडिकल एसोसिएशन नोएडा के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जरूरत होने पर ऑक्सीमीटर खरीदना चाहिए। बाजार में ऑक्सीमीटर कम होने के कारण जरूरतमंद लोग परेशान हो रहे हैं।
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उनका कहना है कि औषधि निरीक्षक की अनुमति के बाद ही इंजेक्शन दिया जाएगा। जब इस संबंध में औषधि निरीक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों के फार्मा पर इंजेक्शन उपलब्ध है। लोग वहां से इंजेक्शन ले सकते हैं। जबकि, अस्पताल तीमारदारों को इधर-उधर भगा रहे हैं। नेफोमा के उपाध्यक्ष महावीर ठुस्सु का कहना है कि कंपनी इंजेक्शन देने को तैयार है, लेकिन औषधि विभाग की अनुमति मांग रही है। आरोप है कि जब अस्पताल में इंजेक्शन मिल रहा है तो भी लोगों को परेशान क्यों कर रहे हैं। महासचिव रश्मि पांडेय ने बताया कि उनके एक परिचित ने गुरुग्राम से इंजेक्शन मंगवाया था। सरकार को कालाबाजारी की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
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ऑक्सीमीटर की भी हो रही कालाबाजारी
महामारी के बीच बेड और ऑक्सीजन के बाद अब ऑक्सीमीटर की भी कमी दिखने लगी है। शहर के नामी अस्पतालों के आसपास दवा की दुकानों पर ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है। मेडिकल स्टोर संचालक ऑनलाइन ऑक्सीमीटर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि दो-तीन बाद 10 ऑक्सीमीटर ही आते हैं और वह 5-6 घंटे में ही बिक जाते हैं। सेक्टर-62 स्थित एक नामी निजी अस्पताल के पास दवा की दुकान चलाने वाले मनीष ने बताया कि पहले 1300-1400 रुपये में अच्छी किस्म के ऑक्सीमीटर बेचते थे, जबकि अब प्रिंट रेट के अनुसार 2,500 रुपये में ऑक्सीमीटर बेच रहे हैं।
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एक अन्य मेडिकल स्टोर पर कार्यरत सुभाष ने बताया कि ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं होने पर वे लोगों को ऑनलाइन खरीदने की राय देते है, क्योंकि उनके पास ऑक्सीमीटर आने के बारे में कोई समय और दिन निश्चित नहीं होता है, जबकि ऑनलाइन दूसरे दिन आ जाता है। इसके अलावा रुपये भी अधिक नहीं देने पड़ते है। ऑनलाइन भी 2,400 से 2,500 रुपये में ऑक्सीमीटर मिल रहा है। मेडिकल एसोसिएशन नोएडा के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जरूरत होने पर ऑक्सीमीटर खरीदना चाहिए। बाजार में ऑक्सीमीटर कम होने के कारण जरूरतमंद लोग परेशान हो रहे हैं।