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Noida News: 15 साल में 17 साल तक घट गई कैंसर मरीजों की आयु

Sat, 10 Feb 2024 06:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2024 06:35 PM IST
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Age of cancer patients reduced to 17 years in 15 years
-45 साल के बजाय 28 वर्ष की उम्र में दिख रहे लक्षण
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-देश में इस रोग इलाज के लिए नहीं है पर्याप्त संसाधन
-बीमारी की रोकथाम को लेकर जुटे देशभर के विशेषज्ञ
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-महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन व सर्वाइकल कैंसर
-पुरुषों में हेड एंड नेक व लंग्स कैंसर की बहुतायत
-पीड़ितों की उम्र घटने से कैंसर विशेषज्ञ भी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बदलते लाइफ स्टाइल, खानपान और पर्यावरण में हो रहे बदलाव सहित अन्य कारणों से कैंसर मरीजों की आयु पिछले 15 सालों में 17 साल तक घट गई है। कैंसर रोग के जो लक्षण करीब 15 साल पहले 45 साल की उम्र के मरीजों में दिखाई देते थे, वहीं लक्षण अब 28 साल की उम्र के लोगों में भी दिख रहे हैं। कैंसर पीड़ितों की उम्र घटने से कैंसर विशेषज्ञ भी परेशान हैं।
इन्हीं समस्याओं को लेकर देशभर के कैंसर विशेषज्ञ शनिवार को दिल्ली में आईओकोन2024 कार्यक्रम में जुटे। इस दौरान पिछले 15 साल में कैंसर देखभाल में प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान बताया गया कि देश की महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले हैं। उसके बाद दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर हैं। इन दोनों बीमारियों से हर साल हजारों महिलाएं जान गवां रहीं हैं। सर्वाइकल कैंसर को लेकर टीकाकरण की तैयारी शुरू हो गई है। ठीक इसी तरह से 25 साल के बाद महिलाओं में खुद ही स्तन की जांच के प्रति जागरूक बढ़ानी होगी। ऐसा करने पर इन कैंसर की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। वहीं पुरुषों में हेड एंड नेक कैंसर सबसे ज्यादा हैं। इसके लिए तंबाकू जिम्मेदार है। जबकि दूसरे नंबर पर लंग्स कैंसर हैं। धूम्रपान इसका बड़ा कारण है। इन्हें रोकने के लिए जागरूकता के साथ सरकार को कड़े फैसले लेने होंगे।
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5 फीसदी की दर से बढ़ रहे मरीज हर साल
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. शुभम गर्ग ने कहा कि मरीजों में कई तरह के कैंसर हैं। इनमें स्तन, सर्वाइकल कैंसर, हेड एंड नेक व लंग्स कैंसर सबसे ज्यादा हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण लंग्स कैंसर अब नॉन स्मोकर में भी दिखने लगा है। हर साल पांच फीसदी तक कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। इनकी रोकथाम के लिए जांच और इलाज को बढ़ाना होगा।
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2 एमएम की गांठ भी कैंसर
डॉ. प्रिया बंसल का कहना है कि 25 साल की उम्र के बाद खुद के स्तन की जांच कर इस कैंसर को रोका जा सकता है। स्तन में दो एमएम के गांठ स्टेज एक और दो से पांच एमएम की गांठ स्टेज दो हो सकती है। यदि मरीज इन स्टेज में भी डॉक्टर के पास आ जाती है तो इलाज आसानी से हो सकता है। लेकिन जागरूकता के अभाव में महिलाएं एडवांस स्टेज में आती हैं। इस वजह से मौत के मामले काफी अधिक हैं।
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सब्सिडी दे सरकार
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार को इलाज की मशीन लाने के लिए सब्सिडी देनी चाहिए। देशभर में अभी रेडिएशन की कुल 640 मशीन हैं, जबकि जनसंख्या के आधार पर यह 1400 होनी चाहिए। यह मशीनें विदेश से आती हैं और सरकार इनपर काफी भारी टैक्स लगाती है। इनके दाम को कम करने के लिए सरकार को छूट देना चाहिए ताकि मशीनों की संख्या बढ़े।

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मेक इन इंडिया पर बढ़े शोध
देश में कैंसर के इलाज व जांच के लिए मेक इन इंडिया मशीनों की संख्या बढ़ने लगी हैं। लेकिन इनकी सटीकता की जांच के लिए शोध को बढ़ावा देना होगा। इसके परिणाम आने में अभी लंबा समय लगेगा। ऐसे में मौजूदा एडवांस मशीन की संख्या भी बढ़ानी होगा। जिससे इलाज और जांच में तेजी आ सकें। डॉ. रावल का कहना है कि वह अमेरिकन और भारतीय मशीनों के परिणाम का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं।
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