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सीएम के आदेश के बाद एमराल्ड कोर्ट की खुली फाइल, जांच शुरू

Thu, 02 Sep 2021 01:33 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 01:33 AM IST
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After the order of the CM, the open file of the Emerald Court, the investigation started
नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद नोएडा सेक्टर-93ए के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर के निर्माण में अनियमितता की फाइल जांच के लिए खुल गई है। प्राधिकरण के एसीईओ की कमेटी मामले की जांच कर रही है। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री ने जांच के बाद जरूरत पड़ने पर दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मामला चलाने के आदेश दिए हैं। मामले में शासन स्तर पर एक स्पेशल जांच कमेटी गठित करने की बात भी कही गई है, ताकि बेहतर जांच हो सके।
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मंगलवार को आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर और प्राधिकरण के गठजोड़ की बात कही थी। इसके बाद नोएडा से लेकर लखनऊ तक अधिकारी सक्रिय हो गए। खुद मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। प्राधिकरण ने एसीईओ नेहा शर्मा और एसीईओ प्रवीण कुमार मिश्र की संयुक्त कमेटी को जांच में लगाया है। वहीं, मुख्यमंत्री के आदेश के बाद इसी कमेटी को त्वरित जांच के लिए कहा गया है। चार से पांच दिनों में प्राथमिक रिपोर्ट देनी है। इसमें प्रथमदृष्टया एमराल्ड कोर्ट मामले में संलिप्त अधिकारियों की पहचान करनी है। इसके अलावा किन स्तरों पर कमियां हुईं। इसकी भी जानकारी इकट्ठी करनी है। इसे लेकर विभागों से फाइलें मंगाकर खंगाली जा रही हैं।
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किन-किन स्तरों पर हुई अनियमितता, हो रही जांच
सुप्रीम कोर्ट की ओर से उठाए गए बिंदुओं पर जांच की जाएगी। इसमें प्राधिकरण में किस स्तर पर अनियमितता और नियमों का उल्लंघन किया गया है यह भी जांच का विषय होगा। इससे पता चलेगा कि किन-किन अधिकारियों की संलिप्तता है।
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अलग से विभागीय जांच भी होगी
प्राधिकरण की ओर से इस मामले में अलग से विभागीय जांच भी होगी। यह पहले की जांच से अलग होगी। इसमें कोर्ट के हर बिंदुओं पर उठाए गए सवाल के आधार पर जांच होगी। जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
- क्या टावर-16 और 17 ग्रीन एरिया में खड़े किए गए?
- क्या दो टावरों के बीच की दूरी का मानक स्तर पर ख्याल नहीं किया गया?
- क्या आरडब्ल्यूए को जानबूझकर आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया?
- क्या अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो देने में नियमों का उल्लंघन किया गया?
- क्या इमारत की ऊंचाई नियमों के खिलाफ बढ़ाई गई?
- आरडब्ल्यूए के मांगने पर नक्शे क्यों नहीं उपलब्ध कराए गए?
- क्या बिल्डिंग प्लान सैंक्शन होने से पहले निर्माण कार्य शुरू किया गया?
मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद एमराल्ड कोर्ट मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एसीईओ की कमेटी इस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट जल्द मिलेगी। इसे शासन को भेजा जाएगा। - रितु माहेश्वरी, सीईओ, प्राधिकरण
ब्लास्ट तकनीक से 7 सेकेंड में ढह जाएंगे ट्विन टावर
नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सेक्टर-93ए सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। इसे केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) गिराएगा। वहीं, अब इस पर बहस शुरू हो गई है कि इतनी ऊंची इमारतें आखिर कैसे गिराई जाएंगी। इस बाबत विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लास्ट तकनीक के सहारे इसे सात सेेकेंड में गिराया जा सकता है। मैनुअल तरीके से इस गिराने में 10 माह का भी समय लग सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक , सबसे अच्छा तरीका बलास्ट तकनीक है। इससे सभी मंजिलें एक के ऊपर एक गिरेंगी। आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। हालांकि ब्लास्ट के दौरान धूल और धुएं का गुबार उठ सकता है। काम के दौरान करीब 100 मीटर का एरिया कुछ समय के लिए खाली करा लिया जाता है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। इस तकनीक में पांच-पांच तल के बीच में विस्फोटक लगाए जाते हैं। इनका समय फिक्स किया जाता है। सबसे ऊपर की मंजिल से ब्लास्ट किया जाता है जो नीचे की मंजिल तक होता है और इसमें केवल सात सेकेंड लगते हैं। सबसे ऊपर की मंजिल पर ब्लास्ट होते ही पांच मंजिल का भार नीचे की ओर आता है। इसी दौरान उसके नीचे की मंजिल पर ब्लास्ट होता चला जाता है।
मैनुअल तरीके से ध्वस्तीकरण का यह होगा असर
मैनुअल तरीके से अगर ध्वस्तीकरण की योजना बनाई जाती है तो मशीनों से ऊपर के तलों को तोड़ने से शुरुआत होगी। इसके बाद यह धीरे-धीरे नीचे की ओर आएगा। करीब 15 मंजिल पर आकर फिर ब्लास्ट तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस काम में करीब आठ से दस महीने का समय लग जाएगा।
दो माह से ज्यादा की होगी तैयारी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में करीब दो माह की तैयारी करनी होगी। ब्लास्ट की तकनीक का उपयोग किया जाता है तो पहले इमारत की ऐसी चीजों को काटकर हटाना होगा, जो इस ब्लास्ट के बाद इमारत के सीधे नीचे धंसने में रोड़ा न बनें। ऐसा नहीं किया जाता तो इसका मलबा इधर-उधर बिखरेगा।
ट्विन टावर के आसपास का एरिया
ट्विन टावर के सामने साठ मीटर की रोड है। इसके बाद पार्क है। इसके बायीं और पीछे एस्टर के दो और एमराल्ड कोर्ट के कुछ टावर हैं। इसके दाहिनी ओर एटीएस विलेज के सात टावर दीवार के साथ हैं। इसके पीछे पार्श्वनाथ सृष्टि के दो टावर हैं।
सीबीआरआई को अगले सप्ताह पत्र लिखेगा प्राधिकरण
प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने कहा कि कोर्ट की सत्यापित कॉपी आने के बाद अगले सप्ताह प्राधिकरण की ओर से केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की को पत्र लिखा जाएगा। पत्र में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कही गई बातों को अवगत कराया जाएगा। इसमें आवासीय एरिया में रह रहे लोगों को सुरक्षित रखते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करानी होगी। वहां बात नहीं बनती है तो दूसरी एजेंसियों को भी परखा जाएगा।

सबसे अच्छा तरीका ब्लास्ट तकनीक है। इससे सात सेकेंड में इमारतें जमींदोज हो जाएंगी और आसपास के इमारतों को भी कोई नुकसान नहीं होगा। मैनुअल तरीके से काम किया जाता है तो कम से कम 10 माह लगेंगे। कोच्चि के मराडु में इसी तकनीकी पर काम किया गया था। - उत्कर्ष मेहता, विशेषज्ञ, एडिफिश इंजीनियरिंग
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