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Noida News: नाबालिग से विवाह के आरोपी को मिली जमानत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग से विवाह और पॉक्सो एक्ट के आरोपी आरिफ को जमानत दी है। मामला थाना सेक्टर-39 नोएडा का है। जिसमें आरोपी पर नाबालिग को अपने साथ ले जाने पर पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
प्रकरण के अनुसार 11 जुलाई 2025 की रात शिकायतकर्ता की पुत्री घर से बिना बताए कहीं चली गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। 18 जुलाई को पीड़िता की सहेली ने बताया कि एक युवक उसे अपने साथ ले गया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों को देखने के बाद पाया कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 9 मार्च 2009 है। जिससे उसकी उम्र घटना के समय 16 वर्ष से अधिक सिद्ध होती है। पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी से विवाह कर पति-पत्नी की तरह रहने की बात कही थी। लेकिन बाद में दिए गए बयान में उसने शारीरिक संबंध से इनकार किया। अदालत ने कहा कि कानूनन धारा 183 के तहत दिया गया बयान प्राथमिकता रखता है। अदालत ने माना कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से अधिक है। उसके बयान में किसी प्रकार के शारीरिक संबंध का उल्लेख नहीं है। इसलिए मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत देना उचित होगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग से विवाह और पॉक्सो एक्ट के आरोपी आरिफ को जमानत दी है। मामला थाना सेक्टर-39 नोएडा का है। जिसमें आरोपी पर नाबालिग को अपने साथ ले जाने पर पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
प्रकरण के अनुसार 11 जुलाई 2025 की रात शिकायतकर्ता की पुत्री घर से बिना बताए कहीं चली गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। 18 जुलाई को पीड़िता की सहेली ने बताया कि एक युवक उसे अपने साथ ले गया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों को देखने के बाद पाया कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 9 मार्च 2009 है। जिससे उसकी उम्र घटना के समय 16 वर्ष से अधिक सिद्ध होती है। पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी से विवाह कर पति-पत्नी की तरह रहने की बात कही थी। लेकिन बाद में दिए गए बयान में उसने शारीरिक संबंध से इनकार किया। अदालत ने कहा कि कानूनन धारा 183 के तहत दिया गया बयान प्राथमिकता रखता है। अदालत ने माना कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से अधिक है। उसके बयान में किसी प्रकार के शारीरिक संबंध का उल्लेख नहीं है। इसलिए मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत देना उचित होगा।
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