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Noida News: सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन पर एसीबी ने दर्ज की एफआईआर

Thu, 26 Jun 2025 08:08 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 26 Jun 2025 08:08 PM IST
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ACB registers FIR against Saurabh Bhardwaj and Satyendra Jain
सरकारी अस्पतालों, पॉलीक्लिनिकों व आईसीयू निर्माण में कथित रूप से घोटाले का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आप सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दोनों के खिलाफ दिल्ली के सरकारी अस्पतालों, पॉलीक्लिनिकों और आईसीयू निर्माण में कथित घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
दरअसल, वर्ष 2018-19 में 5,590 करोड़ की लागत से 24 अस्पताल व पॉलीक्लिनिकों की परियोजनाओं में अकारण देरी और असाधारण लागत वृद्धि के आरोप आप सरकार पर लगे थे। इसे लेकर तत्कालीन भाजपा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एसीबी से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर लूट-खसोट की गई है। उपराज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली। अब जल्द ही दोनों को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि दोनों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। एसीबी प्रमुख व संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीओसी) की धारा-17ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान जिन लोगों की भी भूमिकाएं सामने आएगी, उन्हें पूछताछ में शामिल होने के नोटिस दिए जाएंगे। एसीबी जल्द ही पूर्व मंत्रियों से भी पूछताछ करेगी।
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यह लगाए थे आरोप

22 अगस्त 2022 को विजेंद्र गुप्ता से एसीबी को शिकायत देकर दिल्ली सरकार की 5,590 करोड़ की विभिन्न स्वास्थ्य परियोजनाओं में घोटाले के आरोप लगाए थे। कहा गया था कि परियोजनाओं के बजट में भारी हेरफेर किया गया है। साथ ही, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया। इन लोगों ने निजी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत की थी। वर्ष 2018-2019 के दौरान 5,590 करोड़ रुपये की लागत से अस्पतालों की 24 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। हालांकि, यह परियोजनाएं बड़े पैमाने पर अधूरी रहीं और लागत में अस्पष्ट बढ़ोतरी हुई। इसी तरह 1,125 करोड़ रुपये के आईसीयू प्रोजेक्ट में 6,800 बिस्तरों वाली पहले से तैयार 7 सुविधाएं शामिल थीं। लगभग तीन साल बाद भी केवल 50 फीसदी योजना ही पूरी हो पाई, जबकि शुरुआती समयसीमा छह माह थी। योजना पर 800 करोड़ रुपये भी खर्च हो चुके हैं।
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अनधिकृत अतिरिक्त निर्माण
एसीबी को जांच में पता चला कि ज्वालापुरी और मादीपुर के सरकारी अस्पतालों में सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के बिना अनधिकृत अतिरिक्त निर्माण किया गया। खास बात यह है कि मादीपुर अस्पताल परियोजना को नवंबर 2022 तक पूरा होना था, लेकिन अभी काम बंद है। इधर, एलएनजेपी अस्पताल में न्यू ब्लॉक का काम जिसे स्वदेशी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था, चार साल में उसकी लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ हो गई। जनवरी 2023 की समयसीमा के बाद भी यह इमारत अभी तक अधूरी है।

पॉलीक्लिनिक परियोजना
पॉलीक्लिनिक परियोजना को लेकर भी धांधली के आरोप लगाए गए। 94 नियोजित क्लीनिकों में से केवल 52 ही बनाए गए, जबकि लागत 168 करोड़ से बढ़कर 220 करोड़ रुपये हो गई। इनमें से कई पॉलीक्लिनिक काम नहीं कर रहे हैं। इसे लेकर भी एसीबी की जांच लगातार जारी है। एसीबी की तमाम जांच के दौरान नियमों, टेंडर की शर्ताें और वित्तीय प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन पाया गया। इसमें जानबूझकर की देरी, परियोजनाओं की बढ़ी हुई लागत, उचित विकल्पों को खारिज करने की बात सामने आई। इन सबकी वजह से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
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