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आप विधायक प्रीति तोमर ने झूठी शैक्षिक जानकारी देने के आरोप को नकारा
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नई दिल्ली। चुनावी नामांकन में झूठी शैक्षिक जानकारी देने संबंधी आरोपों को आम आदमी पार्टी की विधायक प्रीति तोमर ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के समक्ष प्रीति तोमर ने कहा कि उनकी एमएससी तथा बीएड की डिग्री उनके मूल नाम पर जारी की गई थी जिसे उन्होंने शादी के बाद बदल लिया था। भाजपा नेता नवीन पराशर ने त्रिनगर विधानसभा से प्रीति तोमर के चुनाव को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर की पीठ के समक्ष प्रीति तोमर ने अधिवक्ता कुश शर्मा के जरिये जवाब दाखिल कर कहा कि पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह तोमर से शादी से पहले उनका मूल नाम कुमारी तुलसा सोलंकी थी। उन्होंने अपना दाखिला रघुनाथ गर्ल्स डिग्री कॉलेज में करवा रखा जो चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से संबद्ध है।
अपने जवाब में आप विधायक ने ये भी कहा कि उन्हें 1988 में बीएससी तथा 1990 में एमएसी की डिग्री मिली थी। इसके बाद 1995 में बीएड की डिग्री भी चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से ही मिली थी। उन्होंने 1998 में शादी के बाद अपना नाम बदलकर प्रीति तोमर कर लिया था। इसकी जानकारी 2017 में उन्होंने दो दैनिक अखबारों में दी थी। इसके बाद दूसरी बार अपना नाम बदलकर 2020 में प्रीति जितेंद्र तोमर कर लिया था।
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वहीं आप विधायक ने अपने जवाब में ये भी कहा कि पेश याचिका उनके चुनाव के 45 दिनों के भीतर दायर नहीं की गई थी और ये अवधि 11 फरवरी 2020 को समाप्त हो गई थी। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को हाईकोर्ट ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावी नामांकन में झूठी डिग्री का उल्लेख करने का दोषी ठहराया था। अदालत ने 2020 में तोमर का चुनाव रद्द कर दिया था।
भाजपा नेता नवीन पराशर ने अधिवक्ता अनिल सोनी के जरिये याचिका दायर कर प्रीति तोमर पर एमएससी व बीएड की डिग्री होने का झूठा तथ्य चुनावी नामांकन पत्र में दिया है। याची का दावा है कि प्रीति तोमर ने 1994 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बीएड करने की बात कही है जबकि उस समय वहां पर इसकी पढ़ाई नहीं होती थी। अब याची ने प्रीति तोमर के जवाब अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। अदालत ने सुनवाई के लिए पांच मार्च की तारीख तय की है। - एजेंसी
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न्यायमूर्ति राजीव शकधर की पीठ के समक्ष प्रीति तोमर ने अधिवक्ता कुश शर्मा के जरिये जवाब दाखिल कर कहा कि पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह तोमर से शादी से पहले उनका मूल नाम कुमारी तुलसा सोलंकी थी। उन्होंने अपना दाखिला रघुनाथ गर्ल्स डिग्री कॉलेज में करवा रखा जो चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से संबद्ध है।
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अपने जवाब में आप विधायक ने ये भी कहा कि उन्हें 1988 में बीएससी तथा 1990 में एमएसी की डिग्री मिली थी। इसके बाद 1995 में बीएड की डिग्री भी चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से ही मिली थी। उन्होंने 1998 में शादी के बाद अपना नाम बदलकर प्रीति तोमर कर लिया था। इसकी जानकारी 2017 में उन्होंने दो दैनिक अखबारों में दी थी। इसके बाद दूसरी बार अपना नाम बदलकर 2020 में प्रीति जितेंद्र तोमर कर लिया था।
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वहीं आप विधायक ने अपने जवाब में ये भी कहा कि पेश याचिका उनके चुनाव के 45 दिनों के भीतर दायर नहीं की गई थी और ये अवधि 11 फरवरी 2020 को समाप्त हो गई थी। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को हाईकोर्ट ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावी नामांकन में झूठी डिग्री का उल्लेख करने का दोषी ठहराया था। अदालत ने 2020 में तोमर का चुनाव रद्द कर दिया था।
भाजपा नेता नवीन पराशर ने अधिवक्ता अनिल सोनी के जरिये याचिका दायर कर प्रीति तोमर पर एमएससी व बीएड की डिग्री होने का झूठा तथ्य चुनावी नामांकन पत्र में दिया है। याची का दावा है कि प्रीति तोमर ने 1994 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बीएड करने की बात कही है जबकि उस समय वहां पर इसकी पढ़ाई नहीं होती थी। अब याची ने प्रीति तोमर के जवाब अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। अदालत ने सुनवाई के लिए पांच मार्च की तारीख तय की है। - एजेंसी