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Noida News: स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम जमा कराने के नाम पर महिला से 1.57 लाख ठगे
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इंदिरापुरम। वसुंधरा सेक्टर पांच की रहने वाली अनुराधा त्यागी को साइबर ठगों ने स्वास्थ्य बीमा की किश्त टूटने के बाद जाल में फंसाया। किश्त जमा कराने के बहाने बीमा कंपनी का अधिकारी बनकर बैंक खाते में 1,57,595 रुपये जमा करा लिए। भरोसा दिलाने के लिए व्हाट्सएप पर रसीद भी भेजी लेकिन वह भी एक साल पुरानी तारीख की। ठगी का पता चलने पर पीड़िता के पति दीपक कुमार ने दो अक्तूबर को साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की। 10 अक्तूबर की रात पोर्टल से थाने ट्रांसफर हुई शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
दर्ज मुकदमे में दीपक कुमार ने बताया कि उनकी निजी बीमा कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी संचालित है। इसकी वार्षिक किश्त अगस्त में जमा की जाती है। किन्हीं कारणों से वह किश्त जमा नहीं कर पाए। 17 सितंबर को बीमा कंपनी अधिकारी बनकर एक व्यक्ति ने उनकी पत्नी अनुराधा त्यागी को कॉल किया। झांसे में लेने के लिए पॉलिसी नंबर व अन्य जानकारियां बताईं और किश्त जमा करने को कहा।
उसी दिन कंपनी के अकाउंट अधिकारी बनकर सिद्धार्थ सहगल नाम के व्यक्ति ने कॉल किया। इसके बाद अपना कार्यालय पहचान पत्र व्हाट्सएप पर भेजकर यकीन दिलाया। महिला को एक बैंक खाता नंबर भी भेजा। किश्त के नाम पर पत्नी ने 17 सितंबर को 37,595 रुपये, 20 सितंबर को 99 हजार रुपये और 21 सितंबर को 21 हजार रुपये ठग के बताए खाते में भेज दिए। 22 सितंबर को आरोपी ने व्हाट्सएप पर एक रसीद भी भेजी लेकिन तारीख इतनी बारीक लिखी थी कि महिला पहचान ही नहीं पाईं कि रसीद 22 सितंबर 2024 की है।
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कुछ दिन तक बीमा पॉलिसी में रकम अपडेट न होने पर उन्होंने सिद्धार्थ सहगल को फोन किया लेकिन वह टालमटोल करता रहा। जब आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर फोन कर जानकारी की तब ठगी का पता चला। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि महिला ने जिस खाते में रकम ट्रांसफर की है वह बैंक खाता फ्रीज करवा दिया गया है। जिन नंबरों से पीड़िता को कॉल की गई थी उन्हें भी सर्विलांस टीम ट्रेस कर रही है। जांच के बाद मामले का खुलासा व आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
डाटा लीक करने वालों पर हो कार्रवाई
पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बीमा कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीमा पॉलिसी से संबंधित जानकारी कंपनी की गोपनीयता होनी चाहिए। यह जानकारी साइबर ठगों तक पहुंची इसका मतलब है कि कंपनी कर्मियों व अधिकारियों की भी मिलीभगत है। बिना उनकी मदद के डाटा लीक नहीं हो सकता है। पीड़ित ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए कंपनी पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।
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दर्ज मुकदमे में दीपक कुमार ने बताया कि उनकी निजी बीमा कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी संचालित है। इसकी वार्षिक किश्त अगस्त में जमा की जाती है। किन्हीं कारणों से वह किश्त जमा नहीं कर पाए। 17 सितंबर को बीमा कंपनी अधिकारी बनकर एक व्यक्ति ने उनकी पत्नी अनुराधा त्यागी को कॉल किया। झांसे में लेने के लिए पॉलिसी नंबर व अन्य जानकारियां बताईं और किश्त जमा करने को कहा।
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उसी दिन कंपनी के अकाउंट अधिकारी बनकर सिद्धार्थ सहगल नाम के व्यक्ति ने कॉल किया। इसके बाद अपना कार्यालय पहचान पत्र व्हाट्सएप पर भेजकर यकीन दिलाया। महिला को एक बैंक खाता नंबर भी भेजा। किश्त के नाम पर पत्नी ने 17 सितंबर को 37,595 रुपये, 20 सितंबर को 99 हजार रुपये और 21 सितंबर को 21 हजार रुपये ठग के बताए खाते में भेज दिए। 22 सितंबर को आरोपी ने व्हाट्सएप पर एक रसीद भी भेजी लेकिन तारीख इतनी बारीक लिखी थी कि महिला पहचान ही नहीं पाईं कि रसीद 22 सितंबर 2024 की है।
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कुछ दिन तक बीमा पॉलिसी में रकम अपडेट न होने पर उन्होंने सिद्धार्थ सहगल को फोन किया लेकिन वह टालमटोल करता रहा। जब आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर फोन कर जानकारी की तब ठगी का पता चला। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि महिला ने जिस खाते में रकम ट्रांसफर की है वह बैंक खाता फ्रीज करवा दिया गया है। जिन नंबरों से पीड़िता को कॉल की गई थी उन्हें भी सर्विलांस टीम ट्रेस कर रही है। जांच के बाद मामले का खुलासा व आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
डाटा लीक करने वालों पर हो कार्रवाई
पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बीमा कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीमा पॉलिसी से संबंधित जानकारी कंपनी की गोपनीयता होनी चाहिए। यह जानकारी साइबर ठगों तक पहुंची इसका मतलब है कि कंपनी कर्मियों व अधिकारियों की भी मिलीभगत है। बिना उनकी मदद के डाटा लीक नहीं हो सकता है। पीड़ित ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए कंपनी पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।