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विस्थापित किसानों के बच्चों के लिए बनेगा नया स्कूल
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जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए छह गांवों के 3,000 परिवारों को विस्थापित किया गया था। एक वर्ष का समय बीतने के बावजूद टाउनशिप में विस्थापित हुए किसानों के बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल का इंतजाम नहीं हो पाया। अमर उजाला ने अभियान के तहत 11 अप्रैल के अपने अंक में ‘आंगनबाड़ी केंद्र की रसोई में चटाई बिछाकर पढ़ रहे बच्चे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर में तीन गांवों के बीच एक स्कूल का निर्माण, उसमें भी घटिया सामग्री, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत समस्याओं को उठाया था। यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ अरुण कुमार सिंह ने ग्रामीणों की मांग को देखते हुए प्रशासन को एक अतिरिक्त स्कूल बनाने के लिए पत्र लिखा है।
विस्थापित होने वाले गांव रोही नगला गणेशी, नगला फूलखां, नगला छीतर, नगला शरीफ व दयानतपुर खेड़ा के छात्र इन गांवों का विस्थापन होने से पहले चार से पांच स्कूलों में पढ़ाई करने जाते थे। विस्थापन के बाद एक ही कैंपस में तीनों गांव के स्कूलों के लिए चार-चार कमरे का स्कूल बनाने का फैसला किया गया था, जिसका निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन 16 कमरों में 3 स्कूलों की 21 कक्षाओं के हिसाब से एक कक्षा को बिठाने के लिए एक कमरा भी हिस्से नहीं आ रहा। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा अलग-अलग तीन स्कूल बनाने की मांग की जा रही थी। मंगलवार को यमुना विकास प्राधिकरण की तरफ से जिला प्रशासन को पत्र भेजते हुए एयरपोर्ट के विस्थापित गांव के लिए एक अतिरिक्त स्कूल बनाने के लिए कहा गया है। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द विस्थापित गांव के किसानों को एक और स्कूल की सौगात मिल सकती है।
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विस्थापित होने वाले गांव रोही नगला गणेशी, नगला फूलखां, नगला छीतर, नगला शरीफ व दयानतपुर खेड़ा के छात्र इन गांवों का विस्थापन होने से पहले चार से पांच स्कूलों में पढ़ाई करने जाते थे। विस्थापन के बाद एक ही कैंपस में तीनों गांव के स्कूलों के लिए चार-चार कमरे का स्कूल बनाने का फैसला किया गया था, जिसका निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन 16 कमरों में 3 स्कूलों की 21 कक्षाओं के हिसाब से एक कक्षा को बिठाने के लिए एक कमरा भी हिस्से नहीं आ रहा। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा अलग-अलग तीन स्कूल बनाने की मांग की जा रही थी। मंगलवार को यमुना विकास प्राधिकरण की तरफ से जिला प्रशासन को पत्र भेजते हुए एयरपोर्ट के विस्थापित गांव के लिए एक अतिरिक्त स्कूल बनाने के लिए कहा गया है। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द विस्थापित गांव के किसानों को एक और स्कूल की सौगात मिल सकती है।
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