फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   A bullet hits the chest of a soldier posted on the border

मदर्स डे पर खास: सीमा पर तैनात जवान के सीने में लगी गोली हजारों किमी दूर बैठी मां के दिल में लगती है...

Sat, 10 May 2025 05:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 05:15 PM IST
विज्ञापन
A bullet hits the chest of a soldier posted on the border
-देश के लिए शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर और कैप्टन शशिकांत शर्मा की मां ने साझा किए अनुभव
विज्ञापन


वान्या दीक्षित
नोएडा। मां के लिए उसका बच्चा क्या होता है यह मां से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। यदि बच्चे को दर्द होता है तो मां भी तड़प जाती है। मां से दूर बच्चे को जब परेशानी होती है तो मां भी परेशान होने लगती है। मां को कुदरती तौर पर अहसास हो जाता है कि बच्चा किसी परेशानी में है। एक बच्चे को बनाने और बिगाड़ने में मां का अहम रोल होता है। यह कहना है भारतीय सेना में तैनात रहे नोएडा के वीर सपूतों की मां का। मदर्स डे के मौके पर शहीद कैप्टन विजयंत थापर और कैप्टन शशिकांत शर्मा की मां ने अपने अनुभव साझा किए ........
------
बेटे ने कहा था 20 दिन बाद बात करेंगे, लेकिन फोन नहीं आया...
29 जून 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर की मां तृप्ता थापर (72) कहती हैं कि बॉर्डर पर तैनात भारतीय सेना के जवान को जब गोली लगती है तो वह गोली केवल उस वीर सैनिक की छाती को ही छलनी नहीं करती है बल्कि वही गोली हजारों किलोमीटर दूर बैठी उसकी मां के दिल को भी तार-तार कर देती है। वह कहती हैं कि पता ही नहीं चला कि मेरा बेटा कारगिल में अपनी सेवाएं दे रहा है। बेटे से जब आखिरी बार बात हुई थी तो उसने कहा था कि अब 20 दिन बाद आपको फोन करेंगे। अभी हम दूसरे टास्क पर जा रहे हैं। लेकिन आज तक उसका कोई फोन नहीं आया। आर्मी हेड क्वार्टर से फोन आया कि उनका बेटा शहीद हो गया है। जब बेटा सेना में जाता है तो हमें यह सोचना चाहिए कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। सिर्फ एक गोली लगने पर सब खत्म हो जाता है। वहां पर हमारा बेटा नहीं तो किसी और का बेटा हो सकता था, लेकिन हमें बहुत गर्व होता है कि मेरे बेटे ने देश को दुश्मनों से बचाया।
विज्ञापन

-------
बहन बनकर बेटे को राखी बांधती थी मां
5 अक्तूबर 1998 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन शशिकांत शर्मा की मां सुदेश शर्मा (79) ने बताया कि शशिकांत को हलवा बहुत पसंद था। वह जब भी घर आते थे तो हलवा बनाने की जिद करते थे। एक महीने पहले बेटे से आखिरी बार बेटे से बात हुई थी तो उसने कहा था कि मां ... वापस आ गया तो आपका बेटा और शहीद हो गया तो देश का बेटा बन जाऊंगा। उस समय यह बात मेरी समझ में नहीं आई, लेकिन अब मुझे लगता है कि काश हम उसे रोक लेते। वह हमें अपनी परेशानी कभी नहीं बताता था। हमेशा यही कहता था कि मां सब अच्छा है जबकि चार दिन से उसने खाना नहीं खाया होता था। कैप्टन शशि के छोटे भाई डॉ. नरेश शर्मा कहते हैं कि भइया के लिखे खत मां रोजाना पढ़ती हैं और उनकी पसंद का हलवा भी बनाती रहती हैं। उनकी हर चीज को मां ने सहेजकर रखा है। हमारी कोई बहन नहीं थी ऐसे में हमारी मां हमारी दोस्त, बहन, भाभी भी बन जाती थीं। एक बहन की तरह मां ही दोनों बेटों को राखी भी बांधा करती थीं। सुदेश शर्मा कहती हैं कि बेटा मुझे ममता दीदी कहता था क्योंकि मैं ही राखी बांधती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed