{"_id":"62a1062398b99257822535d2","slug":"9-7-crore-new-jobs-will-come-in-the-field-of-artificial-intelligence-noida-news-noi6531693159","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में 9.7 करोड़ नई नौकरियां आएंगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में 9.7 करोड़ नई नौकरियां आएंगी
विज्ञापन
कार्यक्रम में संबोधित करते इसरो के एक्स चेयरमैन डॉ के सिवान।
- फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। शोध का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही सर्वोपरि है। देश में 65 फीसदी जनता गांवों से आती है। अंतिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाने के लिए स्पेस रिसर्च तकनीक सबसे ताकतवर है। बुधवार को नॉलेज पार्क स्थित जीएल बजाज कॉलेज में आए इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाईजेशन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन और राकेट मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. के सिवान ने इंस्टीट्यूट में एनवीडिआ आर्टिफिशल इंटेलिजेंस लर्निंग एंड रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के दौरान यह बात कही।
एक हजार विद्यार्थियों से खचाखच भरे हॉल में विद्यार्थियों की तालियों की गड़गड़ाहट से खुश होकर इसरो के पूर्व चीफ ने कहा कि मुझे लगता है कि जितने मेरे प्रशंसक दक्षिण भारत में नहीं हैं, उतने प्रशंसक उत्तर भारत के युवा हैं। चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट के प्रमुख और पीएसएलवी रॉकेट प्रोजेक्ट के भी प्रमुख रहे डॉ. सिवान ने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी काम असंभव नहीं है। बस निरंतर उसे स्टेप बाई स्टेप करते रहो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी रिसर्च से योगदान कर देश की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने जीएल बजाज कॉलेज के विद्यार्थियों को इसरो के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि केवल रॉकेट बनाने पर 20 फीसदी ही कार्य होता है। जबकि सेटलाइट बनाने में केवल पांच फीसदी ही कार्य होता है। जबकि 45 फीसदी कार्य एप्लीकेशन या अन्य चीजों के लिए होता है। ऐसे में आप वर्चुअल रियलिटी, एआई, डीप लर्निंग जैसे क्षेत्र से जुड़कर इसरो से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा आने वाले समय में करीब 97 मिलियन नई नौकरियां एआई के क्षेत्र में आएंगी। उन्होंने इसरो की कार्यशैली और विक्रम साराभाई के बारे में भी बताया। कॉलेज के वाइस चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि भारत के संपूर्ण उत्तर प्रदेश में एकेटीयू के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों में जीएल बजाज सर्वर लगाने वाला पहला तथा अकेला संस्थान है। इस दौरान सीईओ कार्तिक्य अग्रवाल, निदेशक प्रोफेसर मानस कुमार मिश्रा, श्रीधर गार्गे, संजय मखीजा, डॉ. मनोज कुलश्रेष्ठ, डीआरडीओ की डॉक्टर अनिता सिंह भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री मोदी का कई बार किया जिक्र
पूर्व इसरो चीफ डॉ. सिवान ने अपने संबोधन में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में स्पेस प्रोग्राम को बढ़ावा देने और देश में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा योगदान है।
विज्ञापन
चुटकुलों से भी रिझा गए डॉ. सिवान
अपने संबोधन में पूर्व इसरो चीफ ने बताया कि देश की अधिकतर जनता इसरो और रॉकेट के बारे में जानती ही नहीं है। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी पत्नी से किसी ने पूछा कि आपके पति क्या करते हैं तो उन्होंने जब इसरो या रॉकेट के बारे में बताया तो ग्रामीणों को जानकारी ही नहीं थी। इस वाक्ये को उन्होंने मजाकिया लहजे में बताया तो सभी हंस पड़े। अपने संबोधन में वह गंभीर बातों के साथ कई बार चुटकुलों से भी गुदगुदाते रहे।
डॉक्यूमेंट्री में बने मोदी से गर्मजोशी से मिले डॉ. सिवान
कॉलेज के विद्यार्थियों ने डॉ. के सिवान पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म और नाटिका का मंचन किया था। उनके किस तरह से गरीबी के दिनों में कार्य करते हुए अपनी पढ़ाई की और किस तरह से इसरो के वैज्ञानिक बने, इसका मंचन किया। वहीं, चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गले लगाकर ढांढस बढ़ाया था। इसका भी मंचन किया। वहीं, जब स्टेज पर नटिका का मंचन करने वाली टीम डॉ. के सिवान से मिली तो नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाने वाले छात्र से डॉ. सिवान बड़ी गर्मजोशी से मिले और उनके अभिनय की तारीफ भी की।
विज्ञापन
एक हजार विद्यार्थियों से खचाखच भरे हॉल में विद्यार्थियों की तालियों की गड़गड़ाहट से खुश होकर इसरो के पूर्व चीफ ने कहा कि मुझे लगता है कि जितने मेरे प्रशंसक दक्षिण भारत में नहीं हैं, उतने प्रशंसक उत्तर भारत के युवा हैं। चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट के प्रमुख और पीएसएलवी रॉकेट प्रोजेक्ट के भी प्रमुख रहे डॉ. सिवान ने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी काम असंभव नहीं है। बस निरंतर उसे स्टेप बाई स्टेप करते रहो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी रिसर्च से योगदान कर देश की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने जीएल बजाज कॉलेज के विद्यार्थियों को इसरो के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि केवल रॉकेट बनाने पर 20 फीसदी ही कार्य होता है। जबकि सेटलाइट बनाने में केवल पांच फीसदी ही कार्य होता है। जबकि 45 फीसदी कार्य एप्लीकेशन या अन्य चीजों के लिए होता है। ऐसे में आप वर्चुअल रियलिटी, एआई, डीप लर्निंग जैसे क्षेत्र से जुड़कर इसरो से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा आने वाले समय में करीब 97 मिलियन नई नौकरियां एआई के क्षेत्र में आएंगी। उन्होंने इसरो की कार्यशैली और विक्रम साराभाई के बारे में भी बताया। कॉलेज के वाइस चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि भारत के संपूर्ण उत्तर प्रदेश में एकेटीयू के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों में जीएल बजाज सर्वर लगाने वाला पहला तथा अकेला संस्थान है। इस दौरान सीईओ कार्तिक्य अग्रवाल, निदेशक प्रोफेसर मानस कुमार मिश्रा, श्रीधर गार्गे, संजय मखीजा, डॉ. मनोज कुलश्रेष्ठ, डीआरडीओ की डॉक्टर अनिता सिंह भी मौजूद थे।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री मोदी का कई बार किया जिक्र
पूर्व इसरो चीफ डॉ. सिवान ने अपने संबोधन में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में स्पेस प्रोग्राम को बढ़ावा देने और देश में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा योगदान है।
विज्ञापन
चुटकुलों से भी रिझा गए डॉ. सिवान
अपने संबोधन में पूर्व इसरो चीफ ने बताया कि देश की अधिकतर जनता इसरो और रॉकेट के बारे में जानती ही नहीं है। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी पत्नी से किसी ने पूछा कि आपके पति क्या करते हैं तो उन्होंने जब इसरो या रॉकेट के बारे में बताया तो ग्रामीणों को जानकारी ही नहीं थी। इस वाक्ये को उन्होंने मजाकिया लहजे में बताया तो सभी हंस पड़े। अपने संबोधन में वह गंभीर बातों के साथ कई बार चुटकुलों से भी गुदगुदाते रहे।
डॉक्यूमेंट्री में बने मोदी से गर्मजोशी से मिले डॉ. सिवान
कॉलेज के विद्यार्थियों ने डॉ. के सिवान पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म और नाटिका का मंचन किया था। उनके किस तरह से गरीबी के दिनों में कार्य करते हुए अपनी पढ़ाई की और किस तरह से इसरो के वैज्ञानिक बने, इसका मंचन किया। वहीं, चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गले लगाकर ढांढस बढ़ाया था। इसका भी मंचन किया। वहीं, जब स्टेज पर नटिका का मंचन करने वाली टीम डॉ. के सिवान से मिली तो नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाने वाले छात्र से डॉ. सिवान बड़ी गर्मजोशी से मिले और उनके अभिनय की तारीफ भी की।