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हादसों का एक्सप्रेस वे: यमुना एक्सप्रेस वे पर 12 साल में 7266 हादसे, 1237 कई गई जान; ढाबे हैं एक्सिडेंट का सबब

Thu, 04 Jul 2024 08:23 PM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 04 Jul 2024 08:23 PM IST
सार

एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 निर्धारित की गई है। ज्यादातर वाहन चालक तय गति सीमा से अधिक गति पर वाहनों को दौड़ाते हैं। कभी-कभी तेज रफ्तार वाहन चालक अपने वाहन को नियंत्रित नहीं कर पाते और आगे चल रहे वाहनों से टकरा जाते हैं जिससे हादसा होता है।

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7266 accidents on Yamuna Expressway in 12 years 1237 lives lost
यमुना एक्सप्रेस वे - फोटो : iStock

विस्तार

आगरा से ग्रेटर नोएडा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस वे पर 2012 में अपनी शुरूआत से लेकर अब तक 12 वर्षों में 7266 हादसे हो चुके हैं। इनमें 10530 लोग घायल हुए हैं। इन हादसों में करीब 1237 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसको देखते हुए यमुना एक्सप्रेस वे को हादसे का एक्सप्रेस वे भी कहा जाने लगा है।

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एक्सप्रेस वे पर गुरुवार को हुई ताजा दुर्घटना ईंटों से लदी ट्रैक्टर ट्रॉली की वजह से हुई। यहां पर ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली हादसे की बड़ी वजह बनती हैं। एनसीआर में ईंट भट्ठों पर लगी पाबंदी के चलते मथुरा, अलीगढ़ से ट्रैक्टर ट्राली ईंटें लादकर यहां लाई जाती हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार मांग की है कि राया तक एक ओर की सर्विस लेन को ही तैयार करा दिया जाए तो ट्रैक्टर ट्रॉली की एक्सप्रेस वे पर चढ़ने की जरूरत ही नहीं रहेगी।

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प्रतिबंधित समय में चल रहा था ट्रैक्टर
एक्सप्रेस वे पर केवल पंजीकृत ट्रैक्टर ट्रॉली ही स्वीकृत हैं। शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक इनका एक्सप्रेस वे पर प्रवेश प्रतिबंधित है। गुरुवार को हुई घटना सुबह पांच बजे की है। प्रतिबंधित समय में ट्रैक्टर ट्रॉली का दौड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

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ढाबे पर रुकने वाले वाहन भी बनते हैं हादसों का सबब
एक्सप्रेस वे के किनारे अवैध ढाबों पर रुकने वाले वाहन भी बनते हैं, हादसों का सबब बनते हैं। भारी वाहन चालक एक्सप्रेसवे किनारे बने इन ढाबों पर वाहनों को लाइट देखते ही रोकने के लिए साइड में लाना शुरू कर देते हैं। ट्रक चालकों को मानना है कि एक्सप्रेसवे प्रशासन द्वारा एक्सप्रेसवे पर बनाई गई जन सुविधाओं पर खुले हुए होटल, ढ़ाबों व रेस्टोरेंटों में खाने पीने की चीजें महंगी हैं। जिसकी वजह से भारी वाहन चालक इन ढाबों पर रुकते हैं। इस वजह से पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहन चालक बड़े वाहनों से टकरा जाते हैं।

ओवर स्पीड वाहन अचानक नहीं हो पाते नियंत्रित
एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 निर्धारित की गई है। ज्यादातर वाहन चालक तय गति सीमा से अधिक गति पर वाहनों को दौड़ाते हैं। कभी-कभी तेज रफ्तार वाहन चालक अपने वाहन को नियंत्रित नहीं कर पाते और आगे चल रहे वाहनों से टकरा जाते हैं जिससे हादसा होता है।

वर्ष 2012 से 2023 तक के यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों के आंकड़े
नींद की वजह से- 3210 हादसे 488 मौत 3885 घायल
ओवरस्पीड की वजह से - 1302 हादसे 197 मौत 1861 घायल
टायर फटने की वजह से- 760 हादसे 90 मौत 1219 घायल
शराब पीकर- 263 हादसे 87 मौत 371 घायल
लापरवाही की वजह से - 1164 हादसे 263 मौत 2373 घायल हुए
 

ताजा हादसे में चालक नशे में था। एक्सप्रेस वे पर वाहन चलाते समय नशा न करें। गति सीमा नियंत्रण रखें और सावधानी बरतें तो हादसों से बचा जा सकता है। जहां तक ट्रैक्टर ट्रॉली का सवाल है तो इसे प्राधिकरण को देखना है। - अशोक कुमार, एडीपीसी, ग्रेटर नोएडा।

ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराकर बीस फीट नीचे गिरी बस, 15 घायल

यमुना एक्सप्रेसवे पर बृहस्पतिवार तड़के स्लीपर बस आगे जा रही ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। ओवरटेक करते समय हुए हादसे के बाद असंतुलित बस एक्सप्रेसवे से करीब 20 फीट नीचे गिर गई। हादसे में बस सवार 13 यात्री और ट्रैक्टर-ट्राॅली के चालक व परिचालक घायल हो गए। सभी घायलों को जिम्स में भर्ती कराया गया। बस यात्रियों का दावा है कि चालक नशे में था। उन्होंने कहा कि नशे में चालक को झपकी आने से हादसा हुआ। पुलिस के मुताबिक मध्य प्रदेश के मुरैना से 50 सवारियों को लेकर स्लीपर बस दिल्ली जा रही थी। सुबह करीब 5 बजे यमुना एक्सप्रेसवे के दनकौर क्षेत्र में ओवरटेक करते समय बस आगे जा रही ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर लगते ही ट्रैक्टर-ट्रॉली मौके पर ही पलट गई। ट्रैक्टर का ड्राइवर आशु और हेल्पर नीचे दब गए। वहीं बस असंतुलित होकर यमुना एक्सप्रेसवे से करीब 20 फीट नीचे गिर गई।

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