स्कूलों को 48 घंटे में अपडेट करनी होगी फीस की जानकारी
नोएडा जिले के सभी स्कूलों को 15 जुलाई तक अपनी वेबसाइट पर वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक की फीस की लिस्ट अपडेट करने को कहा गया है। निर्धारित समय तक अपडेट नहीं करने पर स्कूल की मान्यता तक रद्द हो सकती है।
शुक्रवार को पंचशील बालक इंटर कॉलेज में अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में जिले के करीब 123 स्कूलाें के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में यह निर्देश दिए गए। इस दौरान स्कूल की तरफ से भी कई मुद्दे उठाए गए।
संजय अग्रवाल ने कहा कि नया अध्यादेश 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष से अधिक फीस वाले स्कूलों पर लागू होता है। इसके तहत वर्ष 2015 की फीस को बेस मानकर स्कूल फीस लेंगे। लेकिन अभिभावकों ने मुद्दा उठाया था कि स्कूल वर्ष 2016 या 2017 की फीस को भी वर्ष 2015 की फीस बता सकते हैं। इसलिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि 15 जुलाई तक 2015 से लेकर अब तक प्रत्येक वर्ष की फीस को स्कूल की वेबसाइट पर अपडेट करें।
उसके आधार पर स्कूल की नए सत्र की फीस तय होगी। 2015 -2016 की फीस में कंज्यूमर प्राइज डंडेक्स और इसमें 5 प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही शिक्षकों के वेतन से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। करीब 60 प्रतिशत स्कूलों ने वेबसाइट पर अपडेट कर दिया है। अगर स्कूल अपडेट नहीं करेंगे तो पहले नोटिस दिया जाएगा। जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर तीसरी बार तक अपडेट नहीं करेंगे तो सीधे मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
इस मीटिंग में एपीजे, कैंब्रिज, डीपीएस, बाल भारती, नोएडा पब्लिक स्कूल समेत सभी स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया कि कोई स्कूल एक साथ एक साल की फीस नहीं ले सकता। शिक्षकों का वेतन और कितने प्रतिशत वेतन बढ़ाया गया है, उसकी जानकारी देनी होगी। स्कूल किसी भी टीचर को कैश में वेतन नहीं दे सकता है।
अभिभावकों को मिला विकल्प
नए अध्यादेश में अभिभावकों को विकल्प दिया गया है। अगर किसी बच्चे को स्पोर्ट्स, कंप्यूटर या अन्य सुविधा नहीं लेनी हैं तो वो उसको फीस नहीं देगा। स्कूल किसी को बाध्य नहीं कर सकता है। पहले कई स्कूलों ने अनिवार्य रूप से किया हुआ था।
अभिभावकों ने उठाए मुद्दे
ऑल नोएडा पैरंट एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने मीटिंग में कहा कि नए अध्यादेश लागू होने के बाद भी स्कूलों की तरफ से मनमानी जारी है। स्कूल ने इलेक्ट्रिसिटी, स्वीमिंग के नाम अभी भी जेब काट रहे हैं। इसके साथ ही पैरंट टीचर एसोसिएशन में अब भी वो अभिभावकों शामिल हैं जिनके बच्चे स्कूल से पढ़कर जा चुके हैं। इसमें नए पैरंट को शामिल करना चाहिए। हालांकि इस पर स्कूलों की प्रिंसिपल से साफ इनकार कर दिया कि ये सीबीएसई के नियमों में नहीं है।
अध्यादेश में होंगे कई बदलाव
- फीस रेग्युलेटरी कमेटी का अध्यक्ष जिलाधिकारी को बनाने के लिए संशोधन होगा। अब तक इस कमेटी का अध्यक्ष कमिश्नर होता है। इस वजह से अभिभावक सीधे शिकायत लेकर नहीं जा पाते हैं।
- अभी इसमें पैरंट टीचर एसोसिएशन को विस्तार में बताया जाएगा।
- डे- बोर्डिंग स्कूलों में मिलने वाले फूड की विस्तार में जानकारी दी जाएगी।
- अगर कोई स्कूल बच्चों की पढ़ाई का बोर्ड बदलना चाहता है वो अभिभावकों पर फीस का बोझ नहीं डाल सकता है। चाहे तो स्कूल नए दाखिले लेने वाले बच्चों से फीस अलग ले सकता है।
- सिक्योरिटी फीस डिपोजिट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट होगी।