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Noida News: जिम्स में 50 बेड रिर्जव, अस्थमा और सीओपीडी के रोगी बरतें सावधानी
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- डायबिटीज और बीपी के मरीज खानपान व दवाइयों का रखें ध्यान
- पटाखों के धुएं से सांस के रोगियों को खतरा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दिवाली के दौरान मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में 50 बेड आरक्षित किए गए हैं। त्योहार पर 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। डॉक्टरों ने डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि त्योहार के दौरान मरीज अपनी दवाइयां और नियमित दिनचर्या जारी रखें। डायबिटीज और बीपी के मरीज मिठाइयों, तली-भुनी चीजों और नमकीन का सीमित सेवन करें। समय पर भोजन करें और नियमित रूप से ब्लड शुगर व बीपी की जांच कराते रहें।
जिम्स के प्रोफेसर एवं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुलदीप गुप्ता ने कहा कि पटाखे जलाते समय आंखों को सुरक्षित दूरी पर रखें। धुआं या कण जाने पर आंखें रगड़ने के बजाय साफ पानी से धोएं। तेज जलन या धुंधला दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं।
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सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि शुगर-फ्री मिठाइयों का भी सीमित सेवन करना चाहिए। तली-भुनी चीजों, नमकीन और मीठे पेय पदार्थों से परहेज करना बेहतर है।
वहीं, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रश्मि उपाध्याय ने कहा कि पटाखों का धुआं अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकता है। इससे खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मरीज आतिशबाजी और धुएं से दूर रहें।
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- पटाखों के धुएं से सांस के रोगियों को खतरा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दिवाली के दौरान मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में 50 बेड आरक्षित किए गए हैं। त्योहार पर 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। डॉक्टरों ने डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि त्योहार के दौरान मरीज अपनी दवाइयां और नियमित दिनचर्या जारी रखें। डायबिटीज और बीपी के मरीज मिठाइयों, तली-भुनी चीजों और नमकीन का सीमित सेवन करें। समय पर भोजन करें और नियमित रूप से ब्लड शुगर व बीपी की जांच कराते रहें।
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जिम्स के प्रोफेसर एवं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुलदीप गुप्ता ने कहा कि पटाखे जलाते समय आंखों को सुरक्षित दूरी पर रखें। धुआं या कण जाने पर आंखें रगड़ने के बजाय साफ पानी से धोएं। तेज जलन या धुंधला दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं।
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सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि शुगर-फ्री मिठाइयों का भी सीमित सेवन करना चाहिए। तली-भुनी चीजों, नमकीन और मीठे पेय पदार्थों से परहेज करना बेहतर है।
वहीं, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रश्मि उपाध्याय ने कहा कि पटाखों का धुआं अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकता है। इससे खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मरीज आतिशबाजी और धुएं से दूर रहें।