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Noida News: फिर जीवंत होगा 400 साल पुराना निजामुद्दीन स्थित बारापुला ब्रिज

Sun, 11 Aug 2024 09:29 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2024 09:29 PM IST
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400 year old Barapula Bridge in Nizamuddin will come alive again
उपराज्यपाल के आदेश के बाद अतिक्रमण व कचरे को हटाया, तीन माह में होगा जीर्णोद्धार
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अतिक्रमण के कारण मलबे और कचरे का डंप यार्ड बन चुका 400 साल पुराना निजामुद्दीन स्थित बारापुला ब्रिज फिर से जीवंत होगा। उपराज्यपाल ने 200 मीटर लंबे ब्रिज के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को कार्य सौंपकर तीन माह में आवाजाही सुगम करने के आदेश दिए हैं।
रविवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण करने निजामुद्दीन क्षेत्र में पहुंचे। इससे पहले 4 अगस्त को उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया तो उन्हें अतिक्रमण का पता चला। आसपास के लोग यहां मलबा व कचरा भी डाल रहे थे। इससे यहां आवाजाही पूरी तरह से ठप थी। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के साथ ही व्यवस्था सुधारने का आदेश दिया था। इसमें स्थानीय आबादी की भी मदद ली गई। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, रेलवे और एएसआई के संयुक्त प्रयास से अतिक्रमण हटाने, पुल के नीचे बहने वाले नाले की सफाई और जाम को दूर करने के लिए काम किया गया। एजेंसियों के ठोस प्रयासों से एक सप्ताह के भीतर पुल से अतिक्रमण हटा दिया गया है। फिलहाल, नाले की सफाई का काम चल रहा है। सफाई का काम पूरा होने के तुरंत बाद एएसआई जीर्णोद्धार का काम शुरू कर देगा।
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200 मीटर लंबा है पुल
पुल 200 मीटर लंबा है। इसे करीब 1628 में मीनार बानू आगा ने बनवाया था। इसका नाम 12 खंभों और 11 मेहराबों के कारण बारापुला रखा गया था। इतिहासकारों के अनुसार, पुल और हुमायूं के मकबरे के बीच की सड़क पेड़ों से घिरी चौड़ी पगडंडी थी। इसे दिल्ली के सबसे खूबसूरत पुलों में से एक माना जाता था। मुगलों ने आगरा से लौटते समय निजामुद्दीन दरगाह और हुमायूं के मकबरे तक पहुंचने के लिए यमुना को पार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया था।
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पर्यटन स्थल के तौर पर होगा विकसित
एएसआई महानिदेशक ने दौरे के दौरान एलजी को आश्वासन दिया कि तीन माह में जीर्णोद्धार कार्य के दौरान यहां विशेष लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। विकास कार्य के दौरान संरचना की मौलिकता को प्रभावित नहीं किया जाएगा।

इनका भी हुआ विकास
एलजी के आदेश पर दिल्ली में विरासत संरचनाओं का संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे पहले एलजी के निर्देश पर सेंट जेम्स चर्च और महरौली पुरातत्व पार्क को पुनर्जीवित किया गया था। इसके अलावा रोशन आरा बाग, शालीमार बाग, अनंग ताल बावली, रजों की बावली, किला राय पिथौरा, जमाली कमाली मस्जिद परिसर, दिल्ली चलो पार्क, घाटा मस्जिद और उर्दू अकादमी पार्क और कई अन्य स्मारकों का जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।

हाईटेक मशीनों से हो रही सफाई
हाईटेक मशीनों की मदद से सुनेहरी, कुशक और बारापुला नालों से गाद निकालने का काम चल रहा है। रविवार को एलजी ने नालों की सफाई की समीक्षा की। इससे पहले 4 अगस्त को उन्होंने 15 अगस्त तक नालों की सफाई का आदेश दिया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने बताया कि गाद निकालने का काम तेजी से चल रहा है। 100 से अधिक कर्मचारी हाईटेक मशीनों से 24 घंटे युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। सभी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि मानसून के बाद भी नालों की सफाई और गाद निकालने का काम जारी रहे। नालों के ओवर फ्लो होने और परिणामस्वरूप होने वाले जलभराव की समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।
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