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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   31 deeds of adoption registered at Noida registry department in six months

छह महीने, 31 नई कहानियां: मई में सबसे ज्यादा 10 गोदनामा, बच्चों को मिला परिवार तो घरों को मिला अपनापन

Tue, 29 Sep 2026 10:12 PM IST
Rahul Kumar Tiwari ऋषभ कौशल, नोएडा
ऋषभ कौशल, नोएडा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Tue, 29 Sep 2026 10:12 PM IST
सार

नोएडा के सेक्टर-33ए रजिस्ट्री कार्यालय में छह महीने में 31 गोदनामा दर्ज हुए। मई में सबसे अधिक 10 और सितंबर में सबसे कम दो मामले रहे। इन दस्तावेजों के जरिए बच्चों को परिवार और माता-पिता को नया रिश्ता मिला।

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31 deeds of adoption registered at Noida registry department in six months
छह महीने में 31 गोदनामा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां-बाप और बच्चों का रिश्ता हमेशा से अनमोल रहा है। जिन बच्चों ने कभी माता-पिता का स्नेह और सहारा नहीं पाया, उन्हें अब परिवार का अपनापन मिल सकेगा। अब पिता की उंगली थामकर आगे बढ़ेंगे और मां की ममता, प्यार व दुलार पाएंगे। वहीं, पति-पत्नी को भी माता-पिता बनने का सुख और जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा।
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नोएडा सेक्टर 33ए स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों के बीच कुछ कागज ऐसे भी दर्ज हुए हैं, जिनके साथ किसी परिवार की पूरी दुनिया बदल गई। अप्रैल से सितंबर के बीच छह महीनों में 31 गोदनामा दर्ज हुए। किसी बच्चे को नया परिवार मिला तो किसी परिवार के जीवन में बच्चे के आने से घर पूरा हुआ। कागज पर दर्ज ये दस्तावेज महज कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि नए रिश्ते और नई शुरुआत की कहानी भी हैं। रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में छह, मई में सबसे अधिक 10, जून में तीन, जुलाई में सात, अगस्त में तीन और सितंबर में दो गोदनामा दर्ज हुए। 
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यानी इन छह महीनों में कुल 31 गोदनामा दर्ज किए गए। मई में गोदनामा की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि सितंबर में सबसे कम दो मामले दर्ज हुए। रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड में ये मामले भले ही अलग-अलग तारीखों और दस्तावेज संख्या के रूप में दर्ज हों, लेकिन हर गोदनामा अपने पीछे एक अलग पारिवारिक कहानी रखता है। कहीं परिवार ने बच्चे को अपना नाम और घर देने का फैसला लिया, तो कहीं बच्चे के आने से परिवार में एक नया रिश्ता जुड़ा।

किसी को मिला परिवार, किसी को मिला अपनापन
गोदनामा की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे और नए परिवार के बीच रिश्ते को कानूनी आधार मिलता है। परिवार के लिए यह सिर्फ दस्तावेज दर्ज कराने का काम नहीं, बल्कि बच्चे की जिम्मेदारी और उसके भविष्य को अपनाने का फैसला होता है। वहीं बच्चे के लिए यह नए घर, नए रिश्तों और नए सहारे की शुरुआत हो सकती है।
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किसी ने परिवार से लिया गोद, तो किसी ने एनजीओ से
बता दें, अब तक लिए गए गोद के मामले में किसी ने परिवार में ही चाचा के बच्चे या बच्ची को गोद लिया। अधिकतर मामलों में ऐसा ही हुआ, अन्य मामलों में एनजीओ के माध्यम से गोद लिया गया।

गोदनामा के लिए आगे आएं, सिर्फ 200 रुपये में होगा पंजीकरण
रजिस्ट्री विभाग के अनुसार, गोदनामा के पंजीकरण के लिए स्टांप शुल्क 100 और पंजीकरण का शुल्क 100 रुपये रहता है। ऐसे में प्रक्रिया और शुल्क दोनों ही कम रखे गए हैं, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा गोद ले सकें।
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छह महीने में ऐसे बढ़े मामले

महीना गोदनामा राजस्व (रुपये)
अप्रैल 06 3380
मई 10 6600
जून 03 1940
जुलाई 07 4600
अगस्त 03 1980
सितंबर 02 1320
कुल 31 19820

बच्चों को गोद लेने वाले माता पिता को रजिस्ट्री विभाग में गोदनामा दर्ज कराना होता है, ताकि उनके दस्तावेज मजबूत रहें और वह अपनी बात से न मुकर सकें। -अरूण कुमार शर्मा, एआईजी प्रथम, उप निबंधक कार्यालय, गौतमबुद्ध नगर

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