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प्ी मैच्योर
Updated Sun, 18 Nov 2018 01:19 AM IST
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‘समय से पहले जन्म बच्चों के लिए खतरा’
अस्पतालों में मनाया विश्व प्री मैच्योरिटी डे, विशेषज्ञों ने रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। हर साल की तरह इस बार भी अस्पतालों में शनिवार को विश्व प्री मैच्योरिटी डे (समय से पहले बच्चे का जन्म) मनाया गया। प्रतीक्षा अस्पताल की डॉ. रागिनी अग्रवाल ने बताया कि गर्भावस्था के 9 महीने पूरे होने से पहले बच्चे का जन्म समाज और माता-पिता पर एक बड़ा सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक बोझ माना जाता है। जन्म के बाद कुछ शिशुओं को गहन देखभाल के लिए इंटेसिव केयर यूनिट में रखा जाता है। जिसकी वजह से माता-पिता काफी तनाव में रहते हैं। नवजात के जन्म के बाद अस्वस्थ रहने और किसी शारीरिक गड़बड़ी का सबसे बड़ा कारण समय से पहले जन्म होता है। अगर कोई महिला बच्चे को 37 हफ्तों से पहले जन्म देती है तो इसे समय से पहले कहा जाता है। समय से पहले लेबर पेन इसकी पहचान है। आमतौर पर जन्म के समय 2500 ग्राम (करीब 51/2 पाउंड) या उससे कम वजन ही प्री मैच्योरिटी कहलाता है। ृ
समय से पहले जन्म के खतरे :
मौत, नवजात शिशुओं के दिमाग के एक हिस्से में ब्लीडिंग, सांस लेने में परेशानी
नेक्रोटाइजिंग, एंट्रोकोलाइटिस, पीलिया आदि बीमारियां
संक्रमण, कम दिखना या दृष्टिहीनता का शिकार होना (रेटिनोपैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी)
हाइपोथर्मिया, हाइपोग्लाईसेमिया
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अस्पतालों में मनाया विश्व प्री मैच्योरिटी डे, विशेषज्ञों ने रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। हर साल की तरह इस बार भी अस्पतालों में शनिवार को विश्व प्री मैच्योरिटी डे (समय से पहले बच्चे का जन्म) मनाया गया। प्रतीक्षा अस्पताल की डॉ. रागिनी अग्रवाल ने बताया कि गर्भावस्था के 9 महीने पूरे होने से पहले बच्चे का जन्म समाज और माता-पिता पर एक बड़ा सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक बोझ माना जाता है। जन्म के बाद कुछ शिशुओं को गहन देखभाल के लिए इंटेसिव केयर यूनिट में रखा जाता है। जिसकी वजह से माता-पिता काफी तनाव में रहते हैं। नवजात के जन्म के बाद अस्वस्थ रहने और किसी शारीरिक गड़बड़ी का सबसे बड़ा कारण समय से पहले जन्म होता है। अगर कोई महिला बच्चे को 37 हफ्तों से पहले जन्म देती है तो इसे समय से पहले कहा जाता है। समय से पहले लेबर पेन इसकी पहचान है। आमतौर पर जन्म के समय 2500 ग्राम (करीब 51/2 पाउंड) या उससे कम वजन ही प्री मैच्योरिटी कहलाता है। ृ
समय से पहले जन्म के खतरे :
मौत, नवजात शिशुओं के दिमाग के एक हिस्से में ब्लीडिंग, सांस लेने में परेशानी
नेक्रोटाइजिंग, एंट्रोकोलाइटिस, पीलिया आदि बीमारियां
संक्रमण, कम दिखना या दृष्टिहीनता का शिकार होना (रेटिनोपैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी)
हाइपोथर्मिया, हाइपोग्लाईसेमिया