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कॉल सेंटर कर्मी की हत्या के दो आरोपी बरी
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ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सेशन जज-4 ने नोएडा में महिला कॉल सेंटरकर्मी की हत्या के दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष और पुलिस आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। एक आरोपी सेंटरकर्मी का जीजा है।
36 वर्षीय कॉल सेंटर कर्मी वंदना महेश्वरी पति से अलग नोएडा सेक्टर-55 स्थित पीजी में रह रही थी। 16 जून, 2018 को वंदना का शव मथुरा में मिला था। वंदना के जीजा अमित और उसके ड्राइवर संजय के खिलाफ नोएडा सेक्टर-58 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जुलाई, 2018 में नोएडा पुलिस ने मामले में अमित व संजय को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वंदना से पीछा छुड़ाने व उससे उधार लिए साढ़े चार लाख रुपये हड़पने के लिए हत्या की थी। पुलिस ने जांच कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट में 20 लोगों ने गवाही दी। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने हत्या के कारण में शामिल उधार दिए पैसों के बारे में विवेचना नहीं की। परिवार को पता था कि वंदना अमित के साथ जाने वाली थी, लेकिन गुमशुदगी की तहरीर में यह बात नहीं लिखी। पीजी के केयरटेकर ने वंदना को अंतिम बार जाते हुए देखा था, लेकिन केस डायरी में इस बात को शामिल नहीं किया गया। वंदना और अमित के जीआईपी मॉल में घूमने की सीसीटीवी फुटेज और जेवर व मथुरा टोल की फुटेज की मान्य प्राधिकरण से धारा 65 बी का सर्टिफिकेट नहीं लिया गया। कोर्ट में फुटेज की सीडी नहीं चली। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने अमित पल्तानी और संजय कुमार को अपहरण व हत्या के आरोप से बरी कर दिया। संजय जमानत पर है। कोर्ट ने जेल में बंद अमित को रिहा करने का आदेश दिया है।
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36 वर्षीय कॉल सेंटर कर्मी वंदना महेश्वरी पति से अलग नोएडा सेक्टर-55 स्थित पीजी में रह रही थी। 16 जून, 2018 को वंदना का शव मथुरा में मिला था। वंदना के जीजा अमित और उसके ड्राइवर संजय के खिलाफ नोएडा सेक्टर-58 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जुलाई, 2018 में नोएडा पुलिस ने मामले में अमित व संजय को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वंदना से पीछा छुड़ाने व उससे उधार लिए साढ़े चार लाख रुपये हड़पने के लिए हत्या की थी। पुलिस ने जांच कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट में 20 लोगों ने गवाही दी। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने हत्या के कारण में शामिल उधार दिए पैसों के बारे में विवेचना नहीं की। परिवार को पता था कि वंदना अमित के साथ जाने वाली थी, लेकिन गुमशुदगी की तहरीर में यह बात नहीं लिखी। पीजी के केयरटेकर ने वंदना को अंतिम बार जाते हुए देखा था, लेकिन केस डायरी में इस बात को शामिल नहीं किया गया। वंदना और अमित के जीआईपी मॉल में घूमने की सीसीटीवी फुटेज और जेवर व मथुरा टोल की फुटेज की मान्य प्राधिकरण से धारा 65 बी का सर्टिफिकेट नहीं लिया गया। कोर्ट में फुटेज की सीडी नहीं चली। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने अमित पल्तानी और संजय कुमार को अपहरण व हत्या के आरोप से बरी कर दिया। संजय जमानत पर है। कोर्ट ने जेल में बंद अमित को रिहा करने का आदेश दिया है।
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