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Noida News: जिंदगी खो कर चार लोगों नया जीवन दे गया 18 वर्षीय युवक
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-दुर्घटना में हो गए थे गंभीर रूप से घायल, इलाज के दौरान तोड़ा दम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जिंदगी खो कर भी 18 साल का युवक चार लोगों को नई जिंदगी दे गया। इंग्लिश ऑनर्स में बीए की पढ़ाई कर रहा युवक एक दुर्घटना में घायल हो गया था। इलाज के दौरान उसने आकाश अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद उसके माता-पिता ने उसके अंगों को दान करने का निर्णय लिया, ताकि उनके बेटे की विरासत दूसरों की जान बचाकर जीवित रहे।
न्यूरो और स्पाइन सर्जरी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नागेश चंद्रा ने बताया कि दुर्घटना के बाद डॉक्टरों की टीम ने युवक को बचाने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन, दुर्घटना में लगी चोटों के कारण लड़के की दुखद मृत्यु हो गई। उनकी मौत के बाद नोटो के नियम के तहत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से बीमार रोगियों को युवक के अंग आवंटित किए गए। उनका दिल को निजी अस्पताल में भर्ती रोगी को मिला। जबकि युवक के फेफड़ों को मेदांता के मरीजों में ट्रांसप्लांट किया गया। निजी अस्पताल वैशाली और आकाश में एक अन्य रोगी को किडनी दी गई। जबकि किसी दूसरे मरीज को उनका नया लिवर भी मिला। इसके अलावा युवक के कॉर्निया को निजी आंखों के अस्पताल को दान कर दिया गया। जबकि दुर्भाग्य से उनके पैंक्रियाज और इंटेस्टाइन को कोई प्राप्तकर्ता नहीं मिला। डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि परिवार ने इस दुख की खड़ी में भी दूसरे की जिंदगी बचाने का फैसला लिया। ये दूसरों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जिंदगी खो कर भी 18 साल का युवक चार लोगों को नई जिंदगी दे गया। इंग्लिश ऑनर्स में बीए की पढ़ाई कर रहा युवक एक दुर्घटना में घायल हो गया था। इलाज के दौरान उसने आकाश अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद उसके माता-पिता ने उसके अंगों को दान करने का निर्णय लिया, ताकि उनके बेटे की विरासत दूसरों की जान बचाकर जीवित रहे।
न्यूरो और स्पाइन सर्जरी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नागेश चंद्रा ने बताया कि दुर्घटना के बाद डॉक्टरों की टीम ने युवक को बचाने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन, दुर्घटना में लगी चोटों के कारण लड़के की दुखद मृत्यु हो गई। उनकी मौत के बाद नोटो के नियम के तहत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से बीमार रोगियों को युवक के अंग आवंटित किए गए। उनका दिल को निजी अस्पताल में भर्ती रोगी को मिला। जबकि युवक के फेफड़ों को मेदांता के मरीजों में ट्रांसप्लांट किया गया। निजी अस्पताल वैशाली और आकाश में एक अन्य रोगी को किडनी दी गई। जबकि किसी दूसरे मरीज को उनका नया लिवर भी मिला। इसके अलावा युवक के कॉर्निया को निजी आंखों के अस्पताल को दान कर दिया गया। जबकि दुर्भाग्य से उनके पैंक्रियाज और इंटेस्टाइन को कोई प्राप्तकर्ता नहीं मिला। डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि परिवार ने इस दुख की खड़ी में भी दूसरे की जिंदगी बचाने का फैसला लिया। ये दूसरों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
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