फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   न घूस मांगी और न ही प्राप्त की, इसलिये नहीं बनता भ्रष्टाचार का मामला

न घूस मांगी और न ही प्राप्त की, इसलिये नहीं बनता भ्रष्टाचार का मामला

Sat, 15 Dec 2018 06:35 AM IST
Updated Sat, 15 Dec 2018 06:35 AM IST
विज्ञापन
न घूस मांगी और न ही प्राप्त की, इसलिये नहीं बनता भ्रष्टाचार का मामला
सीबीआई बनाम सीबीआई:
विज्ञापन

न घूस मांगी और न ली, इसलिए नहीं
बनता भ्रष्टाचार का मामला: अस्थाना
- विशेष निदेशक अस्थाना के वकील ने हाईकोर्ट में पेश की दलील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सीबीआई के विशेष निदेशक ने न कभी घूस मांगी और न कभी उन्होंने घूस स्वीकार की। इसलिए उन पर भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं बनता। यह एफआईआर पूरी तरह बदनियती से की गई है। यह दलील शुक्रवार को राकेश अस्थाना के वकीलों ने हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर जिरह करते हुए दी। वहीं, आलोक वर्मा के वकील ने कहा कि अस्थाना पर एफआईआर करने के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। इसलिए एफआईआर के पीछे बदनियती होने का आरोप पूरी तरह गलत है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी के समक्ष राकेश अस्थाना के वकील अमरेंद्र शरण ने कहा कि जब रिश्वत मांगी ही नहीं गई तो भ्रष्टाचार का मामला कैसे बन गया। वहीं, मुकदमा दर्ज करने के लिए अनिवार्य सरकारी अनुमति नहीं ली गई। दूसरी ओर से जिस शख्स सतीश बाबू सना ने मोइन कुरैशी को दो करोड़ रुपये घूस देने की बात जांच अधिकारी व कोर्ट के समक्ष स्वीकार की, उस पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने कहा सीबीआई ने अस्थाना पर 15 अक्तूबर 2018 की रात 8 बजे एफआईआर दर्ज की थी, जबकि उसी दिन केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई को पत्र लिखकर किसी भी सीबीआई अधिकारी पर सरकारी अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज न करने का निर्देश दिया था। एफआईआर करने से पहले प्रारंभिक जांच की जाती है, वह भी नहीं की गई।
विज्ञापन

याची की दलीलों का जवाब देने के लिए एएसजी गौतम बनर्जी ने समय मांगा। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह कानूनी प्रावधान की बात है, इसका जवाब देने के लिए समय क्यों चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

सीबीआई की ओर से अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं है। इसके अलावा सीबीआई मैन्युअल में कहीं भी प्रारंभिक जांच (पीई) करना अनिवार्य नहीं है। इसके बिना भी एफआईआर की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट भी अपने एक निर्णय में कह चुका है कि भ्रष्टाचार के मामलों में मैन्युअल को नहीं, बल्कि अधिनियम को प्राथमिकता दी जाएगी।
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने कहा अस्थाना पर एफआईआर करने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं थी। अस्थाना व अन्य आरोपी अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे थे बल्कि उगाही कर रहे थे और उन्होंने बयान में फेरबदल करवाया। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए एफआईआर करने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं थी।

दूसरी ओर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना की ओर से जिरह के लिए आए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह केस में कई अहम साक्ष्य सामने लाना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा वह उनकी दलीलें अगली तारीख पर सुनेगी। केस की अगली सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तारीख तय की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed