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हाईकोर्ट ने ऑक्सीटोसिन के निर्माण लगी रोक हटाई
Updated Sat, 15 Dec 2018 06:31 AM IST
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हाईकोर्ट ने ऑक्सीटोसिन के निर्माण पर लगी रोक हटाई
- केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को किया रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने ऑक्सीटोसिन दवा के मामले में केंद्र सरकार की अधिसूचना को शुक्रवार को रद्द कर दिया। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर निजी कंपनियों के दवा बनाने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने इस दवा को बनाने की अनुमति केवल एक सरकारी कंपनी को दी थी।
न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट व न्यायमूर्ति एके चावला ने अपने फैसले में कहा कि यह अधिसूचना पूरी तरह गलत व मनमानी थी। इस बात का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि इस दवा का इस्तेमाल डेयरी सेक्टर में पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने निजी दवा कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 31 अगस्त को इस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। इसके बाद यह रोक आगे बढ़ती रही। याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने इस अधिसूचना को शुक्रवार को रद्द कर दिया। केंद्र सरकार ने 27 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर यह दवा बनाने की अनुमति केवल सरकारी कंपनी कर्नाटका एंटीबायोटिक्स एंड फार्मस्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) को दी गई थी। इस कंपनी को देश भर की दवा की जरूरत पूरी करने की जिम्मेदारी थी।
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क्या है ऑक्सीटोसिन
ऑक्सीटोसिन नामक रसायन प्रसूति, स्तनपान व सामाजिक मेलजोल के दौरान पिच्यूटरी ग्रंथि से स्रावित होता है। इसलिए इसे लव हार्मोन भी कहा जाता है। यह दवा मुख्य रूप से प्रसूति के बाद महिलाओं में रक्तस्राव रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसे जीवन रक्षक श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना था कि इस दवा का इस्तेमाल डेयरी सेक्टर में पशुओं की दूध क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे पशुओं व मनुष्यों की सेहत खराब हो रही है।
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- केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को किया रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने ऑक्सीटोसिन दवा के मामले में केंद्र सरकार की अधिसूचना को शुक्रवार को रद्द कर दिया। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर निजी कंपनियों के दवा बनाने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने इस दवा को बनाने की अनुमति केवल एक सरकारी कंपनी को दी थी।
न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट व न्यायमूर्ति एके चावला ने अपने फैसले में कहा कि यह अधिसूचना पूरी तरह गलत व मनमानी थी। इस बात का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि इस दवा का इस्तेमाल डेयरी सेक्टर में पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।
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हाईकोर्ट ने निजी दवा कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 31 अगस्त को इस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। इसके बाद यह रोक आगे बढ़ती रही। याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने इस अधिसूचना को शुक्रवार को रद्द कर दिया। केंद्र सरकार ने 27 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर यह दवा बनाने की अनुमति केवल सरकारी कंपनी कर्नाटका एंटीबायोटिक्स एंड फार्मस्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) को दी गई थी। इस कंपनी को देश भर की दवा की जरूरत पूरी करने की जिम्मेदारी थी।
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क्या है ऑक्सीटोसिन
ऑक्सीटोसिन नामक रसायन प्रसूति, स्तनपान व सामाजिक मेलजोल के दौरान पिच्यूटरी ग्रंथि से स्रावित होता है। इसलिए इसे लव हार्मोन भी कहा जाता है। यह दवा मुख्य रूप से प्रसूति के बाद महिलाओं में रक्तस्राव रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसे जीवन रक्षक श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना था कि इस दवा का इस्तेमाल डेयरी सेक्टर में पशुओं की दूध क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे पशुओं व मनुष्यों की सेहत खराब हो रही है।