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पीसीए के गठन पर उपराज्यपाल व सरकार में खिंची तलवार
Updated Fri, 14 Dec 2018 05:35 AM IST
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पीसीए के गठन पर एलजी व सरकार में खिंची तलवार
- दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने लिखा उपराज्यपाल को पत्र, अधिसूचना रद्द करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की चुनी हुई सरकार व उपराज्यपाल एक बार फिर आमने-सामने हैं। मसला पुलिस शिकायत प्राधिकरण (पीसीए) के गठन का है। दिल्ली सरकार का कहना है कि पीसीए के गठन का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में पीसीए के गठन की अधिसूचना गैर-कानूनी है। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस बारे में एक पत्र लिखकर अपनी आपत्ति उठाई है।
इससे पहले उपराज्यपाल ने जनवरी 2018 में पीसीए के गठन का फैसला किया था। इसके सदस्यों के चयन के लिए करीब चार महीने पहले विज्ञापन निकाला गया। उपराज्यपाल ने अब पूर्व आईएएस अधिकारी नूतन गुहा विश्वास, पूर्व पुलिस अधिकारी के कामराज और वरिष्ठ महिला वकील टीनू बाजवा का चयन बतौर सदस्य के तौर पर किया है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
इस पर आपत्ति जताते हुए सत्येंद्र जैन ने लिखा है कि पीसीए के गठन का मामला अभी अदालत में लंबित है। फैसला आए बगैर अथारिटी का गठन नहीं हो सकता। सत्येंद्र जैन ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि दो दिन पहले कोर्ट के निर्देश को नजरअंदाज करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई। उन्होंने मांग की है कि उपराज्यपाल इस अधिसूचना को तुरंत प्रभाव से खारिज करें।
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अदालत में चल रहा है मामला
उपराज्यपाल ने पुलिस संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए बीते जनवरी पीसीए के गठन का फैसला लिया था। इसके सदस्यों का कार्यकाल तीन साल होगा और वह सीधे उपराज्यपाल का रिपोर्ट करेंगे। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार भी पीसीए में अपना प्रतिनिधित्व भी चाहती थी। बतौर सदस्य वह इसमें दो विधायकों को मनोनीत करने की योजना थी। सरकार ने इस मसले पर उपराज्यपाल से अपील भी की थी, लेकिन उपराज्यपाल इससे सहमत नहीं हुए। इसके बाद आम आदमी पार्टी विधायक संजीव झा ने कोर्ट में इसके गठन को लेकर याचिका दाखिल की। मामला अभी अदालत में लंबित है।
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- दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने लिखा उपराज्यपाल को पत्र, अधिसूचना रद्द करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की चुनी हुई सरकार व उपराज्यपाल एक बार फिर आमने-सामने हैं। मसला पुलिस शिकायत प्राधिकरण (पीसीए) के गठन का है। दिल्ली सरकार का कहना है कि पीसीए के गठन का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में पीसीए के गठन की अधिसूचना गैर-कानूनी है। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस बारे में एक पत्र लिखकर अपनी आपत्ति उठाई है।
इससे पहले उपराज्यपाल ने जनवरी 2018 में पीसीए के गठन का फैसला किया था। इसके सदस्यों के चयन के लिए करीब चार महीने पहले विज्ञापन निकाला गया। उपराज्यपाल ने अब पूर्व आईएएस अधिकारी नूतन गुहा विश्वास, पूर्व पुलिस अधिकारी के कामराज और वरिष्ठ महिला वकील टीनू बाजवा का चयन बतौर सदस्य के तौर पर किया है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
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इस पर आपत्ति जताते हुए सत्येंद्र जैन ने लिखा है कि पीसीए के गठन का मामला अभी अदालत में लंबित है। फैसला आए बगैर अथारिटी का गठन नहीं हो सकता। सत्येंद्र जैन ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि दो दिन पहले कोर्ट के निर्देश को नजरअंदाज करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई। उन्होंने मांग की है कि उपराज्यपाल इस अधिसूचना को तुरंत प्रभाव से खारिज करें।
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अदालत में चल रहा है मामला
उपराज्यपाल ने पुलिस संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए बीते जनवरी पीसीए के गठन का फैसला लिया था। इसके सदस्यों का कार्यकाल तीन साल होगा और वह सीधे उपराज्यपाल का रिपोर्ट करेंगे। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार भी पीसीए में अपना प्रतिनिधित्व भी चाहती थी। बतौर सदस्य वह इसमें दो विधायकों को मनोनीत करने की योजना थी। सरकार ने इस मसले पर उपराज्यपाल से अपील भी की थी, लेकिन उपराज्यपाल इससे सहमत नहीं हुए। इसके बाद आम आदमी पार्टी विधायक संजीव झा ने कोर्ट में इसके गठन को लेकर याचिका दाखिल की। मामला अभी अदालत में लंबित है।