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-जीन्स की रंगाई और धुलाई करने वाली औद्योगिक ईकाइयों से प्रदूषण
Updated Thu, 13 Dec 2018 06:32 AM IST
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रंगाई-धुलाई करने वाली इकाइयों की जांच करें : एनजीटी
संयुक्त समिति गठित कर कार्रवाई करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी में जीन्स की रंगाई और रसायनों से धुलाई वाली डाइंग यूनिट के बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दक्षिण - पूर्व के संबंधित उप दंडाधिकारी (एसडीएम) की एक संयुक्त समिति गठित की है। इन्हें आली विहार में भीम कॉलोनी और सरिता विहार में इस तरह की इकाइयों की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। दरअसल, आली विहार विकास मंच ने आरोप लगाया है कि दक्षिण-पूर्व दिल्ली में ऐसी डाईंग यूनिट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। करीब 50 फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। इनके जरिए खतरनाक रसायन और जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ आबोहवा प्रदूषित हो रही है, बल्कि कॉलोनी के नाले भी चोक हो रहे हैं। ऐसे में संयुक्त समिति इस मामले की पूरी जांच करे और तथ्य ट्रिब्युनल को मुहैया कराए। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी करे। इसकी रिपोर्ट भी एनजीटी ने तलब की है।
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संयुक्त समिति गठित कर कार्रवाई करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी में जीन्स की रंगाई और रसायनों से धुलाई वाली डाइंग यूनिट के बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दक्षिण - पूर्व के संबंधित उप दंडाधिकारी (एसडीएम) की एक संयुक्त समिति गठित की है। इन्हें आली विहार में भीम कॉलोनी और सरिता विहार में इस तरह की इकाइयों की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। दरअसल, आली विहार विकास मंच ने आरोप लगाया है कि दक्षिण-पूर्व दिल्ली में ऐसी डाईंग यूनिट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। करीब 50 फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। इनके जरिए खतरनाक रसायन और जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ आबोहवा प्रदूषित हो रही है, बल्कि कॉलोनी के नाले भी चोक हो रहे हैं। ऐसे में संयुक्त समिति इस मामले की पूरी जांच करे और तथ्य ट्रिब्युनल को मुहैया कराए। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी करे। इसकी रिपोर्ट भी एनजीटी ने तलब की है।